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गुजरातः बोझ लगने लगी थी बीमार मां, चौथी मंजिल से फेंक कर मार डाला

गुजरात में हत्या का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कलयुगी बेटे ने परेशान होकर अपनी बीमार मां को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया. बूढ़ी लाचार मां ने नीचे गिरते ही दम तोड़ दिया. बेटा यहीं नहीं रुका. उसने इस मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की. लेकिन एक सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की सख्ती ने कातिल बेटे की करतूत से पर्दा उठा दिया.

पुलिस ने कातिल बेटे संदीप को गिरफ्तार कर लिया है पुलिस ने कातिल बेटे संदीप को गिरफ्तार कर लिया है

गुजरात में हत्या का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कलयुगी बेटे ने परेशान होकर अपनी बीमार मां को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया. बूढ़ी लाचार मां ने नीचे गिरते ही दम तोड़ दिया. बेटा यहीं नहीं रुका. उसने इस मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की. लेकिन एक सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की सख्ती ने कातिल बेटे की करतूत से पर्दा उठा दिया.

दरअसल, गुजरात के राजकोट का एक वीडियो सामने आया है. जिसमें एक बेटा अपनी बूढ़ी लाचार मां को सीढियों पर घसीटते हुए छत पर ले जा रहा है. बैकग्राउंड में बूढ़ी महिला की बहू भी दिख रही है. बेटा अपनी मां को छत पर ले जाता है और फिर कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाता है. इसके बाद बेटा लौटता है. लेकिन उसकी बूढ़ी मां उसके साथ नहीं लौटती.

बेटा आराम से अपने घर के अंदर चला जाता है. उसकी मां फिर भी नहीं लौटती. इसके बाद जो होता है. वो जानकर आपके पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी. आपके मुंह से निकलेगा कि भगवान बचाए ऐसे बेटे से. लेकिन बेटे ने अपनी मां के साथ जो किया है. उसके लिए उसे भगवान भी माफ नहीं करेगा.

बात 27 सितंबर 2017 की है. सुबह के करीब साढ़े 8 बजे थे. वीडियो में एक असहाय बुजुर्ग महिला दिख रही है. उस बुजुर्ग महिला का बेटा उसे चप्पल पहना रहा है. और किनारे पर खड़ी बुजुर्ग महिला की बहू है, जो ये सब देख रही है. चप्पल पहनाने के बाद बेटा अपनी लाचार मां को लगभग घसीटते हुए सीढ़ियां चढ़ाने लगता है. मां के पैरों में चप्पलें हैं. बेटा नंगे पैर है. बेटा अपनी मां को लेकर छत पर चला जाता है. और उसकी बीवी घर के अंदर चली जाती है.

8 बजकर 57 मिनट कुछ सेकेंड पर बेटा छत से उतरता है. उसके पैरों में चप्पल हैं जबकि अपनी मां को ले जाते वक्त वो नंगे पैर था. चप्पल उतारकर बेटा घर के अंदर चला जाता है. उसकी बुजुर्ग मां नहीं लौटती. कुछ देर बाद एक शख्स भागता हुआ सीढ़ियां चढ़ता है. डोर बेल बजाता है. बुजुर्ग महिला का बेटा दरवाजा खोलता है. दोनों के बीच कुछ बात होती है. इसके बाद बेटा आराम से सीढ़ियां उतरता है. पीछे पीछे उसकी बीवी भी बाहर आती है.

उसके बाद पुलिस को ख़बर दी जाती है कि संदीप नामक शख्स की माता टेरेस से गिरकर गुजर गईं हैं. इस केस को शुरुआती तौर पर एक्सीडेंटल डेथ माना गया. मगर सवाल ये था कि एक बुजुर्ग महिला जो अपने आप चप्पल भी नहीं पहन सकती. जो सीढ़ियां नहीं चढ़ सकती. जिसे उसका बेटा बड़े जतन के साथ छत पर लेकर गया था. वो दुर्घटनावश छत से गिर जाए. ऐसा हो सकता है.

लेकिन इस केस में ऐसा कुछ था. जिसने पुलिस को शक करने पर मजबूर कर दिया. राजकोट के डीसीपी करनराज के मुताबिक उन्हें इस मौत पर पहले से डाउट था. क्योंकि मृतक महिला जयश्री 4 से 14 सितंबर तक ब्रेन हेमरेज की वजह से बेड पर थीं. सपोर्ट लेती थीं. टेरेस पर जाना. 10 फुट चलकर जाना और फिर छत से 4 फुट की दीवार कूदना पॉसिबल नहीं था.

यहीं से पुलिस को शक हुआ तो उसने जांच शुरु की. जांच शुरु की तो सबसे पहले पुलिस ने इस सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और फिर इस सीसीटीवी वीडियो से जो सच सामने आया. वो हमारे समाज का आईना है, जिसमें अपनी बुजुर्ग मां के कातिल बेटे का चेहरा झांक रहा था.

डीसीपी ने बताया कि उन्होंने सीसीटीवी फुटेज चेक किए. टाइमिंग लिया. चप्पल भी बेटे ने पहनाए थे. चौथे माले से सीढ़ी चढ़ने में 7-8 मिनट लगे. 8.56 पर बुजुर्ग महिला मौत हुई. उस समय बेटे की टेरेस पर प्रेजेंस थी. तीसरे माले के घर में गया. इसी शक के आधार पर पुलिस ने संदीप से पूछताछ शुरू की.

पहले संदीप पुलिस को टहलाता रहा लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया और उसने जो बताया उसे जानकर पुलिस भी हैरान थी. वो अपनी लाचार मां को छत पर ले जाने के इतने जतन इसलिए कर रहा था. ताकि छत से धक्का देकर अपने कंधे से बूढ़ी मां का बोझ उतार सके और उसकी पत्नी को अपनी बीमार सास की देखभाल की ड्यूटी से छुटकारा मिल जाए.

पुलिस के मुताबिक संदीप घर का इकलौता बेटा था उसकी दो बहने हैं. एक शादीशुदा और एक की शादी नहीं हो रही थी. इसलिए घर में टेंशन थी. बेटे और वाइफ के साथ बूढ़ी मां के झगड़े होते थे. इसलिए उसने मां को छत से धक्का देकर मार डाला.

इस तरह अपनी मां के कातिल बेटे का चेहरा दुनिया के सामने आ गया. जिस मां ने अपने बेटे को अच्छा इंसान बनाने के लिए ना जाने कितने दुख सहे होंगे. उस बेटे को अपनी बीमार मां की देखभाल करना इतना नागवार गुजरा कि उसे अपनी मां को छत से फेंककर मारते वक्त जरा भी दया नहीं आई.

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