गोवा का नाम सुनते ही आपके सामने समुद्र, बीच आदि की तस्वीर आती होगी और हर
कोई उस मनोरम जगह को देखने की इच्छा रखता है. लेकिन क्या आप जानते हैं
खुबसूरत गोवा आखिर भारत का हिस्सा कैसे बना? देश की आजादी के कई साल बाद
भारत ने कैसे इसे हासिल किया. आइए जानते हैं गोवा
के भारत में विलय होने की पूरी कहानी...
साल 1947 में भारत अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हो गया था. इस वक्त भारत के
पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने कई रियासतों को भारत
में समाहित कर एक अखंड भारत का निर्माण किया. हालांकि उस दौरान कई ऐसे
क्षेत्र थे, जो भारत का हिस्सा नहीं बन पाए थे. उनमें
गोवा का नाम भी शामिल था.
गोवा आजादी के कई सालों बाद तक भारत का हिस्सा नहीं बना था. पुर्तगालियों
का करीब 450 सालों तक गोवा में शासन रहा था, जिसे बाद में भारत में शामिल
किया गया. इसके लिए सेना का इस्तेमाल किया गया. भारतीय सेना ने "ऑपरेशन
विजय" का अभियान चलाया, कुछ ही घंटों में पुर्तगालियों
को भारत के सामने झुकना पड़ा और गोवा भारत का हिस्सा बन गया.
दरअसल, भारत सरकार ने पुर्तगालियों से वहां से जाने का बार-बार अनुरोध
किया, लेकिन पुर्तगाली इसके लिए राजी नहीं हुए. जिसके बाद भारत सरकार को
सेना का साथ लेना पड़ा.
तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि सरकार गोवा में पुर्तगाल
की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगी. 18 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने
गोवा, दमन और दीव पर चढ़ाई कर दी.
पुर्तगाली सेना भारतीय सेना के सामने बेहद कमजोर साबित हुई. उनके पास भारी
हथियारों की कमी थी. वहीं भारतीय सेना की संख्या भी बहुत ज्यादा थी. बताया
जाता है कि सैन्य ऑपरेशन करीब 36 घंटे तक चला और उसके बाद पुर्तगालियों ने
अपने घुटने टेक दिए.
वहीं, पुर्तगाल के गवर्नर जनरल वसालो इ सिल्वा ने भारतीय सेना प्रमुख पीएन
थापर के सामने सरेंडर कर दिया. फिर 19 दिसंबर 1961 को भारत ने गोवा को आजाद
करा लिया था. 30 मई 1987 को गोवा को भारतीय राज्य का दर्जा मिला.