हाल ही में देखी फिल्म 'होमबाउंड' का वो सीन अभी भी दिमाग में घूम रहा है. गांव की धूल भरी पगडंडी पर दो दोस्त, शोएब और चंदन, पुलिस भर्ती का फॉर्म भर रहे हैं. आंखों में एक अलग ही चमक है, जैसे ये वर्दी पहनकर वो जाति-धर्म की सारी दीवारें तोड़ देंगे, अपनी गरीबी से उभरकर समाज में इज्जत-करियर पा लेंगे. फॉर्म भरते हुए हंसते-मजाक करते हैं लेकिन अंदर से पता है कि ये परीक्षा उनकी जिंदगी बदल सकती है. फिल्म में तो ये बस शुरुआत है, लेकिन असल जिंदगी में लाखों लड़के-लड़कियां इसी सपने के पीछे भाग रहे हैं, और सपने के साथ वो भी बार-बार टूट रहे हैं, खासकर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में.
सोचिए, लखनऊ के किसी छोटे-से किराए के कमरे में बैठा राहुल. 25 साल का लड़का जो गांव से आया है. पिता किसान हैं, खेत बेचकर पढ़ाई कराई. राहुल ने रात-दिन एक करके असिस्टेंट प्रोफेसर एक्जाम की तैयारी की. फिर अप्रैल 2025 में UPESSC ने 1017 पदों की परीक्षा ली. 1 लाख 14 हजार से ज्यादा बच्चे बैठे. राहुल ने हॉल में सोचा कि बस ये हो गया तो सब सेट हो जाएगा. फिर इंतजार करते-करते जनवरी 2026 में क्या हुआ? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने STF की रिपोर्ट देखकर पूरी परीक्षा रद्द कर दी.
वजह- वही धांधली, पेपरलीक या पैसों की लूट, STF ने तीन लोगों को पकड़ा. केस दर्ज हुआ, चेयरपर्सन को इस्तीफा देना पड़ा. ये कार्रवाई तो ठीक है पर ये सिर्फ एक एग्जाम नहीं था भाई, ये राहुल जैसे हजारों बच्चों की जिंदगी थी. उनकी कोचिंग की फीस, किताबें, किराया यहां तक कि उनके सपने... सब उधार पर थे. वो लड़का जो गांव में अपने मां-बाप को फोन करके कहता था, 'बस थोड़ा और, नौकरी लग जाएगी.' और फिर खबर आती है 'परीक्षा रद्द'. आंखों में वो निराशा, रातों को सो नहीं पाना, दिमाग में बस एक सवाल- 'इतनी मेहनत का क्या?'
और ये पहली बार नहीं. पिछले एक साल में यूपी में कम से कम चार से पांच बड़ी भर्ती परीक्षाएं ऐसी रहीं, जिन्हें अभ्यर्थियों को दोबारा देना पड़ा या जो रद्द होकर फिर से आयोजित हुईं. 2024 में UPPSC की RO-ARO परीक्षा भी पेपर लीक पर रद्द हुई. मार्च में प्रीलिम्स कैंसल फिर दोबारा तारीख आई, लेकिन बच्चों की मेहनत पानी में. सिपाही भर्ती का तो हाल ही क्या कहें- लाखों बच्चे सड़कों पर उतरे, लेकिन न्याय? बस वादे. ये सब देखकर गुस्सा भी आता है, दुख भी होता है. जब बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं. परिवार टूटते हैं, वो दर्द शायद 'सिस्टम' महसूस नहीं कर पाता. पेपर कैंसिल होने के बाद सरकार कहती है 'सुधार करेंगे, नई परीक्षा निष्पक्ष होगी.' लेकिन ये कितनी बार होगा? UP में ये चक्कर चलता रहता है, लीक, रद्द, फिर दोबारा परीक्षा.
बात साफ है यूपी में सरकारी नौकरी का सपना देखना है तो खुद में बहुत सहनशीलता पैदा करनी होगी क्योंकि सिस्टम पर विश्वास तो बन नहीं पा रहा. एग्जाम देकर लंबा इंतजार करना फिर अगर परीक्षा कैंसिल होती है तो दिल में पत्थर रखकर री-एग्जाम, रिजल्ट और जॉइनिंग तक इंतजार करना. सरकार लगातार कह रही है लेकिन परीक्षाएं आयोजित कराने वाली संस्थाएं अब तक एक ऐसा पारदर्शी और स्वच्छ सिस्टम तैयार नहीं कर पाईं जिससे कम से कम ये घटनाएं बंद हों. सरकार पेपर लीक जैसी धांधली पर बुलडोजर चलाने से लेकर और कई सख्त कानून बनाने की बात कर चुकी है. अब ये कानून जब तक जमीनी तौर पर सख्ती से लागू नहीं होंगे, तब तक ये सिस्टम नहीं सुधरने वाला. हजारों अभ्यर्थियों के सपने होमबाउंड होने को मजबूर हो जाएंगे, उन्हें कभी अपने परों से मुक्त आकाश में उड़ान भरने का मौका नहीं मिलेगा.