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चप्पल पहन कर की थी ग्रेजुएशन, नहीं थे जूते खरीदने के पैसे: बसंत रथ

जो छात्र IPS और IAS बनना चाहते हैं उन्हें आईपीएस ऑफिसर बसंत रथ ने बताई ये 3 बातें...

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 बसंत रथ
बसंत रथ

ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित इंडिया टुडे माइंड रॉक्स में जम्मू- कश्मीर में तैनात लोकप्रिय आईपीएस और ट्रैफिक चीफ बसंत रथ ने शिरकत की. जहां उन्होंने अपने बारे में बताया कि कैसे ओडिशा का एक लड़का जम्मू कश्मीर में जाकर काम करता है और वहां के लोगों के दिल जीत लेता है.

बसंत रथ बैच 2000 के IPS ऑफिसर हैं. 46 साल के बसंत रथ का जन्म भले ही उड़ीशा में हुआ है लेकिन उन्होंने अपने काम से जम्मू- कश्मीर के लोगों को दिल जीत लिया. उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोग मेरे लोग हैं.  बसंत रथ ने बताया आज मैं जो भी कुछ बन पाया हूं वह अपनी मां की वजह से ही बन पाया हूं. उन्होंने बताया मेरा बचपन गरीबी में बीता. आगे उन्होंने कहा- जब घर में खाने को नहीं होता था तो कैसे उनकी मां बताती थी आज व्रत रखने का दिन है. 

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चप्पल पहन कर की थी ग्रेजुएशन, नहीं थे जूते खरीदने के पैसे

बसंत रथ ने बताया कि उनका पूरा बचपन गरीबी में बीता. जब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे् थे उस दौरान उनके पास दो जोड़ी जूते तक नहीं थे. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन के दौरान एक भी बार जूते नहीं पहने थे. बसंत ने बताया ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने 18 से 20 रुपये की बाटा की चप्पल ही पहनी थी. उस दौरान मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं खुद के लिए दो जोड़ी जूते खरीद लूं.

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यहीं नहीं उन्होंने बताया जब मैं मास्टर्स की पढा़ई कर रहा था. उस समय तक मैं हकलाता था. यहां तक मुझे इंग्लिश भाषा भी सही से बोलना नहीं आता था. वहीं उन्होंने बताया कि इंग्लिश सिर्फ एक भाषा है इसे आप बोल सकते हैं, लेकिन इससे सीख नहीं सकते. इंग्लिश बोलने का मतलब ये नहीं है कि आप एक अच्छे इंसान बन गए हैं.

अंत में उन्होंने युवाओं को सलाह देते हुए कहा, "टॉपर्स के पीछे न भागे. मेरी सलाह है कि ऐसे लोगों के पीछे भागे जो असल में मेहनती होते हैं और अपने काम में भरोसा करते हैं. बॉयफ्रेंड. गर्लफ्रेंड इंतज़ार कर सकते हैं. अपनी पढ़ाई पर गंभीरता से ध्यान दें.

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