चुनाव बहिष्कार की धमकी और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है. एक पक्ष का कहना है कि बहिष्कार नक्सली और माओवादी सोच है. सुप्रीम कोर्ट ने 1989 और 2013 में फैसला दिया है कि बहिष्कार से चुनाव प्रक्रिया नहीं रुकती. मतदाता सूची में नाम कटने या जुड़ने से किसी पार्टी को फायदा होने के दावों पर सवाल उठाए गए, जिसमें तेलंगाना, झारखंड और जम्मू कश्मीर के उदाहरण दिए गए.