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झारखंड के 14 नाबालिग बच्चों को कराया रेस्क्यू, दिल्ली की पॉश कॉलोनी में कराया जा रहा था काम

बच्चों को बड़े-बड़े घरों में बर्तन माजने, साफ-सफाई और घरों के कई काम करने कहा जाता था. सभी बच्चों को रांची वापस लाने के लिए दिल्ली के बाल कल्याण समिति द्वारा एस्कॉर्ट आर्डर जारी किया जा चुका था. 

रेस्क्यू किए गए बच्चे. (फोटो-आजतक) रेस्क्यू किए गए बच्चे. (फोटो-आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बच्चियां भूखे पेट रहकर करती थी काम
  • मारपीट कर कराया जाता था झाड़ू पोछा
  • स्टेट रिसोर्स सेंटर झारखंड ने किया रेस्क्यू

स्टेट रिसोर्स सेंटर झारखंड ने दिल्ली में रइसों के घर जबरन झाड़ू पोंछा करने को मजबूर बच्चों को रेस्क्यू किया है. इन बच्चों को गरीब रथ से रांची रेलवे स्टेशन लाया गया है. अपने घर आने के बाद रेस्क्यू किए गए ये बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं. दलालों के द्वारा इन बच्चों को बहला-फुसलाकर नई दिल्ली में अच्छे काम करने को कह कर ले जाया गया था.

बच्चों को बड़े-बड़े घरों में बर्तन माजने, साफ-सफाई और घरों के कई काम करने कहा जाता था. सभी बच्चों को रांची वापस लाने के लिए दिल्ली के बाल कल्याण समिति द्वारा एस्कॉर्ट आर्डर जारी किया जा चुका था. इसी के तहत झारखंड सरकार एवं बाल कल्याण संघ द्वारा दिल्ली में संचालित एकीकृत पुनर्वास संसाधन केंद्र की टीम के साथ गरीब रथ ट्रेन से रांची लाया गया. सभी बच्चे अपने घर पहुंच कर काफी खुश हैं और आगे अपना पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं.

बता दें कि  झारखंड से पलायन किए 12 बालिकाएं और 2 बालकों को दिल्ली से रेस्क्यू कर रांची लाया गया. जिसमें पश्चिमी सिंहभूम जिला की 5, पाकुड़ जिला की 1, साहिबगंज जिला की 2,  सिमडेगा जिला की 1, गोड्डा जिला की 2,  गुमला जिला की 1 और खूंटी जिला से 1 बालिका शामिल हैं. सभी बच्चे नाबालिग हैं. पलायन और ट्रैफिकिंग के शिकार इन बालकों को दिल्ली से रांची लाने वाली टीम में वीकेएस से सुनील कुमार गुप्ता , निर्मला खालको, मंजू कुमारी और अंकिता मिश्रा के साथ दिल्ली पुलिस की टीम भी शामिल है.

 

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