स्टूडेंट्स को मोटिवेट करने और पॉजिटिव सोच जगाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बार फिर जरूरी फैसला लिया है. दिल्ली के सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स के बर्थडे अब हैप्पीनेस करिकुम (Happiness Curriculum) के तहत मनाया जाएगा. शिक्षा निदेशालय (DoE) ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों के जन्मदिन मनाने से संबंधित सर्कुलर जारी किया है.
सर्कुलर में लिखा है, "स्कूलों में कृतज्ञता, प्रेरणा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के जन्मदिन मनाने के एक नए पैटर्न का पालन किया जाएगा. इससे स्टूडेंट्स का ध्यान एक्सप्लोर, एक्पीरियंस और खुशी जाहिर करने की ओर खींचा जा सकेगा." हैप्पीनेस करिकुलम, यूनेस्को के मौलिक सिद्धांतों पर आधारित है, जो शिक्षा के मूलभूत पहलुओं के लिए शिक्षकों को गाइड करता है और सीखने की प्रक्रिया को नया रूप देता है.
इन छात्रों का मनाया जाएगा जन्मदिन
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, हैप्पीनेस करिकुलम के तहत दिल्ली सरकार के स्कूलों के स्टूडेंट्स का जन्मदिन मनाने के लिए नए तौर तरीके का पालन किया जाएगा. पहली या उससे छोटी क्लास से लेकर 8वीं क्लास तक के छात्रों का जन्मदिन मनाया जाएगा.
Birthdays of students will be celebrated during Happiness Classes to make every child feel special & create a positive environment.
— DelhiSMC (@DelhiSmc)
We boost the values of motivation & positive thinking amongst students through
रविवार या छुट्टी के दिन वाले जन्मदिन
जिन स्टूडेंट्स के जन्मदिन रविवार या किसी छुट्टी वाले दिन आते हैं तो उनका जन्मदिन सोमवार या स्कूल खुलने के पहले दिन मनाया जाएगा. शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, दिल्ली सरकार का मानना है कि इससे बच्चों के प्रति आभार पैदा होगा और वह आगे कुछ करने के लिए प्रेरित होंगे. इसके अलावा, इस पहल से स्टूडेंट्स की पॉजिटिव सोच को बढ़ाया जा सकेगा. शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अवकाशकाल में जिन स्टूडेंट्स का जन्मदिन होगा, उन सभी का जन्मदिन स्कूल के खुलने के पहले दिन सामूहिक रूप से मनाया जाएगा.
बता दें कि स्टूडेंट्स में खुशी एवं कल्याण की बुनियाद को मजबूत बनाने के लिए 2018 में हैप्पीनेस करिकुलम शुरू किया गया था. दिल्ली के 1,030 सरकारी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों के लिए 35 मिनट की क्लास लगती है. बच्चों में स्व-जागरूकता, अभिव्यक्ति, समानुभूति, संबंधों की समझ का विकास इस करिकुलम का मुख्य उद्देश्य है.