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आजादी के बाद सबसे बड़ा सैन्य सुधार: भारत में बनेंगी 3 थिएटर कमांड, चीन-पाक सीमा पर एक ही कमांडर के नीचे लड़ेंगी तीनों सेनाएं

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि थिएटर कमांड तीनों सेनाओं की संयुक्तता और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन का अंतिम चरण हैं. उन्होंने साफ किया कि यह आत्मनिर्भर भारत अभियान से अलग है. थिएटर कमांड का मकसद युद्ध संचालन को एकीकृत करना है, जबकि आत्मनिर्भर भारत का फोकस रक्षा निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर है.

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CDS अनिल चौहान ने कहा कि तीनों सेनाओं की संयुक्त लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए थिएटर कमांड अहम है (Photo: PTI)
CDS अनिल चौहान ने कहा कि तीनों सेनाओं की संयुक्त लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए थिएटर कमांड अहम है (Photo: PTI)

भारत के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी CDS यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया कि थिएटर कमांड यानी तीनों सेनाओं को एक साथ काम करने का नया ढांचा भारत की सैन्य ताकत में सबसे बड़ा बदलाव होगा. यह देश की आजादी के बाद से अब तक का सबसे बड़ा सैन्य सुधार माना जा रहा है.

अभी भारत में तीनों सेनाएं यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना अलग-अलग काम करती हैं. इनके अपने-अपने अलग मुख्यालय और कमांड होते हैं. इस वक्त भारत में कुल 17 ऐसी अलग-अलग कमांड हैं. लेकिन थिएटर कमांड के तहत तीनों सेनाएं एक साथ एक ही कमांडर के नीचे काम करेंगी. यानी एक ही नेता होगा जो एक तय भौगोलिक इलाके में जमीन, हवा और समुद्र में एक साथ लड़ाई का जिम्मा संभालेगा.

तीन थिएटर कमांड कौन सी होंगी?

जनरल चौहान ने तीन सेना प्रमुखों के साथ मिलकर तीन थिएटर कमांड का एक ढांचा तैयार किया है। पहली, नॉर्दर्न यानी उत्तरी थिएटर कमांड जो चीन की सीमा से जुड़े इलाकों को देखेगी. दूसरी, वेस्टर्न यानी पश्चिमी थिएटर कमांड जो पाकिस्तान की सीमा से जुड़े इलाकों को देखेगी. 

तीसरी, मैरिटाइम थिएटर कमांड जो समुद्री सुरक्षा देखेगी. यह प्रस्ताव अब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी देश की सबसे बड़ी सुरक्षा समिति के पास मंजूरी के लिए है.

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फोर्स एप्लीकेशन और फोर्स जनरेशन क्या है?

जनरल चौहान ने बताया कि थिएटर कमांड बनने से दो काम अलग-अलग हो जाएंगे. पहला काम है फोर्स एप्लीकेशन यानी लड़ाई लड़ना. यह काम थिएटर कमांडर का होगा जो अपने तय इलाके में लड़ाई की पूरी जिम्मेदारी लेगा. दूसरा काम है फोर्स जनरेशन यानी सेना बनाना, उन्हें ट्रेनिंग देना और तैयार रखना. यह काम अलग-अलग सेना प्रमुखों के पास रहेगा. इससे दोनों काम ज्यादा कुशलता से होंगे.

यह भी पढ़ें: दुश्मन सेना के दांत खट्टे करेंगे तीन थिएटर कमांड, सेना ने फाइनल प्लान राजनाथ सिंह को भेजा

मल्टी-डोमेन ऑपरेशन क्या है?

आज की लड़ाई सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र में नहीं होती. इसमें साइबर यानी इंटरनेट पर हमले, अंतरिक्ष में उपग्रहों पर हमले और AI का भी इस्तेमाल होता है. इन सभी जगहों पर एक साथ लड़ने को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन कहते हैं. थिएटर कमांड इसी के लिए बनाई जा रही है.

आत्मनिर्भर भारत से यह कैसे अलग है?

जनरल चौहान ने साफ किया कि थिएटर कमांड और आत्मनिर्भर भारत दोनों अलग-अलग चीजें हैं. आत्मनिर्भर भारत का मतलब है देश में ही हथियार और रक्षा उपकरण बनाना यानी मेक इन इंडिया. यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है. जबकि थिएटर कमांड सिर्फ सेना के अंदर का ढांचागत बदलाव है जिसका मकसद लड़ाई को ज्यादा कारगर बनाना है.

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यह इतना बड़ा बदलाव क्यों है?

अभी तक तीनों सेनाएं साथ काम तो करती हैं लेकिन हर एक की अपनी कमान है. जब कोई बड़ा संकट आता है तो तालमेल बिठाने में वक्त लगता है. थिएटर कमांड से एक ही कमांडर के हाथ में सब कुछ रहेगा और फैसले तेज होंगे. जनरल चौहान इसे 'जॉइंटनेस 2.0' कह रहे हैं यानी सिर्फ मिलकर काम करना नहीं बल्कि पूरी तरह एक हो जाना.

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