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कमाओ, ब्रेक लो, फिर काम करो... कैसे Gen-z ने बदल डाली करियर की पुरानी स्ट्रेटजी

हैरिस पोल के आंकड़ों के अनुसार 94 प्रतिशत जेन-जी चाहते हैं कि वे 55 साल से पहले आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो जाएं. इसके लिए वे साइड इनकम, फ्रीलांसिंग या निवेश जैसे विकल्पों के बारे में सोचते हैं. यानी उनकी सोच है, 'कमाओ, बचाओ, कुछ समय का ब्रेक लो और फिर आगे बढ़ो.'

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The 27 vs 37 Career Divide: Who Can Afford a Break From Work
The 27 vs 37 Career Divide: Who Can Afford a Break From Work

ये वो दौर नहीं जब लोग पढ़ाई के बाद करियर पर फोकस क‍िया करते थे. अब दौर है जब 27 साल की उम्र में कुछ लोग अपनी नौकरी से ब्रेक लेकर घूमने-फिरने या कुछ नया सीखने के प्लान बना रहे हैं. वहीं 37 साल की उम्र में कई लोग अभी भी अपनी जिम्मेदारियों और खर्चों को संभालने में लगे हैं.

नई दिल्ली की 27 वर्षीय आयशा कपूर ने जब अपनी डिजिटल एजेंसी की नौकरी छोड़ी तो वजह काम से असंतोष नहीं था. वह बस थोड़ा रुककर जिंदगी को जीना चाहती थीं. आयशा कहती हैं कि मैं 60 साल की उम्र तक दुनिया देखने का इंतजार नहीं करना चाहती. अगर अभी बचत करके कुछ समय का ब्रेक लिया जा सकता है, तो क्यों नहीं?. 

आयशा उन युवाओं में शामिल हैं जो 'माइक्रो रिटायरमेंट' का विकल्प चुन रहे हैं. इसका मतलब है करियर के बीच-बीच में कुछ समय का योजनाबद्ध ब्रेक लेना, ताकि ट्रेवल किया जा सके, नई चीजें सीखी जा सकें, स्किल बढ़ाई जा सके या मानसिक रूप से तरोताजा हुआ जा सके.

लेकिन हर किसी के लिए ऐसा करना आसान नहीं है. आज कई कार्यस्थलों पर देखा जा रहा है कि 27 साल के युवा अपने करियर के बीच ब्रेक लेने की योजना बना रहे हैं,  जबकि अभी भी 37 साल के लोग ऐसा करने की स्थिति में नहीं हैं.

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आंकड़े क्या कहते हैं

एचएसबीसी की एक वैश्विक सर्वे रिपोर्ट, जिसमें 10,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया, बताती है कि जेन-जी यानी नई पीढ़ी के लोग करियर में ब्रेक लेने के लिए ज्यादा तैयार हैं. सर्वे में करीब 63 प्रतिशत जेन-जी प्रतिभागियों ने कहा कि वे अपने जीवन में कम से कम एक बार करियर ब्रेक लेना चाहते हैं. उनके लिए यह ब्रेक पद या प्रमोशन से ज्यादा अनुभव और जीवन को प्राथमिकता देने का तरीका है.

भारत में किए गए एक सर्वे में भी पाया गया कि 64 प्रतिशत जेन-जी और 58 प्रतिशत मिलेनियल्स करियर में प्लांड ब्रेक को अच्छा मानते हैं. लेकिन मिलेनियल्स में वास्तव में ऐसा करने की योजना बनाने वालों की संख्या काफी कम है. इससे साफ है कि सोच बदल रही है, लेकिन हर कोई अपनी परिस्थितियों की वजह से उस पर अमल नहीं कर पाता.

जेन-जी का नजरिया

27 साल की फ्रीलांस डिजाइनर दित्शा कहती हैं कि मैं हर तीन साल में छह महीने का ब्रेक लेने की योजना बनाती हूं. उस समय मैं यात्रा करती हूं और नई चीजें सीखती हूं. यही मेरी करियर स्ट्रेटजी है. सॉफ्टवेयर इंजीनियर स्तुति पांडे (28) कहती हैं कि मेरे लिए ऊर्जा और आजादी पद या टाइटल से ज्यादा मायने रखते हैं. मैं काम भी करना चाहती हूं और जिंदगी भी जीना चाहती हूं. 

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27 साल की उम्र में कई लोगों के लिए माइक्रो रिटायरमेंट इसलिए संभव लगता है क्योंकि वे अभी अपने करियर की शुरुआत में होते हैं. साथ ही उन पर बड़ी आर्थिक जिम्मेदारियां नहीं होतीं. वे अपने काम और जीवन की योजना अलग तरीके से बनाते हैं. 

