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RTE के जरिए कैसे होता है बच्चों का एडमिशन, कौन कर सकता है आवेदन, जानें डिटेल

RTE यानी Right to Education Act के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में 25% सीटों पर मुफ्त शिक्षा दी जाती है. RTE एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है, जिसमें पात्र बच्चों का सेलेक्शन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है.

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RTE का लाभ लेकर लाखों बच्चे हर साल अच्छी शिक्षा पा रहे हैं. ( Photo: Pixabay)
RTE का लाभ लेकर लाखों बच्चे हर साल अच्छी शिक्षा पा रहे हैं. ( Photo: Pixabay)

देश में हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने के लिए सरकार ने RTE यानी Right to Education Act लागू किया है. इस कानून के तहत निजी स्कूलों में भी आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान है. हर साल RTE के तहत लाखों बच्चों का एडमिशन नर्सरी, LKG या पहली कक्षा में कराया जाता है. लेकिन कई अभिभावकों को अब भी यह साफ नहीं होता कि RTE में एडमिशन कैसे होता है, कौन आवेदन कर सकता है और किन बच्चों को प्राथमिकता मिलती है.

RTE क्या है?
RTE अधिनियम 2009 के तहत 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है. इसके तहत निजी स्कूलों को अपनी 25% सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं. इन बच्चों की फीस सरकार स्कूल को देती है, माता-पिता से कोई शुल्क नहीं लिया जाता.

RTE में कौन कर सकता है आवेदन?
पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम बताते हैं कि RTE के तहत वही बच्चे आवेदन कर सकते हैं, जो सरकार द्वारा तय की गई श्रेणियों में आते हैं. इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) जिन परिवारों की वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा तय सीमा से कम हो. इसके अलावा सामाजिक रूप से वंचित वर्ग जैसे SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक वर्ग के आवेदक शामिल होते हैं. 

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वकील महमूद आलम बताते हैं कि RTE के पोर्टल के अलावा आप डायरेक्ट स्कूल से भी जाकर एडमिशन फॉर्म के साथ RTE फॉर्म ले सकते हैं. हर साल कई बच्चे RTE के जरिए एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. आगे उन्होंने बताया कि अगर एक ही कैटेगरी के कई बच्चों के 
आवेदन एक साथ आ जाए तो उस कंडीशन में बच्चों का एडमिशन लॉटरी के जरिए होता है.  

विशेष श्रेणी के बच्चे भी कर सकते हैं आवेदन
अनाथ बच्चे, दिव्यांग बच्चे, HIV प्रभावित बच्चे, सिंगल पेरेंट के बच्चे आदि. आवेदन करने वाले बच्चे की उम्र भी तय होती है,जैसे नर्सरी या पहली कक्षा के लिए न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा राज्य के नियमों के अनुसार होती है.

RTE में एडमिशन की प्रक्रिया कैसे होती है?
RTE एडमिशन पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से होता है. सबसे पहले राज्य सरकार की RTE पोर्टल पर आवेदन करने होते हैं.

यहां जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

अभिभावक RTE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरते हैं.
बच्चे की जानकारी, माता-पिता की आय और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं.
आवेदन में आसपास के निजी स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में चुना जाता है.
आवेदन की जांच (Verification) होती है.
अगर आवेदन सही पाया जाता है, तो लॉटरी सिस्टम के जरिए स्कूल का चयन किया जाता है.
लॉटरी में नाम आने पर स्कूल में जाकर एडमिशन कन्फर्म कराया जाता है.

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किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
RTE एडमिशन के लिए आमतौर पर ये दस्तावेज मांगे जाते हैं:

  • बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र
  • माता-पिता का आय प्रमाण पत्र
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • निवास प्रमाण पत्र
  • आधार कार्ड
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • किन्हें मिलती है प्राथमिकता?

RTE एडमिशन में सभी आवेदकों को बराबर नहीं माना जाता. कुछ बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है:

  • अनाथ और बेसहारा बच्चे
  • दिव्यांग बच्चे
  • अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चे
  • विधवा या सिंगल मदर के बच्चे
  • जिनका घर स्कूल के नजदीक हो

RTE एडमिशन से क्या फायदा है?
अगर सीटें कम और आवेदन ज्यादा होते हैं, तो प्राथमिकता और फिर लॉटरी के आधार पर चयन किया जाता है. RTE के जरिए गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छी निजी स्कूलों में पढ़ने का मौका मिलता है. इससे शिक्षा में समानता बढ़ती है और बच्चों का भविष्य बेहतर होता है.

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