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क्या माइनस 40 नंबर वालों को भी मिल जाएगा NEET PG में एडमिशन? समझिए क्या है नई कट-ऑफ का मतलब

NBEMS की ओर से NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ रेट को काफी कम कर दिया गया है, जिसमें कुछ कैटेगरी के लिए कटऑफ 0 पर्सेंटाइल तक हो गई है.

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NEET PG की कटऑफ में काफी कमी की गई है. (Photo: Pexels)
NEET PG की कटऑफ में काफी कमी की गई है. (Photo: Pexels)

केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ रेट को काफी कम कर दिया गया है. इसका कारण है मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी PG मेडिकल सीटों का भरना. लेकिन, जो नई कट-ऑफ जारी की गई है, इसे लेकर काफी विवाद हो गया है. दरअसल, कुछ वर्ग के लिए कट-ऑफ को 40 से 0 पर्सेंटाइल कर दिया गया है और नंबर्स में माइनस 40 कर दिया गया है.

अब लोग आरोप लगा रहे हैं कि एक ऐसा पेशा जो सीधे जीवन और मृत्यु से जुड़ा है, वहां काबिलियत का स्तर गिरना काफी गलत है. ऐसे में जानते हैं कि सरकार का ये फैसला क्या है और क्या सही में जिन लोगों के माइनस 40 तक नंबर आएंगे, उनका भी नीट पीजी में एडमिशन हो जाएगा... 

मामला है क्या?

NEET-PG काउंसलिंग के राउंड-2 पूरा होने के बाद अलग-अलग राज्यों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में PG मेडिकल सीटें अभी भी खाली पड़ी हैं. NEET-PG और उसके बाद की काउंसलिंग प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है. 

NEET-PG 2025 के नतीजे मूल रूप से 19 अगस्त, 2025 को घोषित किए गए थे. इसके बाद 9 जनवरी, 2026 को लिखे एक पत्र में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने न्यूनतम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में कमी को मंजूरी दी. इसके बाद नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के बाद NEET-PG 2025 क्वालिफाइंग कट-ऑफ को आधिकारिक तौर पर रिवाइज कर दिया है. यह फैसला 2025-26 एकेडमिक सेशन के लिए काउंसलिंग के तीसरे राउंड में हिस्सा लेने वाले कैंडिडेट्स पर लागू होगा. 

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कितनी है नई कट-ऑफ?

नई कट-ऑफ अपडेट में में सामान्य वर्ग और EWS उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 50th से कम करते हुए 7th पर्सेंटाइल कर दिया गया है. इसके अलावा बेंचमार्क दिव्यांग जनरल कैटेगरी (PwBD) के लिए 45th से घटाकर 5th पर्सेंटाइल कर दिया गया है. इसी तरह SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए, पर्सेंटाइल 40 से घटाकर 0 कर दिया गया है, इसमें संबंधित कट-ऑफ स्कोर 800 में से -40 (नेगेटिव मार्किंग की वजह) तय किया गया है. आप नीचे दी गई फोटो में कट-ऑफ देख सकते हैं... 

NEET Cutoff

NEET में कैसे होता है एडमिशन?

दरअसल, डॉक्टर्स बनने के लिए दो हिस्सों में पढ़ाई होती है. सबसे पहले नीट-यूजी का एग्जाम देना होता है, उसके बाद उम्मीदवार एमबीबीएस की पढ़ाई करते हैं. इसके बाद लोग स्पेशलाइजेशन के लिए नीट पीजी की परीक्षा देते हैं, उसमें पास होने के बाद तीन साल की पढ़ाई और होती है. ऐसे में जो माइनस-40 नंबर का जो मसला है वो नीट पीजी एग्जाम से जुड़ा है. 

क्या सही में माइनस 40 नंबर वालों का होगा एडमिशन?

इस बार सरकार की ओर से सीटें बढ़ा दी गई, लेकिन पास का कॉलेज ना मिलने, स्पेशलाइजेशन के लिए मनपसंद डिपार्टमेंट ना मिलने की वजह से कई सीटें खाली रह गईं. अब उन पर एडमिशन लेने के लिए कट-ऑफ को कम किया गया है, लेकिन आमतौर पर ये वो खाली सीटें होती हैं, जहां बहुत कम लोग एडमिशन लेना चाहते हैं. ऐसे में उन सीटों को भरने के लिए आप ज्यादा नंबर की जरूरत नहीं है और जिन रिजर्व्ड कैटेगरी के उम्मीदवारों को -40 तक नंबर मिले हैं, उनका भी एडमिशन हो जाएगा. 

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पहले भी ऐसा हुआ है

खास बात ये है कि ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ है, उससे पहले भी ऐसा होता आया है. पहले भी कटऑफ को काफी कम किया गया है. अगर पिछले साल की बात करें तो पिछले साल भी एडमिशन प्रोसेस में कट-ऑफ को 5 पर्सेंटाइल तक कर दिया गया था और इस बार इसे 0 कर दिया गया है. लेकिन, पहले 0 नहीं किया गया था. इस बार सीट बढ़ने की वजह से ये जीरो तक पहुंच गया है. 

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