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जहानाबाद विधानसभा सीट: इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगाना चाहेगी राजद!

जहानाबाद विधानसभा सीट अपने ही जिले और लोकसभा क्षेत्र की सीट है. ये वो इलाका है, जिसे यादव बहुल क्षेत्र में माना जाता है.

राजद की जीत पर नजर राजद की जीत पर नजर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में बजा विधानसभा चुनाव का बिगुल
  • तीन चरणों में राज्य में होंगे विधानसभा चुनाव

बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. एक महीने में मतदान होना है, इससे पहले हर विधानसभा सीट पर हलचल तेज़ है. राज्य की जहानाबाद विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक पार्टियों की नज़र है. ये सीट अभी राष्ट्रीय जनता दल के पास है, लेकिन इस बार एनडीए की नज़र यहां पर है. ऐसे में यहां पर दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है. 

कब है वोट‍िंग?
जहानाबाद विधानसभा सीट पर पहले चरण में 28 अक्टूबर को मतदान है. इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 3 चरणों में होंगे. पहले चरण का चुनाव 28 अक्टूबर को होगा, दूसरे चरण के लिए 3 नवंबर को वोट डाले जाएंगे जबकि तीसरे यानी आखिरी चरण का चुनाव 7 नवंबर को होगा. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे. 

इस बार के मुख्य उम्मीदवार

  • जेडीयू - कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा
  • आरजेडी - कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव
  • एलजेपी - इंदु देवी कश्यप


क्या कहता है सीट का इतिहास?
जहानाबाद जिले की विधानसभा सीट है, जहां 1951 में ही पहली बार विधानसभा हुए थे. ये सीट अभी सामान्य है, लेकिन बीच में कुछ चुनाव के लिए इसे आरक्षित सीट की श्रेणी में डाल दिया गया था. शुरुआत से ही इस सीट पर मिला जुला नेतृत्व देखने को मिला है, कभी कांग्रेस तो कभी निर्दलीय विधायक यहां से चुनाव जीते हैं. लेकिन 1990 के बाद से ही ये सीट जनता दल या फिर राजद के हाथ में रही है.

क्या है सीट की जातीय समीकरण?
जहानाबाद विधानसभा सीट अपने ही जिले और लोकसभा क्षेत्र की सीट है. ये वो इलाका है, जिसे यादव बहुल क्षेत्र में माना जाता है. यही कारण है कि राजनीतिक दलों की ओर से हमेशा ही जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों को उतारा जाता है. साथ ही इस सीट पर भूमिहार वोटरों की बड़ी संख्या है. पिछले चुनाव तक इस सीट पर वोटरों की कुल संख्या 2.82 लाख तक थी, जिसमें करीब 1.40 लाख वोटर पुरुष थे. 

2015 के चुनाव में क्या रहे थे नतीजे?
पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल की जीत हुई थी. हालांकि, तब राजद और जदयू एक ही साथ थे. लेकिन इस सीट पर 2018 में उपचुनाव भी हुआ था, तब भी राजद को ही जीत मिल गई थी. उपचुनाव में राजद के सुदय यादव को इस सीट पर जीत मिली थी. उन्हें करीब 76 हजार और जदयू के उम्मीदवार को 46 हजार के करीब वोट मिल पाए थे.

स्थानीय विधायक के बारे में
2015 के चुनाव में जिन मुद्रिका सिंह यादव ने यहां से चुनाव लड़ा वो राजद के बड़े नेता थे, लेकिन 2017 में डेंगू के कारण उनकी मौत हो गई. मुद्रिका सिंह की मौत के बाद राजद ने उनके ही बेटे सुदय यादव को चुनावी मैदान में उतार दिया, जिसका उन्हें फायदा भी मिला.


 

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