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बंगाल से असम तक, चुनावी राज्यों को मोदी सरकार ने बजट में दी ये बड़ी सौगातें

निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में बताया, तमिलनाडु में नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट (1.03 लाख करोड़), इसी में इकॉनोमिक कॉरिडोर बनाए जाएंगे. केरल में 1100 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे बनाया जाएगा, जिस पर 65 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे.

स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंबई से कन्याकुमारी तक इकॉनोमिक कॉरिडोर
  • कोलकाता-सिलीगुड़ी नेशनल हाइवे का ऐलान
  • तमिलनाडु को टेक्सटाइल पार्क से होगा फायदा

मोदी सरकार के आम बजट (Budget 2021-22) में देश के चुनावी राज्यों पर विशेष कृपादृष्टि नजर आई है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में इस साल 3500 किमी नए राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाने का लक्ष्य रखा है और तमिलनाडु से लेकर केरल, असम और पश्चिम बंगाल को विकास की सौगात से नवाजा है. टेक्सटाइल पार्क से लेकर हाईवे और इकॉनोमिक कॉरिडोर के ऐलान को तमिलानाडु के राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है और पश्चिम बंगाल के हाइवे का कायाकल्प करने का ऐलान भी किया गया है.

निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में बताया, तमिलनाडु में नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट (1.03 लाख करोड़), इसी में इकॉनोमिक कॉरिडोर बनाए जाएंगे. केरल में 1100 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे बनाया जाएगा, जिस पर 65 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे. इसी के साथ मुंबई-कन्याकुमारी इकॉनोमिक कॉरोडिर का निर्माण किया जाएगा. राज्य के इंफ्रास्ट्रैक्चर के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. 

बंगाल को खास सौगात

निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल को भी खास सौगात से नवाजा है. कोलकाता-सिलीगुड़ी के लिए भी नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट का ऐलान किया गया है. 25 हजार करोड़ रुपए खर्च कर हजारों किलोमीटर हाईवे बनाए जाएंगे. इसमें कोलकाता-सिलीगुड़ी रोड की रिपेयर भी शामिल है. वित्त मंत्री ने असम में अगले तीन साल में हाइवे और इकॉनोमिक कॉरिडोर का ऐलान किया है.  

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से कहा गया कि पांच फिशिंग हार्बर को आर्थिक गतिविधि के हब के रूप में तैयार किया जाएगा. तमिलनाडु में फिश लैंडिंग सेंटर का विकास किया जाएगा. तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज के मोदी सरकार का यह बड़ा सियासी फैसला माना जा रहा है. 

इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार हो गई है. कुल 1.10 लाख करोड़ रुपये का बजट रेलवे को दिया गया है. भारतीय रेलवे के अलावा मेट्रो, सिटी बस सेवा को बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा. इसके लिए 18 हजार करोड़ रुपये की लागत लगाई जाएगी. अब मेट्रो लाइन को लाने पर जोर दिया जा रहा है. कोच्चि, बेंगलुरु, चेन्नई, नागपुर, नासिक में मेट्रो प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने का ऐलान किया गया. 

तमिलनाडु को टेक्सटाइल पार्क का भी फायदा

वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बजट भाषण में बताया गया कि देश में 7 टेक्स्टाइल पार्क बनाए जाएंगे, ताकि इस क्षेत्र में भारत एक्सपोर्ट करने वाला देश बने. ये पार्क तीन साल में तैयार किए जाएंगे. वित्त मंत्री की ओर से डेवलेपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट (DFI) बनाने का ऐलान किया गया, जिसमें तीन साल के भीतर 5 लाख करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट होगा. टेक्सटाइल की सौगात का गुजरात और महाराष्ट्र के बाद सबसे बड़ा फायदा तमिलनाडु जैसे राज्य में होगा, तेजी से इस क्षेत्र में उभरा है और गारमेंट्स उद्योग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. 

हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तमिलनाडु के दौरे पर गए थे, तो उन्होंने टेक्सटाइल और गारमेंट्स क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों से मुलाकात की थी और मोदी सरकार पर जमकर बरसे थे. ऐसे में केंद्रीय वित्त मंत्री ने टेक्सटाइल के क्षेत्रे में बड़ी घोषणा करके कांग्रेस के दांव को काउंटर करने का दांव चला है. 

बता दें कि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. असम में बीजेपी और असम गण परिषद के गठबंधन की सरकार है, जिसमें मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल हैं. पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार है और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं. केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है यानी भाकपा और माकपा के साथ अन्य लेफ्ट पार्टियों का गठबंधन है और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन हैं. तमिलनाडु में ई. पलानीस्वामी सीएम हैं और एआईएडीएमके सत्ता में है. कांग्रेस के पास सिर्फ केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी है, जहां वी नारायणसामी सीएम हैं.

बीजेपी इन पांच राज्यों में चुनावी जंग फतह करने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है. बीजेपी की नजर खासकर पश्चिम बंगाल में ममता के दुर्ग को भेदने की है तो असम में अपनी सत्ता को हरहाल में बचाए रखने की है. वहीं, तमिलनाडु में बीजेपी AIADMK के सहारे मैदान में है. चुनाव से पहले मोदी सरकार ने बजट के जरिए पांचों राज्यों के चुनावी समीकरण साधने का दांव चला है.

हालांकि, देश के पांच राज्यों में मतदान के समय तक ये योजनाएं और घोषणाएं जमीन तक नहीं उतर सकेंगे, लेकिन मोदी सरकार और बीजेपी नेताओं के पास अपनी चुनावी जनसभाओं में गिनाने लिए जरूर हो गई है. अप्रैल तक देश के पांच राज्यों में चुनाव होने है और इस तरह से महज दो ही महीने बचे हैं. चुनावी राज्य होने के चलते सरकार जल्द ही इसे शुरू कर सकती है. 

 

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