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स्कूल से कॉलेज की दहलीज तक... ये जमाना बेट‍ियों का है! लड़कों पर हो रहा ज्यादा खर्च तब भी पीछे

स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक लड़कियां लड़कों को पीछे छोड़ रही हैं. उच्च शिक्षा में महिलाओं की हिस्सेदारी 51.48% तक पहुंच गई है. युवा पीढ़ी में साक्षरता का अंतर घटकर केवल 3.8% रह गया है. एमफिल में महिलाओं की हिस्सेदारी 76.14% है। हालांकि, इंजीनियरिंग और आईटी में पुरुषों की संख्या अभी भी अधिक है. खर्च और ड्रॉपआउट दरों में भी सुधार की जरूरत बनी हुई है.

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What’s driving the gender gap in IIT BTech programmes?
What’s driving the gender gap in IIT BTech programmes?

जमाना तेजी से बदल रहा है. वो दौर तो स‍िर्फ कहान‍ियों में छूट गया जिसमें लड़क‍ियां चूल्हा चौका करती थीं और लड़के कॉलेज तक पढ़ाई... अब श‍िक्षा के क्षेत्र में तस्वीर लगातार बदल रही है. सांख्यिकी मंत्रालय (NSO) की ताजा 'महिला और पुरुष 2025' रिपोर्ट कह रही है कि अब स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक लड़कियां, लड़कों को पीछे छोड़ रही हैं. यह डेटा बताता है कि देश में बरसों से चला आ रहा जेंडर गैप अब तेजी से सिमट रहा है. 

पढ़ाई में बेटियों का 'दम'
रिपोर्ट के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि स्कूल के हर स्तर पर लड़कियों का नामांकन अनुपात (GER) लड़कों से ज्यादा हो गया है. सिर्फ संख्या ही नहीं, सफलता के मामले में भी बेटियां आगे हैं. उच्च शिक्षा (Higher Education) में पास होने वाले कुल छात्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी 51.48% तक पहुंच गई है. यानी अब डिग्री लेने के मामले में भी लड़कियां बढ़त बनाए हुए हैं.

युवाओं में कम हुई साक्षरता की खाई
भले ही देश में कुल साक्षरता दर (Literacy Rate) में अभी 14.4% का अंतर है, लेकिन युवा पीढ़ी में यह खाई लगभग खत्म होने को है. 15 से 24 साल के युवाओं के बीच साक्षरता का यह अंतर घटकर सिर्फ 3.8% रह गया है. 1981 में जहां महिला साक्षरता सिर्फ 30.6% थी, वह अब बढ़कर 70% के पार पहुंच गई है.

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कहां है लड़कियों का दबदबा?
उच्च शिक्षा में लड़कियों की रुचि कुछ खास क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दिख रही है. एमफिल (MPhil) में 76.14% के साथ महिलाएं एकतरफा बढ़त पर हैं. वहीं यूजी और पीजी यानी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने वालों में आधी से ज्यादा संख्या महिलाओं की है. यही नहीं आर्ट्स, साइंस, सोशल साइंस और मेडिकल में लड़कियां ज्यादा हैं, जबकि इंजीनियरिंग और आईटी में अब भी पुरुष ज्यादा नजर आते हैं.

अभी चुनौतियां बाकी हैं
शिक्षा में सुधार के बावजूद कुछ मोर्चों पर अब भी काम करना बाकी है. रिपोर्ट के अनुसार, लड़कों की पढ़ाई पर औसतन सालाना 13,901 रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि लड़कियों पर यह खर्च 12,101 रुपये ही है. साथ ही, महिलाओं के स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर कम तो हुई है, लेकिन पुरुषों के मुकाबले वे स्कूल में औसतन कम साल (7.4 साल) ही बिता पाती हैं.

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