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Manipur School: नहीं सुधरे हालात, सरकार ने स्कूल खुलने की तारीख आगे बढ़ाई

राज्य श‍िक्षा निदेशालय पहले 21 जून से स्कूल खोलने को लेकर नोटिस जारी कर चुका था. लेकिन अभी वर्तमान हालातों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. बता दें कि मणिपुर में हिंसा के जिस तरह के हालात हैं, उसमें कई स्कूलों को सुरक्षाकर्म‍ियों के लिए छावनी या फिर रिलीफ सेंटर बनाया गया है.

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अब एक जुलाई से खुलेंगे स्कूल (प्रतीकात्मक फोटो)
अब एक जुलाई से खुलेंगे स्कूल (प्रतीकात्मक फोटो)

मण‍िपुर में हिंसा के हालातों को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूल खोलने की तारीख आगे बढ़ा दी है. राज्य श‍िक्षा निदेशालय पहले 21 जून से स्कूल खोलने को लेकर नोटिस जारी कर चुका था. लेकिन अभी वर्तमान हालातों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. बता दें कि मणिपुर में हिंसा के जिस तरह के हालात हैं, उसमें कई स्कूलों को सुरक्षाकर्म‍ियों के लिए छावनी या फिर रिलीफ सेंटर बनाया गया है. 

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हिंसा प्रभावित मणिपुर में सभी स्कूलों में सामान्य कक्षाओं की बहाली को एक जुलाई तक या अगली सूचना तक के लिए टाल दिया गया है. सरकार के 16 जून के आदेश के अनुसार 21 जून को स्कूल फिर से खुलने थे. एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि 16 जून के नोट‍िफिकेशन के अनुसार राज्य के सभी स्कूलों के लिए सामान्य कक्षाओं की बहाली 21 जून से की जानी थी. लेकिन हालातों को देखते हुए अब सरकार ने फैसला लिया है कि स्कूलों को एक जुलाई 2023 तक या सरकार के अगले आदेश तक बंद रखा जाएगा. शिक्षा विभाग-स्कूल, मणिपुर के तहत सभी जोनल शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी संबंधितों को सूचित करें और इसी के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करें. 

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सोमवार 19 जनवरी को मणिपुर में एक बार फिर हिंसा की घटनाएं सामने आईं. यहां बलवाइयों ने राजधानी इंफाल और कांगपोकपी की सीमा के नजदीक बवाल काटा. इसके अलावा हेंगजांग में भी फायरिंग की सूचना मिली. सूत्रों के अनुसार इंफाल के सेकमाई इलाके में कथित तौर पर कुकी पक्ष के अज्ञात बदमाशों ने 2 प्रतिष्ठानों को नष्ट कर दिया था. इसी बीच सूत्रों के मुताबिक दूसरी तरफ से कुकी गांव हेंगजांग में फायरिंग की सूचना भी मिली.

बता दें कि मणिपुर में पिछले एक महीने से ज्याद समय से जातीय हिंसा जारी है. इसमें 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में मणिपुर के पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद पहली बार 3 मई को झड़पें हुईं.

 

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