यूजीसी के चेयरमैन विनीत जोशी ने सोमवार को इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव के मंच पर नई शिक्षा नीति और उच्च शिक्षण संस्थानों पर काफी कुछ कहा. उन्होंने बताया कि भारत में 60 हजार उच्च शिक्षण संस्थान हैं. भारत में सबसे ज्यादा महिलाएं उच्चा शिक्षा ले रही हैं. रिसर्च पब्लिकेशन में हम तीसरे नंबर पर हैं. वर्ल्ड रैकिंग में भी हमारे उच्च संस्थान आगे बढ़ रहे हैं. जहां तक नई शिक्षा नीति और उच्चा शिक्षा का सवाल है तो अब माइंडसेट में बड़ा बदलाव आया.
शिक्षा का मतलब पढ़ाई पूरी करने के बाद सिर्फ नौकरी पाना भर नहीं रह गया है, बल्कि ऐसी पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है, जिसके बाद हम खुद नौकरी का सृजन कर सकें. इसलिए आज देश भर में उच्च शिक्षा के कैरिकुला में एक बड़ा बदलाव आया है. अब शिक्षा का मतलब जॉब क्रिएटर्स पैदा करना है, न कि सिर्फ अच्छा जॉब करने वाला बनाना. इसलिए इंडस्ट्री और अकेडमिया कोलेबरेशन किया जा रहा है. संस्थान में ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं, जो बच्चों को स्कील बेस्ड शिक्षा से जोड़ सके. ताकि, आगे वो स्टार्ट अप शुरू करने और एंटरपेन्योर बनने जैसे काम के साथ न सिर्फ अपना करियर बनाए, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करें.
चीन और अमेरिका की उच्च शिक्षा व्यवस्था से भारत की तुलना पर विनीत जोशी ने कहा कि भारत एक विशाल और विविध संस्कृति वाला देश है. इसलिए यहां अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग मॉडल लागू हैं.इसलिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी एक ही मॉडल भारत के अलग-अलग हिस्सों में एक ही तरह से लागू नहीं हो सकता है. इस लिए यहां डिसेंट्रलाइज्ड व्यवस्था है.
यहां जरूरत है कि क्षेत्र के हिसाब से यहां पर उच्चा शिक्षा के मॉडल स्थापित हो और ऐसा ही किया जा रहा है. क्योंकि आज नई शिक्षा नीति का मकसद ही जॉब पाने वाले से ज्यादा जॉब क्रिएटर्स बनाना, जो देश की प्रगति में अहम योगदान दें.
पूरे देश में ढेर सारे रिसर्च पार्क बन गए हैं. जहां इनोवेशन हो रहे हैं. भारतीय हायर एजुकेशन के इको सिस्टम की तुलना हम चीन से नहीं कर सकते हैं. यहां 200 से ज्यादा यूनिवर्सिटी हैं, जो अपने फैसले खुद लेते हैं. चाहे ये एडमिनिस्ट्रेटिव फैसले हो या एकेडमिक. यहां का उच्च शिक्षा व्यवस्था डिसेंट्रलाइज है. इसलिए चीन से यहां की तुलना करना ठीक नहीं है. क्योंकि वहां और यहां के कल्चर में काफी भिन्नता है.
भारत में बहुत सी चीजें हो रही हैं. सर्वम एआई और भारत जेन काम कर रहा है. यह भारत में विकसित किया गया है. यह काम भी कर रहा है. इसलिए यह कहना कि यहां कुछ नहीं हो रहा है यह सही नहीं है. यहां बहुत कुछ हो रहा है और आगे भी अभी बहुत कुछ करना है. जब आप विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि ये शिक्षा संस्थानों को ज्यादा शक्तियां देते हैं. ये कहता है कि संस्थानों में जो कुछ भी फैसला लिया जाएगा, उसका पब्लिक डिस्कोजर होगा.