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बिजनौर: पुलिस पर घरों में घुसकर तोड़फोड़ का आरोप, गांववाले बोले- महिलाओं, बच्चों से भी बदसलूकी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएए पर हुई हिंसा के बाद पुलिस ने उनके घरों में तोड़फोड़ की. इसके अलावा, महिलाओं को परेशान किया गया जबकि बच्चों को धमकियां दी गईं.

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बिजनौर में भड़की हिंसा के बाद पुलिस पर लगा घरों में तोड़फोड़ का आरोप
बिजनौर में भड़की हिंसा के बाद पुलिस पर लगा घरों में तोड़फोड़ का आरोप

  • बिजनौर के नेहटौर इलाके में भड़की थी हिंसा
  • पुुलिसवालों पर लगा बदसलूकी और तोड़फोड़ का आरोप

यूपी के बिजनौर जिले के नेहटौर इलाके में रहने वाले कई परिवारों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है. लोगों का कहना है कि नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद उन्हें घर छोड़ कर भागने को मजबूर कर दिया गया. बता दें कि  पुलिस ने इस मामले में 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. 60 को आरोपी बनाया गया है और 3000 से अधिक अज्ञात व्यक्तियों का नाम एफआईआर में लिया गया है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के बाद परिवार के पुरुष सदस्यों की तलाश में आई पुलिस ने उनके घरों में तोड़फोड़ की. इसके अलावा, महिलाओं को परेशान किया गया जबकि बच्चों को धमकियां दी गईं. आज तक ने ऐसे दो घरों का दौरा किया.

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टूटा मिला घरों में रखा सामान

एक घर में वॉशबेसिन, बाथरुम, बेड, फर्नीचर, फ्रिज, बर्तन और अन्य सामान टूटे हुए थे. जब आज तक की टीम ने एक पड़ोसी से यह पूछा कि यहां क्या हुआ था तो उन्होंने बताया, "8-10 पुलिस वाले हमारे परिवार के पुरुष सदस्यों के बारे में पूछते हुए आए थे. उन लोगों ने हमें अपशब्द कहे, महिलाओं को परेशान किया और बच्चों को धमकी दी."

नाम न छापने की शर्त पर पड़ोसी ने कहा, "पुलिस ने शुक्रवार को हुई हिंसा से संबंधित एफआईआर में 3000 से अधिक अज्ञात लोगों का उल्लेख किया है. अगर उन्हें पता चलता है कि मैंने बात की है, तो मेरे परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जाएगा, पीटा जाएगा और उनको फंसा दिया जाएगा."

उसी इलाके में 5 अन्य घरों में ताला लगा हुआ था और पड़ोसियों की मानें तो परिवारों ने इस डर से अपने घरों को छोड़ दिया है कि पुलिस उनके साथ दुर्व्यवहार करेगी.

कुछ ही मीटर की दूरी पर, एक अन्य घर में, टीवी सेट, बाथरूम, किराने का सामान, बर्तन, फर्नीचर और अन्य सामान टूटे हुए मिले. इस तोड़फोड़ के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया गया है.

महिलाओं, बच्चों से बदसलूकी का आरोप

एक स्थानीय निवासी ने कहा, "जिस तरीके से उन लोगों ने महिलाओं और बच्चों के साथ बर्ताव किया और घरों में तोड़फोड़ की, लोग पुलिस के ऐसे व्यवहार से डरे हुए हैं. पुलिस ने हजारों अज्ञातों का नाम अपनी एफआईआर में दर्ज कर रखा है अब परिवारों को इस बात का डर सता रहा है कि अगर उन्होंने पुलिस के खिलाफ बात की तो उनका नाम दर्ज कर लिया जाएगा और गिरफ्तार कर लिया जाएगा."

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शुक्रवार को हुई थी हिंसा

लेकिन पड़ोस की मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद अचानक ही स्थिति बदल गई. शख्स ने बताया, "लोग मस्जिद से निकले तो पुलिस ने उन्हें घर जाने के लिए कहा. लोग जा ही रहे थे तभी एक स्थानीय व्यक्ति और एक पुलिसकर्मी के बीच बहस होने लगी और स्थिति नियंत्रण के बाहर होती चली गई."

बता दें कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के दौरान हुई फायरिंग में 21 वर्षीय अनस और 20 साल के सुलेमान घायल हुए थे. दोनों को एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां पहुंचने पर अनस को मृत घोषित कर दिया गया जबकि सुलेमान की इलाज के दौरान मौत हो गई.

7 महीने के बेटे के लिए दूध लेने निकला था अनस

अनस का बेटा अभी सिर्फ 7 महीने का है और वह घर से अपने बच्चे के लिए दूध लेने के लिए निकला था. अनस के पिता ने अरशद हुसैन ने बताया, "वह जैसे ही घर पहुंचा उसकी पत्नी ने बेटे के लिए दूध मांगा था. वह तुरंत अपने चाचा के घर के लिए निकला था जो मुश्किल से 50 मीटर दूर है तभी कुछ लोग कहते नजर आए कि काला कोट पहने एक युवा पुलिस की गोली का शिकार हो गया. मैं भागा और देखा कि मेरा अनस पुलिस की फायरिंग के बीच सड़क पर पड़ा था. मैंने उसे खींचा और उसे अस्पताल ले गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी."

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अनस सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों में कॉफी और अन्य पेय पदार्थों की सप्लाई करता था. उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड भी नहीं था. उन्होंने कहा कि पुलिस शव को ऑटोप्सी (शव परीक्षण) के लिए ले गई और उन्हें अपने बेटे को एक अलग कब्रिस्तान में दफनाने के लिए मजबूर किया.

पिता बोले, बेटे के शव के लिए करनी पड़ी मिन्नत

अरशद ने आगे कहा, "पूरी रात और दोपहर मैं पुलिस के सामने शव देने के लिए गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया कि हम उसे अपने पैतृक इलाके में नहीं दफना सकता है. अंत में मैंने उनसे कहा कि अगर वे लोग चाहते हैं तो मैं उसे असकी नानी के वहां दफना सकता हूं जो कि 15 किलोमीटर दूर है. बाद में जब पुलिस ने अनस का शव दिया तो हमें उसे तुरंत दफनाने के लिए मजबूर किया. मैंने उनसे विनती की कि ऐसे दफन नहीं किया जाता है और हमें कम से कम हमारे रीति-रिवाजों का पालन करने की अनुमति दी जानी चाहिए. इस बात पर वे किसी तरह सहमत हो गए, जिसके बाद हम शव लेकर केवल रीति-रिवाजों को पूरा करने और उसे दफनाने के लिए वापस आ गए."

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