scorecardresearch
 

एक ऐसा टीचर, जो बच्चों को पढ़ाने के लिए करता है 370KM का सफर

शिक्षक दिवस के मौके पर पढ़िए एक ऐसे टीचर की कहानी, जो हर हफ्ते अपनी नौकरी करने के बाद बच्चों को पढ़ाने के लिए करीब 370 किलोमीटर का सफर करता है.

Advertisement
X
प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

आज पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा है. कहा जाता है कि शिक्षक ही किसी भी व्यक्ति के जीवन की नींव मजबूत करता है. डॉ. राधाकृष्णन मानते थे कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा, तब तक शिक्षा को मिशन का रूप नहीं मिल पाएगा. देश में आज भी कई ऐसे शख्स हैं, जो इस मिशन को पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं. इन टीचर्स में एक गुरुग्राम के आशीष का नाम भी शामिल है, जो गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए हर हफ्ते गुड़गांव से उत्तराखंड का सफर करते हैं.

आशीष एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में नौकरी करते हैं. बच्चों को पढ़ाना उन्हें अच्छा लगता है, जिसके चलते वह हर हफ्ते अपने गांव जाते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं. बता दें, उनका गांव तिमली पौड़ी-गढ़वाल जिले में है. साल 1882 में उनके दादा जी के दादा जी ने एक संस्कृत स्कूल खोला था. उस दौरान वह गढ़वाल, हिमालय में एकमात्र संस्कृत स्कूल होता था, जिसे संयुक्त प्रांत (ब्रिटिश सरकार) द्वारा मान्यता प्राप्त थी.

Advertisement

एक समय ऐसा था जब इस स्कूल में काफी छात्र पढ़ने आते थे. लेकिन साल 2013 में जब आशीष को मालूम चला कि उस स्कूल में केवल तीन छात्रों ने अपना दाखिला कराया है तो उन्हें इस बात से काफी फर्क पड़ा. वह जल्द ही समझ गए थे कि स्कूल में गरीबी के चलते कोई भी नहीं पढ़ने नहीं आ पा रहा है. ये सब देखने के बाद आशीष ने अपने गांव के पास में ही अपने रिश्तेदारों की मदद से एक कंप्यूटर सेंटर खोल दिया और नाम रखा 'द यूनिवर्सल गुरुकुल'. इस सेंटर में तिमली और आसपास के इलाकों के बच्चे कंप्यूटर सीखने आते हैं.

आशीष के लिए कंप्यूटर सेंटर खोलना इतना आसान नहीं था. उन्होंने सेंटर खोलने के लिए पैसे जुटाए और कई नौकरियां बदली.  इसके बाद अपनी पत्नी और भाई की मदद से कंप्यूटर सेंटर शुरू किया. वे साल 2013 में वे गुड़गांव में शिफ्ट हुए थे और 2014 से कंप्यूटर सेंटर की शुरुआत हुई. बच्चों को शिक्षित करने मुहिम में जुटे आशीष का जज्बा कमाल का है. वह हर हफ्ते गुड़गांव से तिमली जाते हैं और कंप्यूटर सेंटर के साथ ही पास के प्राइमरी स्कूल के बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं.

बच्चों को पढ़ाने के लिए आशीष आईएसबीटी से बस पकड़ते हैं. उन्होंने बताया 'जिस गांव में पढ़ाने जाते हैं वहां गांव से लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में कोई स्कूल नहीं है'. यही वजह है कि लगभग 23 गांव के 36 बच्चे उनके स्कूल में पढ़ रहे हैं. स्कूल जाने के लिए बच्चे हर दिन 4 से 5 किलोमीटर का सफर करते हैं. बता दें, गुरुग्राम से उत्तराखंड की दूरी 370 किलोमीटर है और 10 घंटे का समय लगता है.

Advertisement
Advertisement