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असम: बीजेपी को मात देने के लिए पांच पार्टियों के साथ मैदान में उतरेगी कांग्रेस

गुवाहाटी में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस, एआईयूडीएफ, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (एमएल) और आंचलिक गण मोर्चा के नेताओं ने ऐलान किया कि सभी छह पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

गुवाहाटी में नए महागठबंधन में शामिल हुए दलों के नेता.(फोटो-हेमंत नाथ/आजतक) गुवाहाटी में नए महागठबंधन में शामिल हुए दलों के नेता.(फोटो-हेमंत नाथ/आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • छह पार्टियां साथ मिलकर लड़ेंगी चुनाव
  • 2021 में पांच राज्यों में होने हैं चुनाव
  • पिछले चुनाव में बीजेपी ने 126 में 60 सीटें जीती थीं

इस साल कुछ महीने बाद देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं जिनमें से एक असम भी है. राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस पांच अन्य पार्टियों के साथ मैदान में उतरेगी. कांग्रेस ने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अलावा पांच अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन का ऐलान किया है.

कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने मंगलवार के ऐलान किया कि वे बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए एक महागठबंधन बना रहे हैं, जिसमें इन दोनों के अलावा चार लेफ्ट पार्टियां भी होंगी. गुवाहाटी में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस, एआईयूडीएफ, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (एमएल) और आंचलिक गण मोर्चा के नेताओं ने ऐलान किया कि सभी छह पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

असम की जनता के हित के लिए ये पार्टियां मिलकर एक महागठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ेंगी. इन नेताओं ने अन्य ​बीजेपी विरोधी पार्टियों से अपील की सत्तारूढ़ बीजेपी को हराने के लिए साथ आएं और महागठबंधन में शामिल हों. समान विचारधारा वाली सभी पार्टियों के लिए गठबंधन के दरवाजे खुले हैं.

पिछले चुनाव में किसे क्या मिला

2021 में देश के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जिनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम में चुनाव होने हैं. इन राज्यों में सियासी उठापटक अभी से शुरू हो गई है.असम में 2016 में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसमें बीजेपी ने कांग्रेस को हराकर सत्ता कब्जाई थी और बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने थे.

इस चुनाव में बीजेपी ने 126 में 60 सीटें जीती थीं. बीजेपी की सहयोगी असम गण परिषद ने 14 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 12 सीटें हासिल की थीं. विपक्षी कांग्रेस को मात्र 26 सीटें मिली थीं और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ को 13 सीटें मिली थीं. इस चुनाव में सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई(एमएल) का खाता भी नहीं खुल सका था.

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