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R N Kao: कौन थे RAW के पहले प्रमुख 'आर एन काव', जानें कैसे बने देश के मास्‍टरस्‍पाई

R N Kao Birthday Today 10th May: कहा जाता है कि, “दुनियाभर में उनके संपर्क कुछ अलग ही थे, खासकर एशिया, अफगानिस्तान, चीन और ईरान में. बेहद शातिर दिमाग वाले 'रामजी' काव सिर्फ एक फोन लगा कर काम करवा सकते थे."

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R N Kao Birthday: R N Kao Birthday:

R N Kao Birthday: देश की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानि कि रॉ (RAW) के पहले प्रमुख और दुनियाभर में भारत के मास्टरस्पाई के नाम से मशहूर “आर. एन. काव” का आज जन्मदिन है. 10 मई 1918 को उत्तर प्रदेश के एक कश्मीरी परिवार में जन्मे काव के दिमाग और कुशल रणनीति की वजह से ही भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान और कामयाबी मिली. चीन, अफ़ग़ानिस्तान से लेकर पाकिस्तान में काव ने शानदार ऑपरेशन कुशलता से कार्यान्वित किए.
 
काव ही देश के वह पहले व्यक्ति रहे, जिन्होंने रॉ को एक वर्ल्ड क्लास प्रोफेशनल खुफिया एजेंसी में तब्दील किया. इस खुफिया एजेंसी ने ना केवल राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया, बल्कि भारत की इस एजेंसी को भविष्य के लिए एक सुरक्षित दिशा और दशा भी प्रदान की, ताकि भविष्य में आने वाले खतरों को पहले ही रोका जा सके.
 
ऐसे बने रॉ के निदेशक
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में जन्मे काव ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और इसके बाद अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया. वर्ष 1939 में भारतीय पुलिस सेवा की परीक्षा पास करके वह इसमें शामिल हो गए. सर्विस जॉइन करने के 8 साल बाद 1947 में जब गृह मंत्रालय के अधीन केन्द्रीय खुफिया ब्यूरो को पुनर्निर्मित किया गया, तब काव को वहां भेजा गया.
 
'एनएसजी के आर्किटेक्ट' के नाम से मशहूर आर एन काव ने IB को बतौर सहायक निदेशक जॉइन किया था. उस दौरान, काव को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके बाद वर्ष 1968 में जब भारत ने देश के बाहर के खुफिया मामलों के लिए एक एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) बनाने का फैसला लिया तो काव ने इसके पहले निदेशक के रूप में कमान संभाली.
 
काव ने रॉ की उपयोगिता 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सिद्ध कर दी. काव और उनके साथियों की देखरेख में ही मुक्तिवाहिनी के 1 लाख से अधिक जवानों को प्रशिक्षण दिया गया. काव का ख़ुफ़िया तंत्र इतना मजबूत था कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि किस दिन पाकिस्तान, भारत पर आक्रमण करने वाला है.
 
प्रेजेंस ऑफ़ माइंड से जीता ब्रिटिश महारानी का दिल 
वर्ष 1950 में ब्रिटिश महारानी के भारत में पहले दौरे के दौरान काव को ही उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस दौरान एक कार्यक्रम में काव ने अपनी काबिलियत और शानदार बुद्धि तत्परता का परिचय देते हुए महारानी की ओर एक समर्थक द्वारा फेंके गए बुके को बम समझकर इससे महारानी का बचाव करते हुए शानदार तरीके से इसे लपककर फ़ेंक दिया था. महारानी ने इसकी तारीफ में 'गुड क्रिकेट' बोला था.
 
काव ने रॉ के निदेशक के रूप में करीब दस वर्ष (1968 से 1977) तक अपनी सेवाएं दीं. वर्ष 1976 में जब इंदिरा गांधी ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय लिया, तो काव को केंद्रीय कैबिनेट के सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया. इसके बाद वे तत्कालीन प्रधानमंत्री (राजीव गांधी) को सुरक्षा के मामलों और विश्व के खुफिया विभाग के अध्यक्षों से संबंध स्थापित करने के रूप में नियुक्त विशेष सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे.
 
काव के जीवन पर लिखी गईं कई पुस्तकें 
काव के जीवन और उनकी कार्यशैली पर कई पुस्तकें भी लिखी गई हैं, जिनमें आर एन काव-जेंटलमैन स्पाईमास्टर, काउबॉयस ऑफ R&AW, रॉ-भारतीय गुप्तचर संस्थेची गूढगाथा, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, ए लाइफ इन सीक्रेट, इस्केप टू नो व्हेयर और टीम ऑफ काउबॉयज शामिल हैं.
 
काव से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें 
1) काव ने भविष्य की सुरक्षा चिंताओं से निबटने के लिए देश में पॉलिसी एंड रिसर्च स्टाफ की नींव रखी थी.
2) काव ने तत्कालीन बांग्लादेशी राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान को चेतावनी दी कि बांग्लादेश के कुछ सैन्य अधिकारी उनके खिलाफ तख्तापलट की साजिश रच रहे हैं. काव की ये बात सही भी साबित हुई.
3) काव के जीवन पर एक फिल्म बनाने की भी घोषणा की जा चुकी है. साल 2020 में धर्मा प्रोडक्शन और स्टिल एंड स्टिल मीडिया समूह ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी थी.
4) 1950 के दशक के मध्य में काव 'कश्मीर प्रिंसेस' की जांच और 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति में योगदान जैसे मामलों से जुड़े थे.
5) काव ने रॉ की दो पीढ़ियों को जासूसी के गुर सिखाये, उनकी टीम को 'काव ब्वॉयज' के नाम से जाना जाता था.
6) काव भारत के तीन प्रधानमंत्रियों के करीबी सलाहकार और सुरक्षा प्रमुख थे.
7) काव के कुशल नेतृत्व और उनकी टीम की कुशल रणनीति की वजह से सिक्किम के 3000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का बगैर खून बहाए भारत में विलय कराया गया, जिसने सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
8) काव ने इजरायल की इंटेलिजेंस एजेंसी 'मोसाद' के साथ भारत के संबंधों को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाई.
9) वे 1962 में चीन के साथ भारत के संघर्ष के बाद स्थापित हुए सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएस) के संस्थापकों में से एक थे.
10) काव ने वर्ष 1950 के दशक में पंडित जवाहर लाल नेहरू के अनुरोध पर घाना की खुफिया एजेंसी (विदेशी सेवा अनुसंधान ब्यूरो) के गठन में मदद की थी.
11) वर्ष 2017 के आईपीएस परिवीक्षार्थी कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने अपने सम्बोधन में काव को देश के महान आईपीएस अधिकारियों में से एक बताया था. 

जॉइंट इंटेलिजेंस कमिटी के चेयरमैन के. एन. दारुवाला द्वारा लिखा गया ये नोट आर. एन. काव को सही रूप से चित्रित करता है: “दुनियाभर में उनके संपर्क कुछ अलग ही थे, खासकर एशिया, अफगानिस्तान, चीन और ईरान में. बेहद शातिर दिमाग वाले 'रामजी' काव सिर्फ एक फोन लगा कर काम करवा सकते थे. वे ऐसे टीम अध्यक्ष थे जिन्होंने अंतरविभागीय स्पर्धा को खत्म कर दिया.”
 
20 जनवरी 2002 को काव ने एक सच्चे देशभक्त के रूप में अंतिम सांसे लीं. अपने जीवनकाल के दौरान काव ने भारत में जो आधुनिक इंटेलिजेंस की नींव रखी वो आज एक रक्षा कवच बनकर सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा कर रही है.

 

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