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पीसीआर: चाकू के 36 वार, आंखों के सामने डबल मर्डर

वो चीखता रहा. वो मदद के लिए गुहार लगाता रहा. जान की भीख मांगता रहा. लेकिन उसके सिर पर तो खून सवार था. वो लगातार चाकू से वार करता जा रहा था. ना कोई रहम. ना कोई मुरव्वत. बीच गली में चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर रहा था. पूरी गली के लोग दम साधे तमाशा देख रहे थे. किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई. कोई बचाने के लिए नहीं आया. बदमाश बेखौफ होकर चाकू से मारता रहा. फिर बड़ी आसानी से हमलावर बुजदिलों के मुहल्ले से भाग निकला. जमीन पड़ा शख्स खून से लथपथ था. पेट की आंतें बाहर आ चुकी थी. अब भी मदद की गुहार लगा रहा था. लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया. एक शख्स हिम्मत कर आगे बढ़ा तो एक महिला से उसे रोक दिया. आखिर ये कैसी इंसानियत है. ये कैसी दिल्ली है.

He kept shouting. He continued to pray for help. Keep begging for life. He was constantly stabbed with a knife. No mercy. No one else In the middle of the street, with a knife, there was a sudden attack. The people of the whole street were looking at a simple spectacle. Nobody dared show up. No one came to save. The scoundrel was unknowingly beaten with a knife. Again, the attacker easily escaped. The man lying on the ground was soaked with blood. The gut of the stomach had come out. Still looking forward to help. But no one came forward to help If a man goes ahead with courage, then stop him from a woman. After all what kind of humor it is. What is this Delhi.

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