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MP: पुलिस ने यौन उत्पीड़न पीड़िता का कराया अंतिम संस्कार, कांग्रेस ने बताया शर्मनाक

डीआईजी इरशाद वली ने पीड़िता के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप नकारते हुए कहा कि उसके अंतिम संस्कार में कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गई और ना ही परिवार पर कोई दबाव बनाया गया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीएम शिवराज ने दिए एसआईटी जांच के आदेश
  • पूर्व सीएम कमलनाथ ने घटना को बताया शर्मनाक
  • नींद की गोली के ओवरडोज से हुई थी पीड़िता की मौत

उत्तर प्रदेश के हाथरस के बाद अब मध्य प्रदेश में भी यौन उत्पीड़न की शिकार एक पीड़िता का शव उसके घर न ले जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. परिजनों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शव को सीधे श्मशान घाट ले जाकर अंत्येष्टि कराने का आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की एसआईटी जांच के आदेश दे दिए हैं, वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे अमानवीय बताया  है.

दरअसल, भोपाल के प्यारे मियां कांड में यह बच्ची पीड़िता थी जिसे शासकीय बालिका गृह में रखा गया था. बालिका गृह में नींद की गोलियों के ओवरडोज से तबीयत बिगड़ी तो पीड़िता को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम के बाद शव आमतौर पर परिजनों को सौंप दिया जाता है लेकिन परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी के शव को भारी पुलिसबल की मौजूदगी में सीधे श्मशान घाट ले जाया गया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं. आरोप है कि पुलिस पीड़िता के पिता और चाचा को भी साथ ही श्मशान घाट ले गई. घर पर लोग रस्म अदायगी के लिए शव का इंतजार करते गए.

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महिला पुलिस की एक टीम घर से पीड़िता की मां और कुछ रिश्तेदारों को एक वैन में बैठाकर श्मशान घाट ले गई और अंतिम संस्कार करा दिया. पीड़िता की मां ने दर्द बयान करते हुए कहा है कि बेटी को अंतिम बार घर लाने की इच्छा अधूरी रह गई. पुलिस को उसके अंतिम संस्कार की ऐसी भी क्या जल्दी थी.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में ट्वीट कर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि हाथरस जैसी अमानवीयता कितनी बार दोहराई जाएगी? भाजपा सरकार महिला सुरक्षा में तो फेल है ही, पीड़िताओं और उनके परिवार से मानवीय व्यवहार करने में असमर्थ भी है.

कमलनाथ ने बताया शर्मनाक

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे निंदनीय और शर्मनाक बताया है. उन्होंने ट्वीट कर निशाना साधा और कहा कि शिवराज सरकार में भांजियां भी सुरक्षित नहीं. कितनी अमानवीयता, मृत पीड़िता को उसके घर तक नहीं जाने दिया, उससे अपराधियों जैसा व्यवहार? उसके परिवार को अंतिम रीति- रिवाजों से भी वंचित किया गया, यह कैसी निष्ठुर व्यवस्था? कहां हैं जिम्मेदार? प्रदेश को कितना शर्मशार करेंगे?

मुख्यमंत्री ने दिए एसआईटी जांच के आदेश

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. उन्होंने मामले की जांच एसआईटी से कराने के आदेश दे दिए हैं. एसआईटी बालिका गृह में बच्ची द्वारा नींद की गोली खाने से लेकर उसकी मृत्यु और उसके बाद श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार करवाए जाने तक, पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी. बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पीड़िता की मौत के संबंध में भी जानकारी ली और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए.

डीआईजी ने नकारे परिवार के आरोप

डीआईजी इरशाद वली ने पीड़िता के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप नकारते हुए कहा कि उसके अंतिम संस्कार में कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गई और ना ही परिवार पर कोई दबाव बनाया गया था. परिजनों को कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई थी. उन्होंने दावा किया कि परिजनों की सहमति मिलने के बाद ही शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया था. 

क्या है प्यारे मियां यौन शोषण कांड

बता दें कि भोपाल से एक अखबार निकालने वाले प्यारे मियां को जुलाई 2020 में श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया था. प्यारे मियां पर कुल तीस हजार रुपये का इनाम था और उसकी गिरफ्तारी के लिए स्पेशल टीम भी बनाई गई थी. प्यारे मियां पर आरोप है कि वह पिछले करीब आठ साल से नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण कर रहा था. इस मामले के सामने आने के बाद भोपाल के जिलाधिकारी ने जांच के आदेश देने के साथ ही पीड़ित लड़कियों को शेल्टर होम में रखने के लिए कहा था जिससे उनकी जान को कोई खतरा न हो. प्यार मियां की करोड़ों की संपत्ति जब्त की जा चुकी है, वहीं कई संपत्तियों पर बुलडोजर भी चल चुका है.

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