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ब्रिटेन ने भारतवंशी प्रो. वेंकी रामकृष्णन को दिया ऑर्डर ऑफ मेरिट अवॉर्ड, निधन से पहले महारानी ने किया था चयन

नोबेल पुरस्कार विजेता 70 वर्षीय प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन (Venki Ramakrishnan) का जन्म तमिलनाडु के चिदंबरम में हुआ था और यूके जाने से पहले उन्होंने अमेरिका में बायोलॉजी की पढ़ाई की थी. ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने साइंस के क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए उनको प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है.

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प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन को साल 2009 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन को साल 2009 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

भारत में जन्मे और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने विज्ञान के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है. ऑर्डर ऑफ मेरिट ब्रिटिश संप्रभु द्वारा प्रदान किया गया सम्मान का एक विशेष चिह्न है. उनसे पहले सर डेविड एटनबरो, प्रसिद्ध ब्रिटिश संरक्षणवादी, कलाकार डेविड हॉकनी, हाउस ऑफ कॉमन्स के पूर्व स्पीकर बेट्टी बूथ्रॉयड और वर्ल्ड वाइड वेब के संस्थापक कंप्यूटर साइंटिस्ट सर टिम बर्नर्स-ली को भी ऑर्डर ऑफ मेरिट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है.

ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने निधन से पहले सितंबर में ऐतिहासिक क्रम में छह नियुक्तियां की जिनमें से एक 70 वर्षीय प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन (Venki Ramakrishnan) हैं. चार्ल्स III द्वारा की जाने वाली ये पहली नियुक्ति है. बकिंघम पैलेस की ओर से शुक्रवार शाम जारी एक बयान में कहा गया, "महामहिम राजा ऑर्डर ऑफ मेरिट के लिए छह नई नियुक्तियां करके प्रसन्न हैं. आदेश के लिए नियुक्तियां सशस्त्र बलों, विज्ञान, कला, साहित्य, या संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट सेवा की मान्यता में की जाती हैं, इन व्यक्तियों को सितंबर की शुरुआत में महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वारा चुना गया था."

70 वर्षीय प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन (Venki Ramakrishnan) का जन्म तमिलनाडु के चिदंबरम में हुआ था और यूके जाने से पहले उन्होंने अमेरिका में जीव विज्ञान की पढ़ाई की थी, जहां वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में मॉल्यूकलर बायोलॉजी रिसर्च सेंटर एमआरसी लैब के ग्रुप लीडर थे. उन्हें राइबोसोमल संरचना पर उनके काम के लिए 2009 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला और 2012 में रानी द्वारा knighted की उपाधि दी गई. वह नवंबर 2015 से नवंबर 2020 तक यूके की रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष थे.

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प्रोफेसर वेंकी ने दो साल पहले रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष पद के फेयरवेल में कहा था, "विडंबना यह है कि भारत के संपर्क में आने वाले पहले [रॉयल सोसाइटी] फेलो रॉबर्ट क्लाइव और वारेन हेस्टिंग्स या थॉमस मैकाले और रिचर्ड टेम्पल जैसे एडमिनिस्ट्रेटर्स थे. वे निश्चित रूप से भारतीयों को किसी भी तरह से अपने बराबर नहीं मानते थे, शायद ही उन्होंने सोचा होगा कि एक दिन, भारत में पैदा हुआ कोई व्यक्ति साथी बन जाएगा, सोसायटी का अध्यक्ष तो दूर की बात है." प्रो. वेंकी भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के एक विदेशी सदस्य भी हैं.

बता दें कि हाल ही में, वह उच्च जीवों में राइबोसोम की क्रिया को देखने के लिए इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने मानवीय समझ को एडवांस किया है जिससे पता लगाया जा सकता है कि राइबोसोम कैसे काम करता है और एंटीबायोटिक्स इसे कैसे रोकते हैं. इससे पहले, उन्होंने हिस्टोन और क्रोमैटिन संरचना पर भी काम किया है, जो यह समझने में मदद करता है कि कोशिकाओं में डीएनए कैसे व्यवस्थित होता है.

 

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