केंद्र सरकार की न्यू एजुकेशन पॉलिसी पूरे देश में लागू होने वाली है. अब सिक्किम सरकार ने इसी पॉलिसी के अनुरूप एक व्यापक नीति बनाने के लिए एक शिक्षा सुधार आयोग का गठन करने का फैसला लिया है. आइए जानें- क्या है इस आयोग का मतलब
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने बीते सप्ताइ इस आयोग की जानकारी दी. उन्होंने केंद्र द्वारा अनुमोदित राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोग स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों के लिए व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है. ये आयोग नई शिक्षानीति के अनुरूप नीति और रणनीति बनाएगा जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अधिक से अधिक सुधार हो सके.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने अभिनव शिक्षण और सीखने के तरीकों के साथ प्रत्येक जिले में एक मॉडल स्कूल स्थापित करने की योजना बनाई है. बता दें कि बीते सात अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में न्यू एजुकेशन पॉलिसी के कुछ पहलुओं पर बात रखी थी. इसमें से एक स्थानीय भाषा में पढ़ाई का खास प्रावधान गैर हिंदी भाषी राज्यों के लिए खास है.
बता दें कि प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में सीखने की भाषा एक ही होनी चाहिए, ताकि बच्चों को सीखने में आसानी होगी. अभी पांचवीं क्लास तक बच्चों को ये सुविधा मिलेगी. अभी तक शिक्षा नीति व्हाट टू थिंक के साथ आगे बढ़ रही थी, अब हम लोगों को हाउ टू थिंक पर जोर देंगे. आज बच्चों को ये मौका मिलना चाहिए कि बच्चा अपने कोर्स को फोकस करे, अगर मन ना लगे तो कोर्स में बीच में छोड़ भी सके. अब छात्र कभी भी कोर्स से निकल सकेंगे और जुड़ सकेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज कोई व्यक्ति पूरे जीवन में एक ही प्रोफेशन पर नहीं रहता है, ऐसे में उसे लगातार कुछ सीखने की छूट होनी चाहिए. देश में ऊंच-नीच का भाव, मजदूरों के प्रति हीन भाव क्यों पैदा हुआ. आज बच्चों को पढ़ने के साथ-साथ देश की हकीकत भी जाननी जरूरी है. भारत आज टैलेंट-टेक्नोलॉजी का समाधान पूरी दुनिया को दे सकता है, टेक्नोलॉजी की वजह से गरीब व्यक्ति को पढ़ने का मौका मिल सकता है.