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एंटीलिया केस की चार्जशीटः NIA ने बताया साजिश के पीछे सचिन वाजे का मकसद, पर नहीं खुला जिलेटिन का राज

सचिन वाज़े को बहाली के बाद "क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट" (CIU), अपराध शाखा, मुंबई में प्रभारी के रूप में तैनात किया गया था. उसे अतिरिक्त आयुक्त (अपराध) के कार्यालय में ही एक चेंबर आवंटित किया गया था, जो मुंबई अपराध शाखा कार्यालय की चौथी मंजिल पर मौजूद था.

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सचिन वाज़े ही इस मामले में सबसे पहले मौके पर पहुंचा था सचिन वाज़े ही इस मामले में सबसे पहले मौके पर पहुंचा था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एंटीलिया केस का मुख्य आरोपी है सचिन वाजे
  • वाजे ने ही रची थी पूरे मामले की साजिश
  • NIA कर रही है इस केस की छानबीन

मुंबई के एंटीलिया केस में दायर की गई चार्जशीट में एनआईए ने खुलासा किया है कि विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो कार एंटीलिया के पास पार्क करने के पीछे सचिन वाजे का मकसद क्या था? चार्जशीट के अनुसार लंबे समय से पुलिस सेवा से बाहर रहा सचिन वाजे अपना पुराना दबदबा और रुतबा हासिल करना चाहता था.

सचिन वाज़े को सक्षम अधिकारी के तौर पर पुलिस सेवा में बहाल किया गया था और उसे "क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट" (CIU), अपराध शाखा, मुंबई में प्रभारी के रूप में तैनात किया गया था. उसे अतिरिक्त आयुक्त (अपराध) के कार्यालय में ही एक चेंबर आवंटित किया गया था, जो  मुंबई अपराध शाखा कार्यालय की चौथी मंजिल पर मौजूद था.

एनआईए को जांच में आगे पता चला है कि लंबे समय से जेल में बंद रहा और पुलिस सेवा से बर्खास्त रहने वाला सचिन वाज़े एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर फिर से अपना दबदबा कायम करना चाहता था. वो अपना रुतबा फिर से हासिल करना चाहता था.

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इसलिए उसने अपने दूसरे साथियों के साथ मिलकर मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ों भरी स्कॉर्पियो कार छोड़ने की साजिश रची थी. जिसमें एक धमकीभरा नोट भी था. उसने अंबानी परिवार को मौत का डर दिखाने के लिए विस्फोटक भरी स्कॉर्पियो कार को एंटीलिया के पास खड़ा कर दिया था. जिसे आतंकी कृत्य बताया गया था.

ये सवाल अभी बाकी है
सचिन वाज़े ने कैसे और कहां से हासिल की थी जिलेटिन की छड़ें? इस बात का कोई जिक्र NIA की पूरी चार्जशीट में नहीं है. जबकि एंटीलिया के बाहर से बरामद की गई स्कॉर्पियो कार से जिलेटिन की 20 छडें बरामद की गईं थी. चार्जशीट के मुताबिक मुंबई पुलिस का बर्खास्त एपीआई सचिन वाजे इस केस का मुख्य आरोपी है. वो इस साजिश के जरिये बड़े कारोबारी से उगाही की मंशा रखता था. साजिश का खुलासा होने के डर से ही सचिन वाजे और उसके साथियों ने मनसुख हिरेन की हत्या की थी. इस पूरी चार्जशीट में इस बात का जिक्र कहीं नहीं हुआ है कि सचिन वाजे ने स्कार्पियो से बरामद जेलेटिन की 20 छडें कहां से हासिल की थी. 

हजारों पेज की चार्जशीट, 303 गवाह
इस मामले में हजारों पेज की चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें 303 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए हैं. चार्जशीट में लिखा है कि सचिन वाजे ने इस पूरी साजिश को तैयार करने के लिए 100 दिन के लिए होटल ओबेरॉय में एक रूम बुक किया था. ये रूम किसी सुशांत खेमकर के नाम से फर्जी आईडी पर बुक हुआ था. वाजे ने इस रूम को सेफ हाउस के तौर पर इस्तेमाल किया था.

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वाज़े ने ही बदली थी नंबर प्लेट
बर्खास्त एपीआई सचिन वाजे ने मनसुख हिरेन की स्कार्पियो कार की नंबर प्लेट बदली थी, रिलायंस इंडस्ट्री के नाम पर एक रेंज रोवर कार के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल स्कार्पियो पर करने का आईडिया भी सचिन वाजे का ही था, ताकि देश के नामी कारोबारी को डराकर वसूली की जा सके.

 

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