नीट पेपर लीक (NEET UG) के महासंकट के बीच आज देश की सर्वोच्च अदालतसे एक ऐसा ऐतिहासिक आदेश आया है, जिसने देश की पूरी परीक्षा प्रणाली को हिलाकर रख दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 'यूनाइटेड डॉक्टर्स फेडरेशन' की उस जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ा नोटिस जारी कर दिया है, जिसमें साफ तौर पर मांग की गई है कि एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तुरंत भंग किया जाए और परीक्षा कराने के लिए एक स्वतंत्र कमेटी का गठन हो.
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) को केंद्र सरकार की तरफ से तुरंत पेश होने और जवाब दाखिल करने का हुक्म दिया है. अब इस महामुद्दे पर अगली तीखी सुनवाई इसी शुक्रवार को होने जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट सख्त: के राधाकृष्णन कमेटी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
आज अदालत में सुनवाई के दौरान जजों के तेवर बेहद सख्त नजर आए. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और इस पूरी चयन प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. अदालत ने परीक्षा सुधारों के लिए गठित की गई 'के राधाकृष्णन कमेटी' से अब तक की पूरी 'स्टेटस रिपोर्ट' तलब कर ली है. कोर्ट यह जानना चाहता है कि दो साल से चल रहे इस एंटी-चीटिंग ड्रामे के बीच कमेटी ने एनटीए के खोखले ढर्रे को सुधारने के लिए जमीन पर क्या काम किया है.
कलबुर्गी सुसाइड और गिरफ्तारी पर अदालत में 'डिफेंस' की दलील
इस बीच, कर्नाटक के कलबुर्गी में नीट अभ्यर्थी भाग्यश्री की आत्महत्या के बाद मचे हड़कंप के बीच कोर्ट में कानूनी दांवपेच भी तेज हो गए हैं. इस मामले में गिरफ्तार की गई आरोपी को लेकर डिफेंस (बचाव पक्ष) के वकील ने कोर्ट के सामने अजीब दलील रखी.
बचाव पक्ष का दावा: डिफेंस ने अदालत में कहा कि आरोपी को 22 मई को ही गिरफ्तार कर लिया गया था. तब से वह पुलिस जांच में लगातार सहयोग कर रही है. अब आरोपी के पास से ऐसा कुछ भी बरामद किया जाना बाकी नहीं है, जिसके लिए उसे हिरासत में रखा जाए. हालांकि, सोशल मीडिया पर इस दलील को लेकर छात्रों का गुस्सा और भड़क गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि जब एक होनहार छात्रा की जान चली गई, तब जाकर 22 मई को यह गिरफ्तारी हुई और अब जांच को भटकाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
क्यों उठी NTA को भंग करने की मांग?
यूनाइटेड डॉक्टर्स फेडरेशन ने अपनी याचिका में सीधे तौर पर दलील दी है कि एनटीए लगातार पेपर लीक रोकने और पारदर्शी तरीके से परीक्षाओं का परिणाम जारी करने में पूरी तरह अक्षम साबित हुई है. जब तक इस ढांचे को उखाड़कर एक नई स्वतंत्र कमेटी के हाथ में कमान नहीं सौंपी जाती, तब तक देश के डॉक्टरों और छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता.
शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं. यह सुनवाई तय करेगी कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा का भविष्य क्या होगा और क्या वाकई एनटीए का बोरिया-बिस्तर समेटने का वक्त आ गया है.