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बिहार: कहलगांव है कांग्रेस का गढ़, सदानंद सिंह के दबदबे वाली है ये सीट

कहलगांव में कांग्रेस का ही बोलबाला रहा है. उसे 12 चुनावों में यहां पर जीत मिली है. कहलगांव में अगर किसी नेता का सबसे ज्यादा दबदबा रहा है तो वो सदानंद सिंह हैं. कांग्रेस को ज्यादातर चुनावों में उनके दम पर ही जीत मिली है. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह (फाइल फोटो) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भागलपुर जिले के अंतर्गत आती कहलगांव विधानसभा सीट
  • कहलगांव में कांग्रेस का रहा है दबदबा
  • कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह हैं यहां के विधायक

बिहार की कहलगांव विधानसभा सीट भागलपुर जिले के अंतर्गत आती है. साल 1951 में यहां पर हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. कहलगांव में विधानसभा के अब तक 17 चुनाव हुए हैं. इस सीट पर कांग्रेस का ही बोलबाला रहा है. उसे 12  चुनावों में यहां पर जीत मिली है. कहलगांव में अगर किसी नेता का सबसे ज्यादा दबदबा रहा है तो वो सदानंद सिंह हैं. कांग्रेस को ज्यादातर चुनावों में उनके दम पर ही जीत मिली है. 

कहलगांव के बारे में

अंग्रेजों के शासन के दौरान कहलगांव को कोलगोंग के नाम से जाना जाता था. ये विक्रमशीला के करीब है. कहलगांव का नाम कहोल ऋषि के नाम पर पड़ा, जो अष्टावक्र नाम के संत के पिता थे. 2011 की जनगणना के मुताबिक कहलगांव की जनसंख्या 5,10,397 है. यहां की 93.05 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र और 6.95 फीसदी जनसंख्या शहरी क्षेत्र में रहती है. कहलगांव की कुल जनसंख्या में से 11.71 फीसदी अनुसूचित जाति और 1.12 फीसदी अनुसूचित जनजाति के लोग हैं. 2019 की मतदाता सूची के मुताबिक, कहलगांव में 3,23,868 वोटर्स हैं. 

राजनीतिक पृष्ठभूमि

कहलगांव विधानसभा सीट कांग्रेस के दबदबे वाली सीट है. यहां पर सबसे ज्यादा उसे ही जीत मिली है. 1951 में हुए यहां पर पहले चुनाव में कांग्रेस के रामजन्म महतों विजयी रहे थे. कांग्रेस को 1967 के चुनाव में यहां पर पहली बार हार मिली. तब सीपीआई ने उसे शिकस्त दी थी. लेकिन अगले ही चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की और उसके बाद लगातार तीन चुनावों में उसे जीत मिली.

इसके बाद 1985,1990 और 1995 के चुनाव में कांग्रेस को यहां पर लगातार शिकस्त मिली. 2000 में कांग्रेस की एक बार फिर यहां पर वापसी होती है. कांग्रेस के सदानंद सिंह 2000 और 2005 के चुनाव में विजयी बनते हैं, लेकिन 2005 के ही उपचुनाव में उन्हें जेडीयू के अजय कुमार मंडल से शिकस्त मिल जाती है. लेकिन कहलगांव की जनता इसके बाद के चुनाव में सदानंद को एक बार विधानसभा भेजती है. उन्होंने 2010 और 2015 के चुनावों में जीत हासिल की. इस तरह से वह 9 बार इस सीट से विधायक चुने गए हैं. साल 1985 के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी.

2015 का जनादेश

2015 के विधानसभा चुनाव में कहलगांव में 3,08,196 मतदाता थे. इसमें से 52.75 फीसदी पुरुष और 47.25 फीसदी महिला वोटर्स थीं. 1,77,151 लोगों ने अपने मत का इस्तेमाल किया था. यानी यहां पर 57 फीसदी मतदान हुआ था. कांग्रेस के सदानंद सिंह ने एलजेपी के नीरज कुमार को 20 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी थी. सदानंद के खाते में 36.68 फीसदी वोट पड़े थे तो वहीं नीरज कुमार को 24.7 फीसदी वोट मिले थे. 

ये प्रत्याशी हैं मैदान में

कहलगांव विधानसभा सीट पर 14 उम्मीदवार मैदान में हैं. यहां से कांग्रेस के शुभानंद मुकेश और बीजेपी के पवन कुमार यादव प्रत्याशी हैं. इसके अलावा भारतीय समता समाज पार्टी के भागीरथ कुमार और बसपा के कृष्ण कुमार मंडल भी मैदान में हैं. कहलगांव में मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है.  

कितनी हुई वोटिंग

कहलगांव  में पहले चरण के तहत मतदान हुआ. यहां पर 28 अक्टूबर को वोटिंग हुई. कहलगांव में 61.95 फीसदी मतदान हुआ. मतगणना 10 नवंबर को की जाएगी.

सदानंद सिंह के बारे में 

सदानंद सिंह की गिनती बिहार कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होती है. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि बिहार में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बावजूद हर बार वह अपनी सीट बचाने में कामयाब रहते हैं. 21 मई, 1943 को जन्मे सदानंद सिंह री शैक्षणिक योग्यता बी.कॉम है. उन्होंने 1968 में राजनीति में एंट्री की. वह बिहार सरकार में सिंचाई एवं उर्जा राज्यमंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा 9 मार्च 2000 से 28 जून 2005 तक विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. सदानंद सिंह 1990 से 93 तक जिला कांग्रेस कमिटी, भागलपुर के अध्यक्ष रह चुके हैं. वह बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष भी रहे हैं. 2011 से अब तक वह कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं. 


 

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