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बक्सर: जहां के युद्ध ने तय की थी भारत पर अंग्रेजी राज की शुरुआत

गंगा नदी के तट से लगा हुआ बक्सर ऐतिहासिक शहर रहा है. इसे अक्सर छोटी काशी कहकर भी बुलाया जाता रहा है. इसकी वजह इसका गंगा नदी के तट से लगा होना है.

बक्सर के युद्ध से भारत में अंग्रेजी राज की शुरुआत हुई बक्सर के युद्ध से भारत में अंग्रेजी राज की शुरुआत हुई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बक्सर के युद्ध के बाद शुरू हुआ था भारत में अंग्रेज राज
  • अब बक्सर की जमीन पर भगवा परचम
  • बक्सर की मिट्टी से निकले हैं उस्ताद बिस्मिल्ला खां

बक्सर जिला बिहार के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से में आता है. इसके पड़ोसी जिले रोहतास, कैमूर और भोजपुर हैं. पूरब और उत्तरी की ओर से यह जिला गंगा और इसकी सहायक कर्मनाशा नदी से घिरा हुआ है. बक्सर के पास ही कर्मनाशा गंगा नदी में समाहित हो जाती है. बक्सर जिले की इस ओर की सीमा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और बलिया जिले से लगी हुई है. एक जिले के तौर पर बक्सर को 17 मार्च 1991 को मान्यता मिली थी जब यह बिहार के भोजपुर जिले से अलग होकर स्वतंत्र जिला बना. बक्सर जिला मूल रूप से एक कृषि प्रधान जिला है. 

कई नाम रहे हैं बक्सर से 
बक्सर को पुराने समय में सिद्धाश्रम, वेदगर्भापुरी, करुष, तपोवन, चैत्रथ, व्याघ्रसर और फिर बक्सर के नाम से जाना जाता था. गंगा नदी के तट से लगा हुआ बक्सर ऐतिहासिक शहर रहा है. इसे अक्सर छोटी काशी कहकर भी बुलाया जाता रहा है. इसकी वजह इसका गंगा नदी के तट से लगा होना है. हिंदू धर्मावलंबियों में इस जहर की काफी मान्यता है. बाघों का निवास स्थल होने और एक बड़ा सरोवर होने की वजह से इसका नाम 'व्याघ्रसर' पड़ा था. यही नाम बाद में बक्सर बन गया. कार्तिक पूर्णिमा को बक्सर में बड़ा मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग आते हैं. 

प्राचीन साहित्य में बक्सर
बक्सर का जिक्र साहित्यिक और मिथकीय रचनाओं में भी आता है. कहा जाता है कि गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्या को जब पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया था तो राम ने उनका यहीं पर उद्धार किया था. बक्सर से छह किमी दूर इस जगह को अहिरौली के नाम से जाना जाता है. बक्सर का एक और संदर्भ इन ग्रंथों में मिलता है जहां कहा गया है कि विश्वामित्र का आश्रम भी बक्सर (कवलदह पोखरा) में था और यहीं पर राम ने ताड़का को मारा था. 

इतिहास के झरोखे में बक्सर
बक्सर का जिक्र इतिहास की किताबों में भी आता है. बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाकर सन 1764 में बक्सर का युद्ध लड़ा था. गंगा के तट पर हुए इस युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी यानी अंग्रेजों को जीत मिली थी. अंग्रेजों के खिलाफ संयुक्त मोर्चे के 2000 से ज्यादा सैनिक डूब गए थे या मारे गए थे. यह युद्ध इन मायनों में ऐतिहासिक था कि भारतीय नवाबों को हराने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी काफी ताकतवर और संगठित हो गई थी. भारतीय महाद्वीप में अंग्रेजों के दखल और शासन की शुरुआत यहीं से हुई थी. बक्सर में एक और ऐतिहासिक- चौसा का युद्ध हुआ था. यह बक्सर शहर से 10 मील दूर चौसा के मैदान में सन 1539 में हुआ था. शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच हुए इस युद्ध में हुमायूं की हार हुई थी. बक्सर की खुदाई में मौर्यकाल की लघु मूर्तियां भी निकली थीं, जो पटना संग्रहालय में रखी गई हैं.

