देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले के नंदगांव में नारायण राव पाटिल के घर हुआ था. वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक देश की 12वीं राष्ट्रपति रहीं. अपने कार्यकाल के दौरान वे कई बार खबरों में रहीं. कभी कार प्रयोग को लेकर तो कभी पोस्ट रिटायरमेंट के लिए बन रहे बंग्ले पर.
प्रतिभा पाटिल ने पोस्ट रिटायरमेंट के लिए पुणे में एक जमीन पर घर का निर्माण आरंभ कराया था. इस पर भी काफी विवाद हुआ था. मीडिया में खबरें आई थीं कि ये जमीन डिफेंस को दी जानी थी.
सुभाष चंद्र अग्रवाल ने एक आरटीआई दाखिल की थी जिसके जवाब में पता चला था कि पाटिल राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद अपने साथ 150 गिफ्ट ले गई थीं.
इनमें से ज्यादातर गिफ्ट वो थे जो उन्हें विदेश यात्राओं के दौरान या विदेशी राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्री के आने पर तोहफे स्वरूप मिले थे. आमतौर पर इस तरह के तोहफों को राष्ट्रपति, अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद रष्ट्रपति भवन में ही छोड़ देते हैं.
पाटिल ये सभी गिफ्ट अपने होमटाउन अमरावती ले गई थीं. जिसे उन्होंने वहां पाटिल परिवार की ओर से चलाए जा रहे म्यूयिम विद्या भारती शैक्षणिक मंडल में डिस्प्ले के लिए लगाया.
ये बात जब उनके बाद राष्ट्रपति बने प्रणब मुखर्जी को पता चली तो उन्होंने सभी गिफ्ट वापस मंगाने के लिए कदम उठाए. 14 अगस्त 2012 को विद्या भारतीय शैक्षणिक मंडल को पत्र लिखकर कहा गया कि 15 जून 2013 तक सभी तोहफों को वापस कर दिया जाए.
जिन तोहफों को पाटिल अपने साथ ले गईं उनमें अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भेंट किया गया कैडल सेट, वियतनाम के राष्ट्रपति द्वारा भेंट किया गा वुडन फ्रेम्ड फोटो, फीफा के प्रेसिडेंट की ओर से दिया गया मेंमेंटो आदि शामिल थे.
जब इस मामले की जांच शुरू की गई तो पता चला कि राष्ट्रपति भवन से इतिहास के कई निशान भी गायब हैं. इनमें वायसराय हाउस से लेकर राष्ट्रपति भवन में तब्दील होने के सफर में ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी बने बेशकीमती सामान शामिल हैं.
रायसीना हिल्स से पुरानी वस्तुओं के गायब होने की जानकारी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को तब मिली जब उन्होंने पूछा कि 1931 में जिस मेज पर इसी भवन में महात्मा गाधी और लॉर्ड इरविन के बीच समझौता हुआ था, वह कहां है? उस मेज के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी. इसी तरह प्रणब ने हिंदुस्तान के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पढ़ाई वाली मेज के बारे में पूछा तो उसका भी कुछ पता नहीं था.
शुरुआती पड़ताल में पता चला कि राष्ट्रपति भवन में तैनात रहे अधिकारी समय-समय पर इन्हें यहां से ले गए थे. कुछ सामान पूर्व राष्ट्रपतियों के साथ भी गया, लेकिन वह सब लिखत-पढ़त में है. मसलन पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के साथ जो भी 155 वस्तुएं गई, उन सबका हिसाब है.