जब भी आप किसी जॉब के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं, तो अक्सर लगता है कि भारी-भरकम शब्दों और लंबी स्क्रिप्ट की जरूरत होती है. हम घंटों तक अपने बारे में कुछ बताइए जैसे सवालों के जवाब रटते हैं, ताकि सामने वाले को प्रभावित कर सकें. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी आपकी यह परफेक्ट तैयारी ही आपके और नौकरी के बीच की दीवार बन जाती है? रेडिट पर एक यूजर ने अपनी सफलता का एक ऐसा राज साझा किया है जिसने इंटरव्यू के पुराने तरीकों को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने साबित किया कि एक परफेक्ट इंटरव्यू के लिए आपको रोबोट बनने की जरूरत नहीं बल्कि सिर्फ एक इंसान की तरह बात करने की कला आनी चाहिए.
'अपने बारे में बताओ' का सामना करना हर इंटरव्यू देने वाले लोगों के लिए किसी चैलेंज से कम नहीं हैं. हालांकि, इस जवाब को केवल 30 सेकंड में देना भी किसी कला से कम नहीं.
असफलता के बाद इस प्लानिंग से मिली सफलता
यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि महीनों की असफलता के बाद उन्होंने अपनी प्लानिंग में एक छोटा सा बदलाव किया. उन्होंने रोबोट की तरह रटे-रटाए जवाब देना के बजाय अपने जवाब को बात की तरह रखने की कोशिश की जिसमें उसे सफलता मिली. इस बदलाव का जादू ऐसा चला कि उन्हें दोबारा बुलाए जाने यानी कॉल बैक की संभावना कई गुना बढ़ गई. उन्होंने महसूस किया कि जब आप एक लंबी और एक ही तरह की बातें बोलते हैं तो इंटरव्यूअर भी थक जाता है. इसके बजाय उन्होंने अपने जवाब को छोटा, सटीक और थोड़ा सस्पेंस वाला रखा ताकि इंटरव्यूअर के मन में अगला सवाल पूछने की जिज्ञासा जगे.
लंबे जवाब कर देते हैं बोर
बात तब बदली जब मेरी मुलाकात एक ऐसी दोस्त से हुई जो खुद हायरिंग करती है. उसने एक ऐसी बात कही जिसने सोचने का नजरिया ही बदल दिया. उसने बताया कि इंटरव्यू लेने वाले दिन भर में सैकड़ों उम्मीदवारों से मिलते हैं और हर कोई वही घिसे-पिटे, रटे-रटाए जवाब देता है. जब कोई उम्मीदवार लंबे और बोरिंग इंट्रो देना शुरू करता है, तो इंटरव्यूअर का ध्यान भटकने लगता है. उन्होंने आगे कहा कि अगर आप सच में भीड़ से अलग दिखना चाहते हैं, तो बातचीत की शुरुआत में ही कुछ ऐसा कहें जो थोड़ा अलग और सरप्राइज देने वाला हो. यह सुनकर मुझे अहसास हुआ कि मैं अब तक जो कर रहा था, वह सिर्फ वक्त की बर्बादी थी. इस एक छोटी सी बातचीत ने मुझे अपने पूरे तरीके पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया.
30 सेकंड का इनफ
अपनी प्लानिंग को पूरी तरह से बदलने के बाद उन्होंने लंबी-चौड़ी भूमिका बांधना बंद कर दिया. उनका परिचय 1.5 मिनट की जगह महज 30 सेकंड का रह गया. उन्होंने अपनी बातों को कम शब्दों में मौजूदी के साथ रखा. लेकिन असली मास्टरस्ट्रोक उन्होंने जवाब के आखिर में चला. आमतौर पर एक सवाल का जवाब देने के बाद चुप हो जाते हैं पर उन्होंने पासा पलट दिया. अपना परिचय खत्म करते ही उन्होंने कंपनी या टीम से जुड़ा एक समझदारी भरा सवाल पूछ लिया.
दो महीने में तीन गुना
इस छोटे बदलाव से इंटरव्यू का माहौल पूरी तरह बदल गया. पहले जहां जवाब एकतरफा होता था, अब वह बातचीत जैसा बन गया. उम्मीदवार के अनुसार, इंटरव्यू लेने वाले भी ज्यादा उत्साहित हो जाते हैं क्योंकि लोग इंटरव्यू को बातचीत की तरह करते हैं. नतीजा यह हुआ कि दो महीनों में उसे पहले के मुकाबले तीन गुना ज्यादा दूसरे राउंड के कॉल मिले.