दिसंबर के आते ही उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड बढ़ गई है. जहां पहाड़ी इलाकों में जबरदस्त बर्फबारी हुई है वहीं मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिरी इतनी ठंड क्यों पड़ती है और इसके पीछे क्या वजह है. आइए मौसम परिवर्तन के बारे में विस्तार से जानते हैं.
दीवाली के त्योहार के बाद मौसम ठंडा होने लगता है. वहीं कुछ दिनों बाद स्वेटर-जैकेट निकलना शुरू हो जाता है. इसी के बाद ही सर्दियों का मौसम की शुरुआत हो जाती है, आपको बता दें. ऋतुओं को 4 भागों में विभाजित किया है.
1 वसंत (स्प्रिंग)
2. ग्रीष्म
3 शरद (ऑटम)
4. शिशिर (विंटर)
जानें- क्यों पड़ती है ठंड
पहले ये जान लें, जब पृथ्वी सूर्य की ओर चक्कर लगाती है तो वह थोड़ी तिरछी होती है. जिस वजह से गोलार्द्ध सूर्य की तरफ झुका रहता है, उस ज्यादा धूप मिलती है और वहां गर्मियों का मौसम आ जाता है वहीं जो गोलार्द्ध सूर्य से उलट दिशा में झुका होता है, वहां सर्दियों का मौसम आ जाता है. ऐसा हर साल होता है. पहले गोलार्द्ध सूर्य के नजदीक होता है, सूर्य की दूसरी तरफ. इसी अनुक्रम में मौसम में बदलाव होता है. दिसंबर में, उत्तरी गोलार्द्ध को सीधी धूप कम मिलती है और वहां सर्दियों का मौसम होता है दक्षिण में गर्मियां का.
ठंड पर रेड अलर्ट का मतलब क्या होता है? जानिए
राष्ट्रीय राजधानी में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने भले ही 1997 के बाद से 22 साल पुराना अपना रिकॉर्ड तोड़ा है, लेकिन पिछले 100 वर्षो में ऐसा केवल चार बार ही हुआ है. इसी को देखते हुए दिल्ली समेत 6 राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है.
आपको बता दें. रेड अलर्ट का मतलब है खतरनाक स्थिति. जब मौसम के ज्यादा खराब होने की संभावना रहती है तो रेड अलर्ट जारी किया जाता है. इसमें भारी नुकसान होने की संभावना के बारे में बताया जाता है. ताकि स्थिति के अनुसार तैयारी की जाए और लोगों को सावधान रहने के लिए पहले ही जानकारी दे दी जाती है. इसी के अलावा मौसम विभाग समय-समय पर अलर्ट्स जारी करता रहता है. जिसमें रेड के अलावा ग्रीन, येलो और ऑरेंज अलर्ट होते हैं.
इसलिए निकलती है भाप
बता दें कि हमारी सांस लेने की क्रिया के दौरान शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनता है. यही पानी जलवाष्प के रूप में आपके फेफड़ों द्वारा वाष्पीकरण की प्रक्रिया से मुंह या नाक से बाहर निकलता है.
आपको बता दें कि सांस लेने की प्रक्रिया और पाचन के दौरान आपके शरीर में जो पानी बनता है और जो पानी हम पीते हैं वो मूत्र, पसीने और वाष्पीकरण से शरीर के बाहर आता है.
ये तो आप जानते ही होंगे कि इंसान के शरीर का औसत तापमान 98.6 डिग्री फेरेनहाइट यानी 37 डिग्री सेल्सियस होता है. सर्दियों में जब हम सांस छोड़ते हैं तो सांस के साथ शरीर का पानी भी बाहर निकलता है. तो जब बाहर की ठंडी हवा से मिलता है तो इसका वाष्पीकरण शुरू हो जाता है.
यह जलवाष्प जब बाहर की ठंडी हवा से मिलती है तो ये संघनित होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों में बादल आती है और इसका परिणाम ये होता है कि ये आपको धुएं जैसी दिखाई देती है.