रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध के चलते भारत लौटने वाले हजारों मेडिकल छात्रों को जल्द राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विदेश मंत्रालय ने छात्रों को भारत में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ को बताया कि विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, हालांकि इसमें अभी कुछ और समय लगेगा.
केंद्र की दलील को स्वीकार करते हुए अदालत ने सुनवाई के लिए 15 सितंबर की अगली तारीख तय की है. अदालत में यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को भारत में अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने की याचिका पर सुनवाई जारी है. पिछली सुनवाई में अदालत ने विदेश मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में कहा है कि घाना, नाइजीरिया, पाकिस्तान और मिस्र जैसे कई देशों ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए फैसला किया है कि यूक्रेन से निकाले गए छात्रों को उनके देश में ही मेडिकल कॉलेजों में अकोमोडेट किया जाएगा. भारत को भी जल्द इस मामले पर छात्रों के हित में फैसला लेना चाहिए.
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि सभी स्तरों पर शिक्षा तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध कराना राज्य का एक दायित्व है और छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाना बेहद जरूरी है. केन्द्र ने युद्ध प्रभावित यूक्रेन से लौटे छात्रों को भारतीय संस्थानों में दाखिला देने पर सकारात्मक संकेत दिए हैं मगर अभी इसे लागू करने के लिए समय मांगा है.