जॉब सेक्टर में काफी बदलाव हो रहा है और एआई के आने से कई नौकरियों पर संकट गहराता जा रहा है. एआई के आने से कई नौकरियों पर सकंट है जबकि कई नौकरियों के मार्केट में आने की रिपोर्ट सामने आ रही है. लेकिन, ये वक्त एंट्री लेवल जॉब्स कर रहे या नौकरी खोज रहे लोगों के लिए काफी मुश्किल है. कुछ वक्त से इन लोगों पर ही ज्यादा असर पड़ा है. बताया जा रहा है कि एंट्री लेवल जॉब्स में करीब 29 फीसदी तक की गिरावट आई है. ऐसे में जानते हैं कि नौकरियों का बाजार कैसे बदल रहा है और एआई जॉब्स पर कितना असर डाल रहा है...
अगर साल 2025 की बात करें तो लेबर मार्केट में एंट्री लेवल की नौकरियां पाने के इच्छुक उम्मीदवारों को काफी मुश्किल हुई. दरअसल, इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पढ़ाई खत्म की और नौकरियां खोजनी शुरू की, लेकिन उन्हें नौकरी के अवसर काफी कम मिले. रैंडस्टैड की ओर से दुनियाभर में 12.6 करोड़ नौकरियों पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, जनवरी 2024 से शुरुआती स्तर की नौकरियों में 29% की गिरावट आई है. जो मंदी पहले अस्थायी लग रही थी, अब वह तेजी से संरचनात्मक होती जा रही है.
अगर अमेरिका की बात करें तो जुलाई में युवा बेरोजगारी दर 10.8% तक पहुंच गई, जो समग्र 4.3% दर से दोगुने से भी अधिक है. एशिया और अफ्रीका में, आंकड़े और भी चिंताजनक हैं - भारत में 17%, चीन में 16.5% और मोरक्को में लगभग 36%. ब्रिटेन में साल 2024 में करीब 17,000 शुरुआती पदों के लिए 1.2 करोड़ ग्रेजुएट्स ने अप्लाई किया था.
सिर्फ AI ही नहीं है नौकरी जाने की वजह
कई रिपोर्ट्स में ये सामने आया है कि एआई की वजह से नौकरियों पर संकट बन रहा है. लेकिन, वर्ल्ड इकोनॉनिक फोरम की रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरियों की संख्या कम होने की वजह सिर्फ एआई नहीं है. इसके अलावा कॉर्पोरेट हायरिंग स्लोडाउन, आर्थिक अनिश्चितता जैसे भी कुछ कारण इसके लिए जिम्मेदार है. ऐसे में अब Gen-Z अप्रेंटिसशिप और वॉकेशनल ट्रेनिंग की ओर बढ़ रहे हैं.
कैसा है भविष्य?
जनवरी में ही आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2030 तक 78 मिलियन नई जॉब आने की उम्मीद है. 22 फीसदी मौजूदा नौकरियां संरचनात्मक बदलाव से गुजरेंगी. 85 फीसदी कंपनियां नए स्किल सीखाने पर जोर दे रही है. इसमें अधिकतर कंपनियां एआई स्किल देने पर जोर देने रही है.
एआई फर्म एंथ्रोपिक की एक रिपोर्ट में 49 फीसदी नौकरियों में अब कम से कम एक चौथाई कामों में एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है. 2025 से अब तक इसमें 13 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. एआई का इस्तेमाल अक्सर उन कामों में ज्यादा किया जाता है, जिनके लिए अर्थव्यवस्था में औसत से उच्च स्तर की शिक्षा की आवश्यकता होती है, जैसे कि सॉफ्टवेयर डवलपमेंट.