scorecardresearch
 

बिहारः 5 दिन से बंद हैं दुकानें, आखिर क्यों सहमा हुआ है नौबतपुर?

बिहार की राजधानी पटना से महज 15 किलोमीटर दूर नौबतपुर एक जगह है, जहां इन दिनों खौफ और आतंक का राज कायम है. पांच दिन पहले इलाके में रंगदारी के लिए हुई गोलीबारी की वजह से स्थानीय दुकानदार बेहद खौफजदा है. यहीं वजह है कि वारदात के बाद से नौबतपुर की दुकानें बंद हैं और बाजार सन्नाटे से पसरा हुआ है.

Advertisement
X
नौबतपुर में पिछले 5 दिनों से बंद पड़ा बाजार
नौबतपुर में पिछले 5 दिनों से बंद पड़ा बाजार

बिहार की राजधानी पटना से महज 15 किलोमीटर दूर नौबतपुर एक जगह है, जहां इन दिनों खौफ और आतंक का राज कायम है. पांच दिन पहले इलाके में रंगदारी के लिए हुई गोलीबारी की वजह से स्थानीय दुकानदार बेहद खौफजदा है. यहीं वजह है कि वारदात के बाद से नौबतपुर की दुकानें बंद हैं और बाजार सन्नाटे से पसरा हुआ है.

आपको 1996 में आई फिल्म घातक तो याद होगी, उसमें कातिया नाम के बदमाश की दहशत से दुकानदार जमीन खाली करने के लिए अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर हो जाते हैं. ऐसा ही कुछ हाल इन दिनों नौबतपुर में देखने को मिल रहा है. स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, बीते मंगलवार कुछ अपराधियों ने इलाके की एक मिठाई की दुकान में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की और फिर पिस्तौल लहराते हुए वहां से निकल गए. यह फायरिंग दुकान मालिक से रंगदारी मांगे जाने को लेकर की गई थी. इस मामले में शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है.

Advertisement

दुकानदारों की मानें तो पुलिस के पास वारदात का सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बदमाशों ने दिनदहाड़े किस तरह से दुकान में घुसकर गोलीबारी की थी. दुकानदारों का आरोप है कि मामले को रफा-दफा करने के लिए पुलिस ने गुड्डू नाम के एक बदमाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. माना जा रहा है कि अपराधियों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है, यही वजह है कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है. दुकानदारों का कहना है कि यहां अपराधियों के कई गुट हैं, जो आए दिन उनसे रंगदारी की मांग करते हैं और रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देते हैं. दुकानदारों की मांग है कि जब तक पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाएगी, तब तक वह लोग अपनी दुकानें नहीं खोलेंगे.

वहीं इस मामले में पुलिस ने दलील दी कि प्रकाश पर्व में व्यस्तता के कारण वह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाए. इस मामले में 2 नामजद सहित कुल 9 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. पुलिस अधिकारियों ने दुकानदारों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. जाहिर है एफआईआर लिखे जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यशैली पर तो सवाल खड़े करता ही है, साथ ही पुलिस की विश्वनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है.

Advertisement
Advertisement