जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एक बार फिर बवाल देखने को मिला. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का आरोप है कि कार्यकर्ताओं पर लेफ्ट समर्थित लोगों की ओर से हमला किया गया. एबीवीपी का कहना है कि पार्टी के 10 से 15 समर्थकों पर 200 से 300 लोगों ने हमला किया. आरोप है कि उस दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने बड़ी मुश्किल से खुद की जान बचाई.
जेएनयू के छात्र प्रतीक भारद्वाज ने बताया, 'बीती रात हम 10-15 छात्र थे, इस दौरान 200 से 300 की संख्या में लेफ्ट समर्थित लोग आए और हमला कर दिया. जैसे तैसे हम लोगों ने भाग कर जान बचाई और हम लोग बाथरूम में अपना दरवाजा बंद करके बचे. इस पूरे बवाल के दौरान 10 से 15 हमारे साथियों को चोटे आई हैं. मुझे भी चोट आई है. मुझे अधमरा करके छोड़ दिया गया, जब पुलिस मौके पर आई तो हमारी जान बची.'
वहीं यूनिवर्सिटी के छात्र रमाकांत सिंह ने बताया, 'हम कल रात लाइब्रेरी में थे. ये 12 बजे के आसपास की घटना है. जब तेज आवाज सुनाई देने लगी, बाहर निकाल कर गए तो पता चला कि बवाल हुआ है. फिर पुलिस आई. छात्रों में इस दौरान डर का माहौल देखा गया क्योंकि लाठी डंडे चले काफी शोर हुआ. कई जगह तालेबंदी की कोशिश हुई थी, इस वजह से आम छात्रों में डर का माहौल देखने को मिला. ये बवाल पूरी रात चला.'
एबीवीपी दिल्ली के संयुक्त सचिव विकास पटेल ने बताया कि 'JNUSU ने जेएनयू की लाइब्रेरी के बाहर लगी फेशियल रिकग्निशन मशीन को नुकसान पहुंचाया. अब वे वे प्रोटेस्ट कर रहे हैं और क्लास बंद कर रहे हैं. उन्होंने कल एक मार्च बुलाया था और रात में यह मार्च अलग-अलग स्कूलों की तरफ मुड़ गया और स्टूडेंट्स को क्लास खाली करने पर मजबूर किया. जिन कुछ स्टूडेंट्स ने उनका विरोध किया, उन पर हमला किया गया और उन्हें कमरों में बंद कर दिया गया. जब हम स्टूडेंट्स की मदद करने गए तो हम पर हमला किया गया.'
उन्होंने बताया, 'कैंपस में करीब 200-250 लोगों ने स्टूडेंट्स पर हमला किया. JNU कैंपस के अंदर मॉब लिंचिंग जैसा सीन था. उन्होंने रॉड, पत्थर और डंडे जमा कर लिए हैं. हम फॉर्मल कंप्लेंट करेंगे. कल की घटना अटेम्प्ट टू मर्डर की थी. भीड़ बड़े-बड़े पत्थर फेंक रही थी. उनके पास चाकू और रॉड थे, लेकिन उन्होंने मास्क पहने हुए थे.'