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International Literacy Day 2017: 6 करोड़ बच्चे आज भी नहीं जाते स्कूल

आइए अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर शपथ लें कि अपने ही नहीं, दूसरों के बच्चे को पढ़ाने के लिए जरूर कोशिश करेंगे. क्योंकि पढ़ेगा, तभी तो बढ़ेगा इंडिया .

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International Literacy Day 2017
International Literacy Day 2017

वैज्ञानिक और सास्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 17 नवंबर को 1965 में 8 सितंबर को अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की घोषणा की थी. दुनिया भर में 1966 में पहला विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया और तब से दुनिया अशिक्षा को समाप्त करने के लिए संकल्प के साथ अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर को हर साल मनाए जाने की परंपरा जारी है.

दुनिया में 75.7 करोड़ लोग आज भी लिखने और पढ़ने में अक्षम हैं.

शिक्षा पर वैश्विक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार ये ध्यान देने योग्य है कि हर 5 में से 1 पुरुष और दो-तिहाई महिलाएं अनपढ़ हैं.

दुनिया में सबसे कम साक्षरता दर 58.6% दक्षिण और पश्चिम एशिया में है.

6.07 करोड़ बच्चों को स्कूल की शिक्षा मयस्सर नहीं है.

इसके बाद अफ्रीका का नंबर है, जहां ये दर है.

बतादें प्रति 5 में से 1 वयस्क अशिक्षित है, इनमें दो तिहाई महिलाओ की आबादी है.

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क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

मानव विकास और समाज के लिये उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. इस बात से पीछे नहीं हटा जा सकता है कि सफलता और जीने के लिये साक्षरता महत्वपूर्ण है.

भारत में या देश-दुनिया में गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है. ये क्षमता सिर्फ साक्षरता में है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है. साक्षरता दिवस लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के मनाया जाता है.

जागरूकता की आवश्यकता

साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना- लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है. यह लोगों कमें अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के अनुसार दुनियाभर में चार अरब लोग साक्षर हैं और आज भी 1 अरब लोग पढ़- लिख नहीं सकते.

पूर्ण साक्षरता से दूर है भारत

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 127 देशों में 101 देश ऐसे हैं, जो पूर्ण साक्षरता हासिल करने से दूर है, जिनमें भारत शामिल है.

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