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OSM फेल! CBSE के 4 लाख छात्रों ने मांगी 11 लाख कॉपियां, आज से खुलेगा री-इवैल्यूएशन विंडो

सीबीएसई कक्षा 12वीं के रिजल्ट विवाद ने छात्रों और अभिभावकों में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है. ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ियों और पोर्टल क्रैश के कारण 4 लाख से अधिक छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है. बोर्ड ने फीस में भारी कटौती की है और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. छात्रों को अपनी आंसर-शीट की डिजिटल कॉपी देखने और नंबरों की समीक्षा करने का मौका दिया जा रहा है,

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CBSE’s On-Screen Marking (OSM) controversy
CBSE’s On-Screen Marking (OSM) controversy

सीबीएसई (CBSE) कक्षा 12वीं के नतीजों को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. रिजल्ट कंट्रोवर्सी से जूझ रहा सीबीएसई बोर्ड आज से 'री-इवैल्यूएशन' (पुनर्मूल्यांकन) की विंडो खोलने जा रहा है. ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में आई भारी गड़बड़ियों, पोर्टल क्रैश और छात्रों के टूटते भरोसे के बीच यह पूरी प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है.

कॉपियों को दोबारा जांचने की मांग को लेकर छात्रों में किस कदर गुस्सा और अविश्वास है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 4 लाख से ज्यादा छात्र अपनी कॉपियों की री-चेकिंग के लिए आवेदन कर चुके हैं, जिसके तहत कुल 11 लाख से अधिक आंसर-शीट की मांग की गई है. हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संकेत दिए हैं कि इनमें से करीब 20 फीसदी छात्र ही अंतिम तौर पर री-इवैल्यूएशन (कॉपियों को दोबारा जांचने) का विकल्प चुनेंगे.

क्या कहते हैं सीबीएसई के आंकड़े?
सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरे अविश्वास की कहानी ये नंबर्स खुद बयां कर रहे हैं:

कुल आवेदक छात्र: 4,04,319 छात्रों ने अपनी आंसर-शीट देखने के लिए अप्लाई किया.
मांगी गई आंसर-बुक्स: कुल 11,31,961 कॉपियों की मांग की गई.
डिजिटली भेजी गई कॉपियां: इनमें से 8,98,214 आंसर-बुक्स छात्रों को डिजिटली उपलब्ध कराई जा चुकी हैं.

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क्या है पूरा 'OSM विवाद' जिसने बढ़ाई छात्रों की टेंशन?
सीबीएसई ने इस साल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक नया और विवादित ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पेश किया था. इसके तहत परीक्षकों को पारंपरिक कागज की कॉपियों के बजाय उनके स्कैन किए गए डिजिटल रूप को स्क्रीन पर जांचना था. बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन तेज और पारदर्शी होगा.

लेकिन, जैसे ही रिजल्ट घोषित हुआ, सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ आ गई. छात्रों और अभिभावकों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए. इसमें कई छात्रों को उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले. कॉपियों में कई जगह आंसर बिना चेक किए छोड़ दिए गए. यही नहीं कई आंसर-शीट अधूरी और स्कैनिंग बेहद धुंधली (Blurred) पाई गई. जब छात्रों ने कॉपियां देखनी चाही, तो सीबीएसई का आधिकारिक पोर्टल बार-बार क्रैश होता रहा.

भारी विरोध के बाद CBSE को झुकना पड़ा, फीस में की भारी कटौती
बढ़ते जन-आक्रोश और आलोचनाओं के बीच सीबीएसई को बैकफुट पर आना पड़ा और उसने रिजल्ट के बाद दी जाने वाली इन प्रशासनिक सेवाओं की फीस को भारी रूप से घटा दिया है.

नया संशोधित फीस स्ट्रक्चर बनाम पुराना खर्च:

स्कैन की गई कॉपी: अब सिर्फ ₹100 प्रति विषय (पहले इसके लिए ₹700 देने पड़ते थे).
मार्क्स का वेरिफिकेशन: अब सिर्फ ₹100 प्रति विषय (पहले इसके लिए ₹500 चुकाने होते थे).
री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन): अब केवल ₹100 प्रति प्रश्न.

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राहत की बात यह है कि बोर्ड ने यह भी ऐलान किया है कि अगर समीक्षा के बाद छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो री-इवैल्यूएशन की फीस वापस (री-फंड) कर दी जाएगी.

री-इवैल्यूएशन के लिए कैसे करें अप्लाई?
जो छात्र अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं, वे आधिकारिक सीबीएसई पोर्टल पर जाकर इन 4 स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

स्टेप 1 (स्कैन कॉपी प्राप्त करें): सबसे पहले छात्र को अपनी जांची गई आंसर-बुक की डिजिटल स्कैन कॉपी हासिल करनी होगी.

स्टेप 2 (बारीकी से समीक्षा): छात्र अपनी कॉपी को ध्यान से देखें कि क्या सभी उत्तर जांचे गए हैं, कुल नंबरों का जोड़ सही है या कोई पेज गायब तो नहीं है.

स्टेप 3 (मार्क्स वेरिफिकेशन): यदि कोई गड़बड़ी मिलती है, तो छात्र सबसे पहले अंकों के वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई करें.

स्टेप 4 (फाइनल री-इवैल्यूएशन): इसके बाद, छात्र उन विशिष्ट प्रश्नों के लिए री-इवैल्यूएशन की मांग कर सकते हैं, जहां उन्हें लगता है कि नंबर गलत काटे गए हैं.

(नोट: बोर्ड ने साफ किया है कि री-इवैल्यूएशन के बाद नंबर बढ़ भी सकते हैं, घट भी सकते हैं या जस के तस रह सकते हैं. संशोधित स्कोर ही अंतिम माना जाएगा.)

ये अब केवल नंबरों का खेल नहीं रहा... 
यह विवाद अब सिर्फ स्कूल के नंबरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बड़ा राजनीतिक और तकनीकी मोड़ ले लिया है:

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हैकर का दावा: पिछले दिनों एक किशोर हैकर ने सीबीएसई से जुड़े पोर्टल में तकनीकी खामियों और साइबर सुरक्षा में चूक का दावा करते हुए स्क्रीनशॉट वायरल किए थे. हालांकि, सीबीएसई ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और जो स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे, वे केवल सैंपल डेटा वाले एक टेस्टिंग प्लेटफॉर्म के थे.

राजनीतिक घमासान: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और ओएसएम (OSM) सिस्टम से जुड़े वेंडर के कांट्रैक्ट मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल उठाए थे, जिसे सीबीएसई ने सिरे से खारिज कर दिया.

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