नीट 2026 के पेपर लीक के बाद अब दोबारा परीक्षा होने से पहले ही छात्रों और अभिभावकों को री-नीट-2026 के पेपर लीक नाम से धोखाधड़ी का शिकार बनाया जा रहा है. ऐसी शिकायत अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच को दी गई है. शिकायतकर्ता शुभम ठाकर ने आजतक से खास बातचीत में सारी कहानी बताई. शुभम को उनके जुनियर छात्र ने यह जानकारी दी थी कि टेलिग्राम पर ऐसे ग्रुप चल रहे है जिसमें री नीट-2026 का पेपर लीक करने का दावा किया जा रहा है जिसके बाद शुभम ने उन सभी ग्रुप में जुड़कर जानकारी इकट्ठा की और फिर साइबर क्राइम में शिकायत की.
री-नीट 2026 परीक्षा के पेपर लीक के नाम पर एक बड़े साइबर घोटाले का आरोप लगाते हुए शुभम ने चौंकाने वाले दावे किए हैं. उन्होंने बताया है कि टेलीग्राम पर चल रहे कुछ संदिग्ध चैनल छात्रों और अभिभावकों को री-नीट 2026 परीक्षा का पेपर लीक हो गया है का संदेश दिखाकर ठग रहे हैं. एक पेपर की कीमत 10 लाख रुपये रखी गई है और अनुमान है कि @RENEETLEAKER सहित कई टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से अब तक लगभग 7901 लोगों से 5.74 करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूल की जा चुकी है.
क्या फिर लीक हो गया NEET का पेपर
शुभम को आशंका है कि यह सिर्फ साइबर धोखाधड़ी नहीं है पर री-नीट-2026 का भी पेपर लीक का पूरा षड्यंत्र है. इसका कारण बताते हुए उन्होंने राघव सर के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि राघव सर नाम के एक व्यक्ति पर इस पूरे नेटवर्क को चलाने का संदेह है और उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग में उसने पहले भी पेपर लीक करने की बात कबूल की है. इस पूरे घोटाले में एक विधायक के शामिल होने का भी दावा किया जा रहा है. रिकॉर्डिंग में आरोपी कहता है कि यही तो पूरा सिस्टम है और हमें कुछ नहीं होगा. इस तरह वह छात्रों और अभिभावकों को 10 लाख में पेपर खरीदने के लिए कह रहा है जिसके लिए 60 हजार रुपये टोकन भी मांगा जा रहा है.
किस तरह से यह धोखाधड़ी चल रही है
टेलिग्राम पर
@WASSPHER और @RAREOB जैसे चैनल बनाकर बच्चों से पेपर लीक का दावा किया जा रहा है. एक ग्रुप में जुड़ने के बाद जानकारी साझा की जाती है जिसमें दावा किया जाता है कि अगर आपको पेपर चाहिए तो 10 लाख रुपये लगेंगे. इसके लिए पहले 200 से लेकर 500 रुपये लिए जाते हैं फिर उन्हें पेपर लीक वाले मुख्य ग्रुप में शामिल किया जाता है. जहां पर एडमिन के द्वारा जानकारी साझा की जाती है. क्यूआर कोड पर भी एक ऐसी एप्लीकेशन का उपयोग किया जाता है जिससे बैंक अकाउंट तक न पहुंचा जा सकें. पेपर पाने के लिए पहले 60 हजार का भुगतान करना है और आखिर में 10 लाख रुपये देने है जिसके बाद 21 जून यानी की पेपर वाले दिन सुबह 2 बजे उनको पेपर देने का दावा किया जा रहा है.
जब शुभम ने इस ग्रुप के संचालक राघव सर से बात की तो उन्होंने दावा किया कि 35 लाख में पेपर खरीदा गया है और अभी से उनके पास 70 सवाल आ गए है बाकी के सवाल 24 मई को आ जाएंगे. अगर किसी को 10-15 हजार में पेपर मिल रहा है तो वह फ्रॉड है, इतने सस्ते में NEET का पेपर नहीं बिकता. हम 10 लाख ले रहे क्योंकि यही पेपर आएगा और अगर एक सवाल भी इसमें से कम पूछा गया तो सारे रुपए वापिस मिलेंगे. इसके लिए पूरा सिस्टम सेट है उनके साथ एक विधायक भी है जिससे उनको कुछ नहीं होने वाला. अगर किसी ने शिकायत की तो शिकायतकर्ता फंसेगा हमारी सिस्टम को कुछ नहीं होता.
शुभम का आरोप है कि राघव सर से जब बैंक खाते कि जानकारी मांगी तो वह महाराष्ट्र का बैंक है और खाता धारक का नाम राहुल कल्याण है. शुभम का दावा है कि यह पूरी तरह से सेट किया गया सिस्टम है और जिस तरह छात्रों को जानकारी दी जा रही है और टेलिग्राम का उपयोग किया जा रहा है, यह सिर्फ साइबर घोखाधड़ी का मामला नहीं है पर पेपर लीक भी हो सकता है क्योंकि यह जो राघव सर नाम का व्यक्ति है उसके तार कहीं न कहीं पेपर लीक करने वाले पी वी कुलकर्णी गिरोह के साथ जुड़ा हुआ मामला लग रहा है.