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डॉ. मनमोहन सिंह: ऐसा टॉपर जो इंडियन इकोनॉमी की नब्ज समझता था... क्लासमेट ने बताई उनसे जुड़ी अनकही बातें

वो बहुत होनहार थे. हमेशा हर क्लास में टॉपर रहे. मुझे उनका दोस्त होने पर गर्व होता है. मैं उनसे हाल ही में नहीं मिला, लेकिन एक बार जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने तुरंत पहचान लिया. मेरा नाम लिया... हिंदू कॉलेज अमृतसर में डॉ मनमोहन सिंह के क्लासमेट हंसराज चौधरी अपने क्लासमेट के बारे में बात करते हुए गर्व और गम की मिश्र‍ित भावना से भर उठे.

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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को हिंदू कॉलेज में क्लासमेट रहे हंसराज चौधरी ने याद किया.
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को हिंदू कॉलेज में क्लासमेट रहे हंसराज चौधरी ने याद किया.

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और महान अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं. गुरुवार रात दिल्ली के AIIMS हॉस्पिटल में उन्होंने 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. पूरा देश एक महान नेता, विचारक, प्रोफेसर, शिक्षाविद्, ग्लोबल इकोनॉमिस्ट डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र में बड़े सम्मान से लिया जाता है. वे न केवल एक प्रभावशाली प्रधानमंत्री रहे, बल्कि उनके आर्थिक सुधारों ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया.

हिंदू कॉलेज, अमृतसर में डॉ. मनमोहन सिंह के क्लासमेट हंसराज चौधरी से आजतक की टीम ने खास बातचीत की. हंसराज चौधरी ने बताया कि डॉ. सिंह बहुत ही होनहार और शांत छात्र थे और हमेशा गणित के कठिन सवालों को हल कर लेते थे.

उन्होंने कहा, 'मैं 1952 से 1954 तक हिंदू कॉलेज, अमृतसर में डॉ. मनमोहन सिंह का क्लासमेट था. वे बहुत ही होनहार थे, हमेशा गणित के कठिक सवालों को सॉल्व कर लेते थे. उन्होंने कहा, 'मैं उनसे हाल ही में नहीं मिला लेकिन उन्हें याद करता हूं. एक बार जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने मुझे तुरंत पहचान लिया और मेरा नाम लिया.'

भारत को गहरे आर्थिक संकट से निकाला

1991 में भारत एक गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा था. विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका था, देश पर भारी कर्ज था, और सरकार के पास आयात के लिए केवल 15 दिन का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था. इसी समय, तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया. डॉ. सिंह ने अपने आर्थिक सुधारों और दूरदृष्टि से देश को इस संकट से बाहर निकाला और GDP ग्रोथ 1991 में 1.1% से बढ़कर 1992 में 5.3% हो गई. उन्होंने लाइसेंस राज का अंत किया, विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया, व्यापार और उद्योग के लिए नीतियां उदार बनाई. इन सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया और आर्थिक विकास की दिशा में एक नई राह दिखाई. 

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2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे

डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. उन्होंने नरेगा (मनरेगा) जैसी योजनाओं को लागू किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन हुआ. भारत-अमेरिका परमाणु समझौता उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धि थी. उनके कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई. डॉ. मनमोहन सिंह की नीतियां आज भी भारत के आर्थिक विकास की नींव मानी जाती हैं.

डॉ. मनमोहन सिंह का एकेडमिक सफर

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पंजाब (अब पाकिस्तान में) के गाह गांव में हुआ. उनकी शुरुआती शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय (जो उस समय लाहौर में स्थित था, अब पाकिस्तान में है) से प्राप्त की. विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया. उन्होंने 1952 में हिंदू कॉलेज विश्वविद्यालय, अमृतसर से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स और 1954 में एमए की डिग्री प्राप्त की.

अपने एकेडमिक करियर में वे हमेशा टॉपर रहे. साल 1957 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के "सेंट जॉन्स कॉलेज" से अर्थशास्त्र में फर्स्ट डिवीजन के साथ बैचलर डिग्री प्राप्त की. कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोन रॉबिन्सन और निकोलस काल्डोर के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने ज्ञान को समृद्ध किया. 1962 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के "नफील्ड कॉलेज" से अर्थशास्त्र में डीफिल (डॉक्टरेट) की डिग्री हासिल की.

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उनकी डॉक्टरेट थीसिस का विषय था: "India's Export Performance, 1951–1960, Export Prospects and Policy Implications". यह रिसर्च भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालने वाली उनकी समझ का आधार बनी. डॉ. सिंह ने कुछ समय के लिए दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी पढ़ाई और शोध किया. अर्थशास्त्र में उनकी उत्कृष्टता ने उन्हें भारत और दुनिया के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पहचान दिलाई.

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