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तेजस्वी यादव ने BPSC 70वीं परीक्षा में नार्मलाइजेशन पर जताया विरोध, बोले- 'एक शिफ्ट, एक पेपर, एक पैटर्न में हो परीक्षा'

तेजस्वी यादव ने कहा कि बीपीएससी फॉर्म भरने की अंतिम तिथि से 2-3 दिन पहले सर्वर फेल होने के कारण लाखों छात्रों को फॉर्म भरने का मौका नहीं मिला. उन्होंने आयोग से इस समस्या और अभ्यर्थियों की मांग पर संज्ञान लेकर जल्द से जल्द इसका समाधान निकालने की मांग की है.

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Tejashwi Yadav on BPSC 70th Exam Normalization Process
Tejashwi Yadav on BPSC 70th Exam Normalization Process

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव ने 70वीं BPSC परीक्षा को लेकर एनडीए सरकार पर निधाना साधा है. उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को इस मूल्यांकन पद्धति पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करना चाहिए. 

तेजस्वी यादव ने जताया विरोध

तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, '𝟕𝟎वीं 𝐁𝐏𝐒𝐂 परीक्षा में नॉर्मलाईज़ेशन की आंकलन पद्धति पर आयोग अपना मंतव्य स्पष्ट करें. छात्र विरोधी 𝐍𝐃𝐀 सरकार से हमारी मांग है कि परीक्षा एक दिन, एक शिफ्ट, एक पेपर, एक पैटर्न में बिना पेपर लीक हो. आयोग को अभ्यर्थियों की इस समस्या एवं माँग का संज्ञान अवश्य लेना चाहिए कि फॉर्म भरने की आखिरी तिथि से 𝟐-𝟑 पूर्व में सर्वर के ठीक से कार्य नहीं करने के कारण लाखों विद्यार्थी फॉर्म भरने से वंचित रह गए थे. #bpsc70th  #RJD #TejashwiYadav  #BPSC_70th.

बीपीएससी 70वीं संयुक्त परीक्षा में परसेंटाइल और नार्मलाइजेशन लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिसके कारण विपक्ष और छात्र नेताओं ने विरोध जताया है. उनका कहना है कि इस व्यवस्था को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता है. 

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बीपीएससी का मानना है कि परसेंटाइल और नार्मलाइजेशन पद्धति से पेपर लीक को रोका जा सकेगा, क्योंकि इस पद्धति के तहत आयोग अलग-अलग सेट के प्रश्न पत्र तैयार करेगा. हालांकि, विरोधी पक्ष का कहना है कि परीक्षा में केवल एक ही सेट का प्रश्न पत्र होना चाहिए, ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिले. उनका तर्क है कि अगर अलग-अलग सेट में प्रश्न पत्र होंगे, तो कुछ सेट में कठिन सवाल होंगे, जबकि कुछ में सरल सवाल. इससे परीक्षा के निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं.

नॉर्मलाइजेशन क्या है?

नॉर्मलाइज़ेशन एक प्रक्रिया है, जिसके ज़रिए किसी परीक्षा में मिले अंकों को सामान्य किया जाता है. यह प्रक्रिया, तब अपनाई जाती है, जब एक से ज़्यादा पालियों में परीक्षा आयोजित की जाती है. नॉर्मलाइज़ेशन की मदद से, परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर कैंडिडेट्स का प्रतिशत स्कोर निकाला जाता है.

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