खेती और छिटपुट उद्योगों का सहारा 
बक्सर में सोन और गंगा नदी पानी का स्रोत हैं. ये नदियां जिले की ज्यादातर खेती योग्य जमीन को सींचने का काम करती हैं. पहले इस जिले में काफी मात्रा में जंगल थे, लेकिन खेती के लिए जमीन बढ़ाने से जंगलों का सफाया हो गया. जंगलों के कटान से इस इलाके में पारिस्थितिकी में भी काफी बदलाव आया और जंगली जीव-जंतुओं की कई प्रजातियों को नुसान पहुंचा. यहां पर धान की खेती होती है. यहां सर्दियों में भी धान की खेती की जाती है. इसके अलावा यहां गेहूं, जौं, चना और दूसरी दालों की खेती की जाती है. इस इलाके में तिलहन और गन्ने की खेती भी होती है. नदियों के किनारे बसा होने से यहां उपजाऊ जमीन है और सिंचाई की सुविधा भी है. जिले में बक्सर और डुमरांव जैसे शहरों में छिटपुट औद्योगिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं. इन उद्योगों में साबुन का निर्माण, जंगल होने की वजह से लकड़ी की मिलें, चमड़ा उद्योग शामिल हैं. 

बक्सर जिले की सामाजिक संरचना 
2011 की जनगणना के अनुसार बक्सर जिले की कुल जनसंख्या लगभग 17 लाख है. बक्सर की आबादी में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के मुकाबले काफी कम है. जनगणना में सामने आया है कि यहां 1000 पुरुषों की तुलना में महिलाएं 922 ही हैं. बक्सर जिले में साक्षरता की दर 70 फीसदी है. यहां पर 99 फीसदी से ज्यादा लोग हिंदीभाषी है. 2011 की जनगणना में करीब 0.75 फीसदी लोगों ने उर्दू को अपनी पहली भाषा के तौर पर दर्ज कराया है. जिले में हिंदू धर्म को मानने वाली आबादी 93.27 फीसदी है तो मुस्लिमों की आबादी 6.18 प्रतिशत है. 

बक्सर की राजनीतिक जमीन पर भगवा परचम
बक्सर जिले में बक्सर लोकसभा सीट आती है. कभी कांग्रेस का गढ़ रही बक्सर सीट पर आज भाजपा की जीत का परचम लहराता है. यहां पर 1952 से लेकर 2019 तक के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को पांच बार जीत मिली है. दो बार सीपीआई के सांसद भी यहां से जीते हैं. हालांकि पिछले सात लोकसभा चुनावों में छह बार भाजपा को जीत मिली है और एक बार आरजेडी को. केंद्र सकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे दो बार से यहां के सांसद हैं. 

विधानसभा सीटों पर मिली-जुली ताकत
बक्सर जिले में आने वाली विधानसभा सीटों की बात करें तो यहां छह सीटें- ब्रह्मपुर, बक्सर, डुमरांव, राजपुर (अनुसूचित जाति), दिनारा, रामगढ़ आती हैं. इन सीटों पर किसी एक दल की ताकत देखने को नहीं मिलती है. बिहार के प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक दल हों या केंद्र में सत्ताधारी दल सभी के प्रतिनिधि इन सीटों पर जीतते रहे हैं. फिलहाल इन छह सीटों से आरजेडी और जेडीयू के पास दो-दो और कांग्रेस-भाजपा के पास एक-एक सीटें हैं. 

बक्सर की माटी से निकले उस्ताद बिस्मिल्ला खां 
बक्सर की मिट्टी ने देश को 'भारत रत्न' शहनाई वादक कमरुद्दीन बिस्मिल्ला खां जैसा नगीना दिया है, जिनके संगीत की तान देश ही नहीं दुनिया भर में गूंजती रही है. इन्हें उस्ताद बिस्मिल्ला खां के नाम से ज्यादा जाना जाता है. इसके अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हरिहर सिंह भी इसी जिले से आते हैं. वह एक प्रसिद्ध भोजपुरी कवि भी रहे हैं. 

चर्चा में बक्सर
बक्सर के लिए हाल ही में बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने करीब 18 लाख की परियोजनाओं का उद्घाटन किया था. इनमें जिला भूमि संरक्षण विभाग की आठ योजनाएं शामिल हैं, जिसकी कुल लागत 17.87 लाख रुपये है. इन योजनाओं में एक पक्का चेक डैम, तीन जल संग्रहन टैंक और चार फार्म पौंड बनाना शामिल हैं.

बक्सर के DM और SP
बक्सर के डीएम अरमान समीर हैं. उनसे ई-मेल के जरिए dm-buxar.bih@nic.in पर संपर्क किया जा सकता है. उनका मोबाइल नंबर 9473191239 है. बक्सर जिले के एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा हैं. उनसे ई-मेल के जरिए sp-buxar-bih@nic.in पर और फोन के जरिए 9431822981 मोबाइल नंबर पर और फैक्स के जरिए 06183-222179 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है. 
 

 

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