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बिहार: 2005 का वो चुनाव जब केजे राव बने हीरो और लालू-राबड़ी राज का हो गया अंत

एक सर्वे में लोगों को आधा दर्जन हस्तियों में से एक को बिहार में परिवर्तन के लिए हीरो चुनना था. सर्वे में नीतीश कुमार को पछाड़ते हुए केजे राव हीरो नंबर वन बने. केजे राव को 62 फीसदी लोगों का वोट मिला, जबकि नीतीश कुमार को 29 फीसदी लोगों ने हीरो चुना.

केजे राव (फोटो- Getty images) केजे राव (फोटो- Getty images)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अक्टूबर 2005 विधानसभा चुनाव में केजे राव थे पर्यवेक्षक
  • प्रदेश में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराने में रहे सफल
  • 15 साल बाद बिहार में लालू-राबड़ी राज का हुआ था अंत

बिहार की राजनीति में अक्टूबर 2005 का विधानसभा चुनाव कई मायने में अहम था. प्रदेश में चुनाव के दौरान पहले जोरदार बूथ कैप्चरिंग होती थी. आम जनता खासकर महिलाओं में बाहुलबलियों का आतंक होता था. इसलिए वे बूथ पर वोट डालने के लिए जाने से डरते थे. लेकिन 2005 के इस चुनाव में बूथ कैप्चरिंग पर काफी हद तक लगाम लग गई. इसका श्रेय मिला बिहार चुनाव के पर्यवेक्षक केजे राव को. आइए जानते हैं क्यों इस चुनाव में केजे राव हीरो बनकर उभरे.

बिहार में 1990 में लालू यादव सूबे के मुख्यमंत्री बन गए थे. सत्ता की चाबी लालू के हाथ में थी. लालू के बाद राबड़ी देवी प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. इसतरह 15 सालों तक बिहार की सत्ता पर लालू-राबड़ी का राज रहा. इन 15 सालों में लूट, मर्डर, किडनैपिंग, भ्रष्टाचार काफी बढ़ गया था. जनता परेशान थी. कहा जाता है इस दौरान रगंदारी और फिरौती से परेशान होकर कई व्यापारियों ने बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में अपना व्यवसाय शिफ्ट कर लिया था.  

कहा जाता है कि लालू यादव के शुरुआती 5 साल के शासन काल में तो हालात लगभग ठीक थे. लेकिन धीरे-धीर माहौल खराब होने लगा. फिर भी राजद की जीत होती रही तो चुनाव में धांधली का आरोप लगने लगा. लोगों को लग रहा था कि लालू के शासन काल का नजदीक भविष्य में अंत होना मुश्किल है. हालांकि बिहार के चुनाव में बूथ कैप्चरिंग का इतिहास काफी पुराना रहा है. लेकिन 2005 के चुनावों से पहले यह चरम पर था. 

दूसरे आम चुनाव में सूबे में पहली बार बूथ कैप्चरिंग

पहली लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद देश में 1957 में दूसरा आम चुनाव हुआ. तात्कालिक प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में एकबार फिर कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली. लेकिन कहा जाता है कि इस चुनाव में ही देश में पहली बार बूथ कैप्चरिंग की घटना हुई और इस घटना का गवाह बिहार बना. बिहार के बेगूसराय जिले में बूथ कैप्चरिंग की घटना को अंजाम दिया गया. 

इसके बाद तो बिहार के चुनाव में बूथ कैप्चरिंग बढ़ती गई. बाद के चुनावों में राजनीतिक पार्टियां माफियाओं तक का सहारा लेने लगीं. बिहार के चुनावों में बाहुबलियों का बोलबाला हो गया. कई संवदेनशील बूथों पर तो जनता वोट के लिए पहुंचती, उसके पहले ही बूथ कैप्चरिंग कर उनका वोट डाल दिया जाता.

पर्यवेक्षक केजे राव की निगरानी में हुआ चुनाव 

चुनाव आयोग द्वारा केजे राव को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था. राव के कंधों पर बिहार में स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी थी. केजे राव ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया. उन्होंने पिछले चुनाव में जिन बूथों पर गड़बड़ी हुई थी और जिन्होंने इसे अंजाब दिया था उनको आइडेंटिफाई किया.

अधिकारियों के सहयोग से उनपर अंकुश लगाया गया. संवेदनशील बूथों पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए. लोगों से अपील की गई कि वो वोट के लिए निडर होकर निकलें, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है. इसका परिणाम चुनाव में देखने को मिला. लोग बड़ी संख्या में वोटिंग के लिए निकले. विभाजित बिहार में सुशासन एवं विकास राजनीति का अहम मुद्दा बना. 

15 साल बाद लालू-राबड़ी राज का हुआ अंत

कहा जाता है कि पहली बार जात-पात से ऊपर उठकर लोगों ने वोटिंग की. नतीजा भी सामने आया और 15 साल बाद बिहार की राजनीति ने करवट ली. लालू-राबड़ी राज का अंत हो गया. जहां फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में किसी दल को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं मिला था.

वहीं अक्टूबर 2005 के इस चुनाव में जदयू और भाजपा गठबंधन को भारी सफलता मिली. फरवरी चुनाव में राजद को 75 सीटें मिली थीं, जो अक्टूबर में घटकर 54 हो गई. जदयू को 55 की जगह 88 हो गई जबकि भाजपा की 37 की जगह 55 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 10 की जगह 9 और लोक जनशक्ति पार्टी को 29 की जगह मात्र 10 सीटें मिलीं. इस तरह नीतीश कुमार के रूप में बिहार को नया नायक मिला. 

केजे राव बने अक्टूबर 2005 चुनाव के हीरो

चुनाव के बाद rediff.com ने बिहारटाइम्स डॉट कॉम के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसमें एक सर्वे किया गया था. इस सर्वे में लोगों को आधा दर्जन हस्तियों में से एक को बिहार में परिवर्तन के लिए हीरो चुनना था. सर्वे में नीतीश कुमार को पछाड़े हुए केजे राव हीरो नंबर वन बने.

केजे राव को 62 फीसदी लोगों का वोट मिला जबकि नीतीश कुमार को 29 फीसदी लोगों ने हीरो चुना. बिहारटाइम्स डॉट कॉम के तत्कालीन सीईओ अजय कुमार ने कहा था, ''केजे राव इस साल बिहार के हीरो नंबर वन हैं, क्योंकि उन्होंने सूबे में पहली बार शांतिपूर्वक और निष्पक्ष चुनाव कराने में सफलता प्राप्त की है."

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