आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) एक बार फिर अपने वर्कफोर्स में बड़ी कटौती की तैयारी कर रही है. खबर है कि कंपनी करीब 4,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है. हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ कंपनी छंटनी की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ इसी साल 20,000 फ्रेशर्स (नए छात्र) को भर्ती करने का प्लान भी है.
क्यों हो रही है छंटनी?
कॉग्निजेंट में बदलाव की यह बयार 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) और लागत घटाने (Cost Control) की कोशिशों से जुड़ी है. कंपनी खुद को भविष्य के लिए तैयार कर रही है, जहाँ ऑटोमेशन का बोलबाला होगा. 'मिंट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कटौती कंपनी के ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 1 प्रतिशत हो सकती है.
क्या है प्रोजेक्ट लीप जो बना खतरा?
कंपनी के भीतर 'प्रोजेक्ट लीप' नाम का एक प्रोग्राम चल रहा है. इसका मकसद डिजिटल सेवाओं और AI आधारित कामों को मजबूत करना है. कंपनी इस प्रोजेक्ट पर करोड़ों डॉलर खर्च कर रही है, लेकिन साथ ही साल के अंत तक करोड़ों की बचत का लक्ष्य भी रखा है. जानकारों का कहना है कि अब बड़ी टीमों के बजाय ऑटोमेटेड सिस्टम और AI पर भरोसा बढ़ाया जा रहा है. यही वजह है कि कंपनी अब पुराने रोल्स को कम करके एंट्री-लेवल पर नई प्रतिभाओं को तरजीह दे रही है.
सीईओ रवि कुमार के कार्यकाल में दूसरी बड़ी कटौती
मार्च 2026 तक कॉग्निजेंट में कुल कर्मचारियों की संख्या 3,57,600 थी. यह सीईओ एस. रवि कुमार के नेतृत्व में छंटनी का दूसरा बड़ा दौर हो सकता है. इससे पहले भी करीब 3,500 पदों को खत्म किया गया था, जिसका असर ज्यादातर उन लोगों पर पड़ा था जो सीधे तौर पर प्रोजेक्ट्स का हिस्सा नहीं थे.
सिर्फ तकनीक ही नहीं, खर्चों पर भी लगाम
एवरेस्ट ग्रुप के एक्सपर्ट पीटर बेंडर-सैमुअल का मानना है कि कंपनियां सिर्फ तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि खर्च बचाने के लिए भी ऐसे कदम उठा रही हैं. यात्रा जैसे अतिरिक्त खर्चों में कटौती की जा रही है और AI से होने वाले बदलावों के बीच खुद को ढालने की कोशिश हो रही है.