NEET Paper Leak 2026 मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को कई अहम सुराग मिले हैं. जांच के दौरान एजेंसी के सामने एक ऐसे नेटवर्क की तस्वीर उभर रही है, जो कथित तौर पर मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग और कंसल्टेंसी के जरिए सक्रिय था. जांच एजेंसियों का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर काम करने वाले कुछ लोगों का संबंध कथित तौर पर पेपर लीक जुड़ा हो सकता है.
पहला आरोपी BAMS थर्ड ईयर का छात्र
महाराष्ट्र से गिरफ्तार तीन आरोपियों में एक महिला भी शामिल है. जांच में सामने आया है कि इन लोगों के पारिवारिक संबंध मेडिकल क्षेत्र से जुड़े रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल BAMS थर्ड ईयर का छात्र शुभम खैरनार इस मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग से जुड़े काम में एक्टिव था.
मुख्य आरोपी शुभम खैरनार, बीएएमएस के थर्ड ईयर का छात्र है. उसने कथित तौर पर गुरुग्राम में यश यादव को पेपर दिया था. यादव ने इसे आगे राजस्थान के मंगिलाल बिवाल को दिया, जिसने अपने बेटे विकास बिवाल और भतीजों के लिए पेपर खरीदा था. बिवाल परिवार ने पेपर को अन्य इच्छुक छात्रों और यहां तक कि कुछ शिक्षकों को पैसे के बदले में ये पेपर दे दिया था. पुलिस सूत्रों के अनुसार शुभम खैरनार खुद बीएएमएस का छात्र है और वह पिछले छह महीनों से नासिक में तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था. लेकिन, इंडिया टुडे टीवी ने गुरुवार को खुलासा किया कि शुभम खैरनार किसी भी तरह की मेडिकल प्रैक्टिस या इंटर्नशिप नहीं कर रहा था, बल्कि वह मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग और कंसल्टेंसी का कारोबार चला रहा था.
मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की कंसल्टेंसी
वह नासिक में एसआर एजुकेशन कंसल्टेंसी नाम से कार्यालय चलाता था और मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के इच्छुक छात्रों को आश्वस्त करता था. खैरनार नासिक के कनाडा कॉर्नर इलाके के व्यावसायिक जिले में स्थित एक हाई-प्रोफाइल कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से अपना काम कर रहा था. इस कंसल्टेंसी की भोपाल, अकोला, पुणे और कई अन्य शहरों में भी शाखाएं थीं. सूत्रों के अनुसार, संस्था ने उम्मीदवारों को देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का आश्वासन दिया जाता था और साथ ही उन्हें NEET परीक्षा की तैयारी के लिए गाइडेंस और सहायता भी प्रदान की जाती थी. सूत्रों का कहना है कि काउंसलर राज्य भर के उन कोचिंग संस्थानों के साथ भी लगातार संपर्क में थे जो छात्रों को NEET परीक्षा में बैठने के लिए तैयार कर रहे थे.
दूसरे आरोपी की ट्रैवलिंग हिस्ट्री संदिग्ध
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से गिरफ्तार आरोपी दूसरा आरोपी धनंजय लोखंडे भी शुभम खैरनार के लगातार संपर्क में था. उसे ही NEET के गेस पेपर का सोर्स माना जा रहा है, जिसने खैरनार को प्रश्नपत्र मुहैया कराया था. सूत्रों के अनुसार, लोखंडे की ट्रैवल हिस्ट्री से पता चलता है कि वह कई बार मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों की यात्रा कर चुका है. मामला सामने आने के बाद लोखंडे पुणे स्थित अपने ठिकाने से भागकर अपने पैतृक गांव अहिल्यानगर लौट आया था. खैरनार की गिरफ्तारी के बाद वह अपने गांव से निकल गया और रास्ते में ही स्थानीय अपराध शाखा (LCB) के अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया. CBI ने लोखंडे को हिरासत में रखने के लिए LCB से संपर्क किया था. सूत्रों के मुताबिक, लोखंडे का भाई अहिल्यानगर जिले के राहुरी तालुका में डॉक्टर है और एक समय लोखंडे भी मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता था. इसी दौरान वह कई अन्य काउंसलरों और मेडिकल प्रवेश परामर्श से जुड़े लोगों के संपर्क में आया.
तीसरी आरोपी पेशे से ब्यूटीशियन
महाराष्ट्र की तीसरी आरोपी मनीषा वाघमारे नाम की महिला हैं, जो पेशे से ब्यूटीशियन हैं और पुणे में मेडिकल उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग और एडमिशन कंसल्टेंसी भी चलाती हैं. दिलचस्प बात यह है कि वाघमारे के पति भी पेशे से डेंटिस्ट हैं और पुणे में ही अपना क्लिनिक चलाते हैं. वाघमारे और लोखंडे के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वे 3 मई को हुई NEET परीक्षा से पहले और बाद में लगातार संपर्क में थे, और उस दौरान भी जब खैरनार ने यश यादव को गेस पेपर दिया था और फिर वह पेपर राजस्थान में बिवाल परिवार के सदस्यों के साथ साझा किया गया था.
मनीषा वाघमारे की अकाउंट हिस्ट्री संदिग्ध
वाघमारे के खातों में हुए बैंकिंग लेनदेन भी संदिग्ध हैं क्योंकि कई खाताधारकों ने NEET परीक्षा से पहले और बाद में उनके खातों में लगभग 20 लाख रुपये भेजे हैं. सूत्रों के अनुसार, वाघमारे के खातों में पैसे भेजने वाले खाते ज्यादातर अन्य राज्यों के हैं और कुछ इसी राज्य के भी हैं. ऐसे लगभग 21 खाते हैं जिन्होंने वाघमारे के खातों में पैसे भेजे हैं. वाघमारे और लोखंडे के बीच कई बार फोन और मैसेज का आदान-प्रदान हुआ, जिनमें से कई मैसेज डिलीट कर दिए गए हैं. हालांकि, सीबीआई टीम ने उनका मोबाइल फोन और अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन डेटा रिकवरी के लिए भेज दिए हैं. शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि मेडिकल एडमिशन काउंसलरों का गिरोह किसी ऐसे सिंडिकेट की मदद से यह रैकेट चला रहा था जो NEET पेपर लीक में शामिल था.
फिलहाल जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर सकता है. सीबीआई अब इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है.