परीक्षाओं का दबाव जब हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो कभी-कभी बच्चे ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिनकी कल्पना भी परिवार नहीं कर पाता. गुजरात के वडोदरा से सामने आया यह मामला पढ़ाई के तनाव की गंभीर सच्चाई को उजागर करता है, जहां एक 17 वर्षीय छात्र परीक्षा के दबाव से परेशान होकर घर की तिजोरी से 3 लाख रुपये लेकर गोवा भाग गया. यह घटना न सिर्फ परिवार के लिए सदमे का कारण बनी, बल्कि समाज के सामने यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या आज के छात्र मानसिक रूप से सुरक्षित हैं?
तिजोरी से करीब 3 लाख रुपये लेकर भागा
पढ़ाई के ज़्यादा दबाव की वजह से वडोदरा का एक 17 साल का लड़का घर से भाग गया. वह घर की तिजोरी से करीब 3 लाख रुपये लेकर चला गया, जिसमें उसकी बहन की यूपीएससी परीक्षा की फीस के पैसे भी शामिल थे. बाद में पुलिस ने उसे गोवा में सुरक्षित ढूंढ लिया. पुलिस के मुताबिक, यह घटना समा-सावली रोड इलाके की है. लड़का मंगलवार रात करीब 12 बजे अपनी मां और बहन से सोने को कहकर अपने कमरे में चला गया. उस वक्त किसी को कुछ भी गलत नहीं लगा. लेकिन अगली सुबह घर का दरवाजा खुला मिला और लड़का गायब था.
मोबाइल बंद होने से घरवाले परेशान
घर की जांच करने पर पता चला कि तिजोरी में रखे 3 लाख रुपये भी नहीं थे. लड़के का मोबाइल फोन बंद था, जिससे परिवार और ज्यादा परेशान हो गया. जाने से पहले उसने अपने स्कूल टीचर को मैसेज किया था कि वह उस दिन क्लास में नहीं आएगा. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की. सीसीटीवी फुटेज में लड़का सुबह करीब 1:45 बजे बैग लेकर घर से निकलता दिखा. जांच में पता चला कि वह पहले टैक्सी से मुंबई गया, फिर वहां से अपने एक दोस्त के साथ गोवा चला गया. तकनीकी जांच के जरिए पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस की और गोवा के एक बीच के पास उसे और उसके दोस्त को ढूंढ लिया। पुलिस के अनुसार, दो दिनों में वह करीब 50 हजार रुपये खर्च कर चुका था.
काउंसलिंग के बाद छोड़ा गया लड़का
पूछताछ के दौरान लड़का रोने लगा और उसने बताया कि वह कक्षा 11 की पढ़ाई और परीक्षाओं के दबाव से बहुत परेशान था. उसे लग रहा था कि उसे थोड़ा ब्रेक चाहिए, इसलिए वह घर से भाग गया. उसने कहा कि उसका इरादा एक हफ्ते बाद वापस लौटने का था. काउंसलिंग के बाद लड़के और उसके दोस्त को वडोदरा वापस लाया गया और परिवार को सौंप दिया गया. चूंकि लड़का नाबालिग है और सुरक्षित मिल गया है, इसलिए पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि आजकल छात्रों पर पढ़ाई का मानसिक दबाव कितना बढ़ गया है. माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और समय पर उनकी मदद करनी चाहिए।.