अक्सर कहा जाता है कि 'पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होगे खराब'. लेकिन बिहार की एक बेटी ने इस कहावत को पूरी तरह से पलट दिया है. हम बात कर रहे हैं श्रेयसी सिंह की, जो न सिर्फ जमुई की लोकप्रिय विधायक और अब बिहार सरकार की मंत्री हैं, बल्कि देश की एक दिग्गज शूटर भी हैं. श्रेयसी की कहानी उन युवाओं के लिए एक शानदार सबक है जो पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
दिल्ली के टॉप संस्थानों से हुई शिक्षा
श्रेयसी सिंह की एकेडमिक नींव बहुत मजबूत रही है. उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), आर.के. पुरम से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर हंसराज कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की. पढ़ाई के प्रति उनका लगाव यहीं नहीं रुका, उन्होंने MBA की डिग्री भी हासिल की और मीडिया की बारीकियां समझने के लिए जर्नलिज्म का डिप्लोमा भी किया.
जब शूटिंग रेंज में लहराया तिरंगा
श्रेयसी की असली पहचान तब बनी जब उन्होंने शूटिंग की डबल ट्रैप स्पर्धा में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया. कॉमनवेल्थ गोल्ड 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा. उनकी खेल प्रतिभा को देखते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
बता दें कि श्रेयसी के खून में ही राजनीति है. उनके पिता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह और मां पुतुल कुमारी, दोनों ही बड़े कद के राजनेता रहे हैं. लेकिन श्रेयसी ने अपनी पहचान खुद बनाई. जमुई से विधायक बनकर और अब कैबिनेट में मंत्री का पद संभालकर उन्होंने साबित किया कि वे सिर्फ 'बेटी' के रूप में नहीं, बल्कि एक सक्षम 'लीडर' के रूप में मैदान में हैं.
अब श्रेयसी का लक्ष्य जमुई और बिहार के युवाओं के लिए खेल सुविधाओं को बेहतर बनाना है. वे चाहती हैं कि बिहार का हर बच्चा जो खेल में रुचि रखता है, उसे सही ट्रेनिंग और शिक्षा मिल सके. वे खेल (Sports) और IT जैसे विभागों के जरिए बिहार की नई तस्वीर गढ़ने में जुटी हैं.