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IIT मद्रास लाया 'फ्यूचर का फुटबॉल'! न कोई ऑफसाइड, न कोई सुस्ती, एक साथ होगा 2 टीमों पर हमला

आईआईटी मद्रास देश का पहला ऐसा आईआईटी है जिसने खेल के आधार पर प्रवेश शुरू किया है. अब ओमेगाबॉल जैसी पहल से संस्थान युवाओं में खेल संस्कृति और 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने की क्षमता को बढ़ावा दे रहा है. अमेरिका और यूरोप में लोकप्रिय हो रहा यह खेल अब भारतीय युवाओं के ल‍िए पहली बार शुरू हुआ है.

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आईआईटी मद्रास ऐसा पहला संस्थान है जिसने इस खेल को भारत की जमीन पर पेश किया
आईआईटी मद्रास ऐसा पहला संस्थान है जिसने इस खेल को भारत की जमीन पर पेश किया

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि नए विचारों में भी देश का नेतृत्व करता है. संस्थान ने भारत में पहली बार फुटबॉल का एक बेहद तेज और रोमांचक वैरिएंट 'ओमेगाबॉल' पेश किया है. खास बात यह है कि इस खेल को बढ़ावा देने के लिए संस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर 'आईआईटी मद्रास ओमेगाबॉल क्लब' बनाने का भी फैसला किया है.

क्या है ओमेगाबॉल?
अगर आप फुटबॉल के शौकीन हैं, तो ओमेगाबॉल आपको हैरान कर देगा. यह पारंपरिक फुटबॉल का एक आधुनिक और आक्रामक विकल्प है. इसके नियम इसे सबसे अलग बनाते हैं. 

इसमें आमतौर पर दो टीमों के बीच मुकाबला होता है, लेकिन यहां एक साथ 3 टीमें मैदान पर उतरती हैं. यह खेल चौकोर नहीं बल्कि करीब 50-55 मीटर व्यास (Diameter) वाले गोल मैदान पर खेला जाता है. इसमें मैदान पर तीन गोल होते हैं, जो एक-दूसरे से 120 डिग्री की दूरी पर स्थित होते हैं. इसमें प्रत्येक टीम एक साथ दो गोलों पर आक्रमण करती है और अपने एक गोल का बचाव करती है.

नो ऑफसाइड: इस खेल में 'ऑफसाइड' का कोई नियम नहीं है, जिससे खेल की रफ्तार और आक्रामकता कई गुना बढ़ जाती है. यह मैच 13-13 मिनट के तीन सत्रों (Sessions) में खेला जाता है.

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IIT मद्रास में सजा 'ओमेगाबॉल' का पहला मंच
इस खेल की लॉन्चिंग के मौके पर आईआईटी मद्रास के फुटबॉल मैदान पर एक इंटर-कॉलेज टूर्नामेंट का आयोजन किया गया. इसमें चेन्नई के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे लोयोला कॉलेज, गुरु नानक कॉलेज, डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी और सविता यूनिवर्सिटी की टीमों ने हिस्सा लिया. आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी ने टूर्नामेंट का उद्घाटन करते हुए कहा कि ओमेगाबॉल में वही इनोवेशन दिखता है जिसके लिए आईआईटी मद्रास जाना जाता है.

छात्रों के लिए क्यों खास है यह खेल?
संस्थान के डीन (स्टूडेंट्स) प्रो. सत्यनारायण एन. गुम्मादी के अनुसार, इस फॉर्मेट में खिलाड़ियों को गेंद के साथ रहने का ज्यादा समय मिलता है. वहीं, इंजीनियरिंग डिजाइन के छात्र रफ़द अब्दुल रशीद ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, "इसमें जीत सिर्फ एक टीम की होती है और अन्य दो टीमें हार जाती हैं, इसलिए मुकाबला बहुत कड़ा होता है. खिलाड़ियों को हर पल दो विपक्षी टीमों की चाल पर नजर रखनी पड़ती है.

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