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राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करने का ये है नियम, इनका होता है चयन

भारतीय संसद के ऊपरी सदन को राज्यसभा कहते हैं. जानिए कैसे चुने जाते हैं इसके सदस्य. इसमें राज्यों के अलावा 12 सदस्य अलग नि‍यम से चुने जाते हैं. जानें- इनके चुनाव की पूरी प्रक्र‍िया.

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राज्यसभा सदन
राज्यसभा सदन

भारतीय संसद में दो सदन हैं पहला लोकसभा और दूसरा राज्यसभा. राज्यसभा संसद का ऊपरी सदन कहा जाता है. बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के मुताबिक राज्यसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है. इनमें से 12 वो सदस्य होते हैं जिन्हें स्वयं भारत के राष्ट्रपति मनोनीत या नामित करते हैं. इसके अलावा बाकी बचे 238 सदस्य संघ और राज्य के प्रतिनिधि चुनते हैं.

क्यों हैं वर्तमान में सिर्फ 245 सदस्य

इसके पीछे की खास वजह संविधान की अनुसूची चार मानी जाती है. इस अनुसूची के मुताबिक राज्यसभा के सदस्यों का चयन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की आबादी के आधार पर किये जाने के निर्देश हैं. इस प्रकार जब आबादी के हिसाब से गणना की गई तो राज्यसभा के सदस्यों की कुल संख्या 233 ही पहुंच पाई, बाकी बचे राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य जोड़कर वर्तमान में राज्यसभा के कुल सदस्यों की संख्या 245 है.

कैसे होता है तय

भारत के किस राज्य से राज्यसभा में कितने सांसद होंगे इसकी गणना राज्य की जनसंख्या के हिसाब से होती है. राज्यसभा के इन सदस्यों का चुनाव विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं. इस तरह हरेक राज्‍य के प्रतिनिधियों की संख्‍या ज्यादातर राज्य की जनसंख्‍या पर डिपेंड करती है. इस तरह देखा जाए तो सबसे ज्यादा राज्यसभा में उत्तरप्रदेश से 31 सदस्य हैं. वहीं दूसरे राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मेघालय, गोवा, मिजोरम, सिक्‍किम, त्रिपुरा आदि छोटे राज्‍यों के सिर्फ एक एक सदस्‍य हैं. बता दें कि राज्य सभा के सदस्यों को चुनने का तरीका बाकी आम चुनाव या विधानसभा चुनाव से बिल्कुल जुदा होता है. आगे जानिए क्या होता है ये तरीका.

चाहिए होते हैं इतने वोट

राज्यसभा में एक उम्मीदवार को चुने जाने के लिए न्यूनतम मान्य वोट की जरूरत होती है. इन वोटों की गिनती सीटों की संख्या पर निर्भर करती है. इसे उत्तर प्रदेश के उदाहरण से इस तरह समझ सकते हैं. उत्तर प्रदेश में जहां विधायकों की कुल संख्या 403 है. अब जानिए किसी सदस्य को राज्यसभा की सीट पाने के लिए कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए. इसकी गणना कैसे होती है. तो बता दें कि इसकी गणना करने का एक अलग ही गण‍ित होता है. इसे कुल विधायकों की संख्या को जितने सदस्य चुने जाने हैं उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है.

इस बार यहां से 10 राज्यसभा सदस्यों का चयन होना है. इसमें 1 जोड़ने से यह संख्या 11 होती है. अब कुल सदस्य 403 हैं तो उसे 11 से विभाजित करने पर 36.66 आता है. इसमें फिर 1 जोड़ने पर यह संख्या 37.66 हो जाती है. यानी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 37 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी.

इसके अलावा वोट देने वाले प्रत्येक विधायक को यह भी बताना होता है कि उसकी पहली पसंद और दूसरी पसंद का उम्मीदवार कौन है. इससे वोट प्राथमिकता के आधार पर दिए जाते हैं. यदि उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता का वोट मिल जाता है तो वो वह जीत जाता है नहीं तो इसके लिए चुनाव होता है.

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