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रोहिंग्या यूपी में बना रहे ठिकाना! चुनाव में हो सकती है भागीदारी, ATS की पूछताछ में हुए बड़े खुलासे

यूपी एटीएस ने गाजियाबाद से रोहिंग्या नागरिक आमिर हुसैन और नूर आलम को गिरफ्तार किया. दोनों को लखनऊ में 5 दिन की रिमांड पर लाया गया. इस दौरान पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं. 

यूपी के ADG लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार यूपी के ADG लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पकड़े गए रोहिंग्या से पूछताछ में खुलासा
  • रोहिंग्या और बांग्लादेशी यूपी में बना रहे ठिकाना
  • पीएफआई और रोहिंग्या का कनेक्शन

अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या को लेकर सुरक्षा एजेंसिया सतर्क हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश में कई रोहिंग्या पकड़े गए हैं. जानकारी के मुताबिक यूपी एटीएस ने गाजियाबाद से रोहिंग्या नागरिक आमिर हुसैन और नूर आलम को गिरफ्तार किया. दोनों को लखनऊ में 5 दिन की रिमांड पर लाया गया. इस दौरान पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं. 

पूछताछ के दौरान पता चला है कि देश में आमिर हुसैन नामक वेंडर है जो अवैध तरीके से रोहिंग्या नागरिकों को भारत में एंट्री कराता है. वेंडर दिल्ली के खजूरी खास से ऑपरेट करता है. 

रोहिंग्या और बांग्लादेशी यूपी में बना रहे ठिकाना

ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के मुताबिक, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को यूपी में ठिकाना बनाने के लिए प्रेरित किया गया है. माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इन सभी को राशन कार्ड और पैन कार्ड बनवा कर उनकी स्थाई सदस्यता भी दिलवाई जाती है. जिससे यूपी में चुनाव में इनकी भागीदारी रहती है और एक बड़ा वोट बैंक भी तैयार होता है, जिसके लिए इनको अच्छी खासी रकम भी दी जाती है.  

प्रशांत कुमार ने बताया कि रोहिंग्या इस समय हर विधानसभा क्षेत्र में रह रहे हैं, लेकिन इनकी पहचान कर पाना इस वजह से मुश्किल होता है क्योंकि इनके पास आधार कार्ड और वोटर कार्ड अन्य राशन संबंधी कार्ड मौजूद रहते हैं. जिससे वह आम जनता में घुल-मिल जाते हैं और चुनाव में वोटिंग भी कर सकते हैं.  

साल 2021 में पकड़े गए कई रोहिंग्या 

एटीएस ने इसी साल 6 जनवरी को संत कबीर नगर जिले के समर्थन गांव में बसे रोहिंग्या अजीजुल्लाह को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद 28 फरवरी को अलीगढ़ के कमेला रोड पर रहे मोहम्मद फारुख और हसन को पकड़ा था. फिर फारुख के भाई शाहिद को 1 मार्च को उन्नाव से दबोचा गया. इसके साथ ही साथ अन्य तार जोड़ते हुए शाहिद के बहनोई जुबेर के बारे में भी जानकारी मिली, लेकिन वह एटीएस के हाथ नहीं लगा. 

शाहिद के पास से 5 लाख रुपये के साथ भारतीय नागरिकता से जुड़े कई दस्तावेज मिले थे, जो फर्जी तरीके से बनाए गए थे. इन सब से पूछताछ में बांग्लादेशी रिश्तेदारों की बात सामने निकल कर आई थी और बताया गया था यहां पर वो अपने रिश्तेदारों की मदद से रहने आए थे.  जिसकी वजह से हजारों रोहिंग्या यहां आ गए हैं और स्थानीय निवासी बन गए हैं. 

रोजगार के लिए ये प्रदेश के बूचड़खाने में काम करते हैं. अलीगढ़, आगरा, उन्नाव में स्लॉटर हाउस मौजूद हैं, यहां पर ये मोटा पैसा कमाते हैं. इनसे पैसा कमाने के एवज में दलाल इनसे कमीशन लेते हैं और इनको इस काम के लिए लगातार लाते रहते हैं. 

पीएफआई और रोहिंग्या का कनेक्शन?

31 जनवरी 2019 में CAA के विरोध में देशभर में प्रदर्शन और हिंसा हुई, जिसमें रोहिंग्या की भूमिका सामने आई थी. कानपुर में हिंसा भड़काने के आरोप में पीएफआई सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जिसमें 
मोहम्मद उमर सैयद, अब्दुल हाशमी, फैजान मुमताज, मोहम्मद वासिम और सरवर आलम आदि रोहिंग्याओं के पीएफआई के संपर्क में होने का दावा किया गया. 

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