मिलेनियल्स की मुश्किलें

इसके उलट 30 के आखिर या 40 के आसपास की उम्र के कई लोग जिम्मेदारियों में घिरे महसूस करते हैं. मार्केटिंग मैनेजर अनुराग सिंह (38) कहते हैं कि मुझे भी करियर ब्रेक लेना अच्छा लगेगा, लेकिन घर का लोन, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्च हैं. यह मेरे लिए एक तरह की लग्जरी है.

आईटी प्रोफेशनल रवि (40) कहते हैं कि अगर मैं लंबा ब्रेक लेता हूं तो मेरी बचत और करियर की गति दोनों पर असर पड़ेगा. अभी ऐसा करना संभव नहीं है.  मिलेनियल्स अक्सर कहते हैं कि वे 'करियर में फंसा हुआ' महसूस करते हैं. वजह यह नहीं कि वे ब्रेक नहीं लेना चाहते, बल्कि यह कि उनकी जिम्मेदारियां उन्हें ऐसा करने नहीं देतीं.

क्यों जेन-जी के लिए ब्रेक लेना आसान

सबसे बड़ा कारण आर्थिक स्थिति है.  जेन-जी (लगभग 27 साल) करियर की शुरुआत में होते हैं. इन पर आर्थिक जिम्मेदारियां कम होती हैं और कर्ज का बोझ कम होता है. 

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वहीं मिलेनियल्स (37–40 साल) वालों के सामने घर का लोन, बच्चों की पढ़ाई जैसी जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए उनके लिए करियर स्व‍िच करना तक चैलेंजिंग होता है. इनके पास ज्यादा खर्च के अलावा परिवार और करियर दोनों की जिम्मेदारी होती है. 

SEEK के एक सर्वे में पाया गया कि 30-40 साल की उम्र के लोग बड़े करियर बदलाव कम करते हैं. वजह इच्छा की कमी नहीं, बल्कि आर्थिक जोखिम है.

27 साल की पीढ़ी की सोच

आज के युवा वेतन से ज्यादा काम और जीवन के संतुलन को महत्व दे रहे हैं. हाल के आंकड़ों के मुताबिक 76 प्रतिशत युवा कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस सैलरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है. वहीं 75 प्रतिशत से ज्यादा लोग लचीले कामकाजी माहौल को पसंद करते हैं, जिससे माइक्रो रिटायरमेंट जैसी योजनाएं संभव हो पाती हैं.

जल्दी आर्थिक स्वतंत्रता की चाह

हैरिस पोल के आंकड़ों के अनुसार 94 प्रतिशत जेन-जी चाहते हैं कि वे 55 साल से पहले आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो जाएं. इसके लिए वे साइड इनकम, फ्रीलांसिंग या निवेश जैसे विकल्पों के बारे में सोचते हैं. यानी उनकी सोच है, 'कमाओ, बचाओ, कुछ समय का ब्रेक लो और फिर आगे बढ़ो.'

काम और जिंदगी को देखने का नया नजरिया

करियर कोच सुनीता भाटिया कहती हैं कि जेन-जी के लिए करियर और जिंदगी दो अलग चीजें नहीं हैं. वे दोनों को साथ-साथ देखना चाहते हैं. इसलिए वे अभी अनुभव लेना चाहते हैं और मानते हैं कि बाद में आर्थिक रूप से संभल सकते हैं. हालांकि वो यह भी कहती हैं कि 30 के आखिर और 40 की उम्र में पहुंचने वाले लोगों के लिए जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं, इसलिए उनके पास उतनी आजादी नहीं होती.

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कार्यस्थलों में क्या बदलाव हो रहे हैं

जैसे-जैसे युवा कर्मचारी काम और जीवन के संतुलन की मांग कर रहे हैं, कंपनियां भी धीरे-धीरे बदलाव कर रही हैं.  कई संस्थाएं अब नीचे दी जा रही इन सुविधाओं पर विचार कर रही हैं. 

लचीला सैबेटिकल और रिमोट वर्क
ब्रेक के बाद दोबारा नौकरी में वापसी की व्यवस्था
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी छुट्टियां

हालांकि उम्रदराज कर्मचारियों के लिए यह बदलाव अभी भी सीमित हैं.

काम और जिंदगी को लेकर नई सोच

27 साल की उम्र में कई लोग पूछ रहे हैं, 'जिंदगी जीने के लिए 60 साल तक इंतजार क्यों करें?'  वहीं 37 साल की उम्र में कई लोग कहते हैं, 'हम भी ब्रेक लेना चाहते हैं, लेकिन अभी संभव नहीं है.'  आज माइक्रो रिटायरमेंट सिर्फ एक ट्रेंड नहीं है. यह इस बात की झलक भी है कि नई पीढ़ी काम, समय और जीवन को किस नजर से देख रही है और कैसे आर्थिक वास्तविकताएं भी इस सोच को प्रभावित करती हैं.

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