आइए आपका परिचय कराते हैं 2012 बैच के एक ऐसे आईएएस अफसर से जो कभी डीआरडीओ में साइंटिस्ट थे. आज वो उड़ीसा में तैनात हैं. हाल ही में उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो सुंदरगढ़ के एक स्कूल के औचक निरीक्षण में नंगे पैर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए चप्पल लेकर पहुंचे थे. उनकी तैयारी से लेकर उनके पूरे सफर को यहां जानें.
ये अफसर हैं सुरेंद्र कुमार मीना जो वीडियो में बच्चों को अपने घुटनों पर बैठकर चप्पल पहनने में मदद करने लगे थे. इस वीडियो ने उन्हें बहुत लोगों के दिलों के करीब पहुंचा दिया. तो आइए जानते हैं उनके पूरे सफर के बारे में कि किस तरह 36 साल के राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रहने वाले इस अफसर के बारे में जो अभी सुंदरगढ़ के डिस्ट्रिक कलेक्टर हैं.
इसलिए पसंद है उड़ीसा
इलेक्ट्रिकल इंजीनियर मीना रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) में एक वैज्ञानिक के तौर पर तैनात थे. द बेटर इंडिया डॉट कॉम को उन्होंने बताया कि मैंने मिसाइलों के परीक्षण के लिए ओडिशा के चांदीपुर का दौरा किया था, तभी मुझे वहां के लोग पसंद आए थे. फिर जब UPSC में मेरा सेलेक्शन हो गया तो मैंने अपनी पहली प्राथमिकता के रूप में ओडिशा को चुना. मुझे इस राज्य की सेवा का अवसर मिला इसके लिए मैं बहुत शुक्रगुजार हूं.
मीणा ओडिशा के उन चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों में से एक हैं जो लोगों और उनकी समस्याओं से सीधे जुड़ने के लिए टेक्नॉलोजी का उपयोग करते हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे एप्लिकेशन का इस्तेमाल भी अधिकारियों के साथ जुड़कर सभी जरूरी अधिकारों से गरीबों को लाभ पहुंचाने में कर रहे हैं.
अपने इस अनोखे अंदाज के लिए न सिर्फ उन्हें लोगों में एक पहचान मिली है, बल्कि हाल ही में उन्होंने व्हाट्सएप के इस्तेमाल से 1,200 मजदूरों को निर्मान श्रमिक योजना के तहत उनके टूल्स और साइकिल दिलाकर एक नजीर पेश कर दी. ये उन्होंने दस दिनों के रिकॉर्ड समय में किया. इनके आवेदन दो साल से अधिक समय से लंबित थे.
इसी साल की शुरुआत की एक और घटना है जब अंतर्राष्ट्रीय न्याय मिशन के क्षेत्र के कार्यकर्ता कुछ बंधुआ मजदूरों के बचाव और पुनर्वास के लिए काम करने वाली एक संस्था एक एसिड अटैक सर्वाइवर सहित कुल दस पीड़ितों के साथ उनके जिला कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंच गए.
यहां जिला कलेक्टर ने बेहद शांत तरीके से धैर्य से उनकी बात सुनी. फिर तत्काल श्रम विभाग के अधिकारियों को बुलाया. उनसे मामले पर तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया. उनके बारे में लोगों की आम राय ये बन गई है कि एडमिनिस्ट्रेशन के दूसरे लोगों से वो एकदम अलग हैं. वो लोगों से सहानुभूति रखते हैं, खुद को दूसरो की जगह रखकर सोचना और फैसले लेना उन्हें आता है.
ओडिशा रूरल डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग सोसाइटी (ORMAS) की मदद से मीणा ने शक्तिगांव परियोजना की सुविधा प्रदान की, जिसके तहत 15 स्वयं सहायता समूहों (SHG) को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रशिक्षित किया गया. इसमें नूडल्स बनाने के लिए 40 आदिवासी महिलाओं सहित 42 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया.