scorecardresearch
 

बिहारः 2015 के चुनाव में गोभी, प्रेशर कुकर, डीजल पंप, पंखा के चिन्ह पर भी मिल गई थी जीत

2015 के चुनाव में कई दलों ने आपसी समझौता कर चुनावी समर में ताल ठोकी थी, लेकिन पार्टी आधार पर आकलन करें तो राष्ट्रीय जनता दल ने सबसे ज्यादा 80 सीटों (लालटेन चुनाव चिन्ह) पर जीत हासिल की थी. उसके बाद जनता दल यूनाइटेड को 71 सीटों (तीर चुनाव चिन्ह) पर जीत मिली थी.

Advertisement
X
बिहार में 2015 के चुनाव में पत्तागोभी और पंखा चिन्ह पर भी मिली थी जीत (सांकेतिक-पीटीआई)
बिहार में 2015 के चुनाव में पत्तागोभी और पंखा चिन्ह पर भी मिली थी जीत (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में इस बार 3 चरण में हो रहे हैं विधानसभा चुनाव
  • 2015 के चुनाव सबसे ज्यादा लालटेन को मिली थी जीत
  • 71 सीटों पर जेडीयू का तीर निशाने पर लगा था
  • 5 साल पहले 53 जगह खिला था बीजेपी का कमल

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है. हालांकि इस बार का चुनाव कई मायनों में पिछले चुनावों से अलग है. एक तो कोरोना महामारी को देखते हुए बेहद सावधानी के साथ 3 चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं तो कुछ शीर्ष नेता इस बार राज्य की राजनीति में दिखाई नहीं देंगे. अगर हम 2015 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो राज्य में सबसे ज्यादा जगहों पर लालटेन जली थी लेकिन कई जगहों पर गोभी, प्रेशर कुकर, डीजल पंप और पंखा जैसे चुनाव चिन्हों के साथ भी जीत मिली थी.

2015 के चुनाव में कई दलों ने आपसी समझौता कर चुनावी समर में ताल ठोकी थी, लेकिन पार्टी आधार पर आकलन करें तो राष्ट्रीय जनता दल ने सबसे ज्यादा 80 सीटों (लालटेन चुनाव चिन्ह) पर जीत हासिल की थी. उसके बाद जनता दल यूनाइटेड को 71 सीटों (तीर चुनाव चिन्ह) पर जीत मिली थी. कांग्रेस के साथ ये दोनों दल तब महागठबंधन का हिस्सा थे. कांग्रेस के खाते में 27 जीत (हाथ का पंजा चुनाव चिन्ह) आई थी.

तीसरे नंबर रही बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी सबसे ज्यादा जीत के मामले में तीसरे स्थान पर रही थी और उसे 53 सीटों (कमल) पर जीत मिली थी. इन 4 दलों के अलावा 4 अन्य दलों को जीत मिली थी लेकिन इनकी जीत का कुल आंकड़ा 8 तक ही पहुंचा. सबसे ज्यादा जीत के मामले में निर्दलीय पांचवें स्थान पर रहे क्योंकि 4 जगहों पर इन्हें जीत मिली थी.

Advertisement

इन्हीं जीत में एक जीत मिली थी वाल्मिकी नगर विधानसभा सीट से जहां पर निर्दलीय धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह जीते थे. धीरेंद्र निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान पर उतरे और गोभी के चुनाव चिन्ह के साथ लोगों के बीच गए और जीत हासिल की थी. इसी तरह हरलखी विधानसभा सीट से सीलिंग फैन (पंखा) चुनाव चिन्ह के साथ राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के टिकट पर बसंत कुमार विजयी हुए थे.

बिहार के बोचहां (Bochacha) सुरक्षित सीट से निर्दलीय प्रत्याशी बेबी कुमारी को जीत मिली थी. और बेबी का चुनाव चिन्ह था टेलीफोन. इस तरह कांति विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी अशोक कुमार चौधरी (सादातपुर) विजयी हुए थे और इनका चुनाव चिन्ह था प्रेशर कुकर. 

सीलिंग फैन से मिली जीत
मोकामा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी. यहां से अनंत कुमार सिंह विजयी हुए और डीजल पंप चुनाव चिन्ह के साथ वह चुनाव मैदान में उतरे थे, उन्हें कामयाबी भी मिली. अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित चेनारी (Chenari) विधानसभा सीट पर सीलिंग फैन चुनाव चिन्ह को कामयाबी मिली थी. सीलिंग फैन राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी का चुनाव चिन्ह था और यहां से लल्लन पासवान जीते थे.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी 2015 के चुनाव में अपनी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के टिकट पर चुनाव लड़े थे जिसमें उन्हें इमामगंज सुरक्षित सीट से जीत मिली थी. उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह था टेलीफोन.   

Advertisement

5 साल बाद एक बार फिर बिहार में चुनावी माहौल लौट आया है. हालांकि इस बार कोरोना संकट के दौर में यह चुनाव हो रहा है ऐसे में बेहद सावधानी बरती जा रही है. अब देखना होगा कि इस बार लालटेन, तीर और कमल के अलावा और किन-किन चुनाव चिन्हों को बिहार में जीत मिलती है.

Advertisement
Advertisement